राजभवन में कालानमक धान की फसल तैयार जल्द शुरू होगी कटाई।
प्राकृतिक पद्धति से हुई खेती
राजभवन में कालानमक धान की खेती प्राकृतिक पद्धति से की गई। फसल में किसी तरह के रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं हुआ। जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक ही इस्तेमाल हुए हैं।
ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिशों से कालानमक धान का न केवल निरंतर रकबा बढ़ रहा है। बल्कि विदेशों में उसकी मांग भी बढ़ रही है। सरकार की पहल पर सिद्धार्थनगर में कालानमक धान के लिए सीएफसी भी संचालित हो गई है। कुशीनगर के कप्तानगंज ब्लॉक के चार गांव में 100 किसान 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती कर हैं। वहीं, कौड़ीराम में 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती की गई है। कालानमक धान को सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बहराइच, बस्ती, कुशीनगर, गोंडा, बाराबंकी और देवरिया का जियोग्राफिकिल इंडिकेटर (जीआई) टैग भी हासिल है।
कहते हैं वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी के मुताबिक कालानमक चावल में सुंगध एवं स्वाद के अलावा प्रोटीन, जिंक, आयरन, बीटा कैरोटीन भी मिलता है। यह भरपूर स्वास्थ्यवर्धक है। (एएमएपी)



