नवस्थापित कैंपों के विरोध के लिए नक्सली अंदरूनी क्षेत्र के ग्रामीणों को डरा-धमका कर सुरक्षा कैंपों के विरूद्ध रैली, धरना-प्रर्दशन करने हेतु मजबूर किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में नक्सलियों के मंशानुसार कार्यवाही नहीं किए जाने से उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। दूसरी ओर नक्सलियों के इस प्रकार के नकारात्मक विचाराधारा तथा जनविरोधी एवं विकास विरोधी हरकतों को जनता द्वारा स्वीकार न करते हुये नक्सल संगठन को किसी प्रकार का समर्थन एवं सहयोग नही दिया जा रहा है।

बस्तर संभाग के 42 हजार वर्ग किमी. में से मात्र 06 हजार वर्ग किमी.का इलाका ही आंशिक नक्सल प्रभावित रह गया है। इन इलाकों में दक्षिण बीजापुर, दक्षिण सुकमा, इन्द्रावती नेशनल पार्क का इलाका, अबूझमाड़ एवं कोयलीबेड़ा क्षेत्र के चंद वर्ग किमी. तक सीमित होकर रह गया है। इस प्रकार अपने पैर के नीचे से जमीन खिसकने के कारण से नक्सलियों में बौखलाहट है। अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए नक्सली द्वारा किसी भी हद तक जाकर निर्दोष ग्रामीणों की हत्या करना, विकास कार्यों में उपयोग किये जा रहे वाहनों को आग के हवाले करना, सुरक्षा बलों के ऊपर जानलेवा हमला करना जैसे वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है।
नवस्थापित सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से आरआरपी-आई योजना के तहत स्वीकृत 51 सडक़ (1991 कि.मी.) में से 1616 कि.मी. कार्य पूर्ण किया गया है, 375 कि.मी. सड़को का निर्माण कार्य दक्षिण बस्तर के घुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की दृष्टिकोण से शेष है। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आबंटित 05 अतिरिक्त सीआरपीएफ वाहिनियों को उस शेष बची 375 कि.मी. सड़को का निर्माण वाले ईलाके में तैनात की जाकर अपूर्ण आरआरपी-आई सडक़ निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु कार्ययोजना तैयार की गई है।
बस्तर संभाग में स्थापित सुरक्षा कैंपों वाले ग्रामों को समग्रित विकास कार्य हेतु चयनित कर उक्त स्थानों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया जाकर क्षेत्र वासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
बस्तर संभाग अंतर्गत प्रथम चरण में कुल 525 मोबाईल टॉवर स्थापित किये जा चुके हैं। द्वितीय चरण में 614 मोबाइल टॉवर स्थापित किये जाने की कार्रवाई वर्तमान में जारी है। विगत कई वर्षों से नक्सलियों द्वारा स्थानीय आदिवासी युवक-युवतियों को जल, जंगल,जमीन के मुद्दे पर दिग्भ्रमित कर उन्हें शासन-प्रशासन के विरुद्ध भड़काने का प्रयास किया गया। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल एवं जिला पुलिस बल में स्थानीय युवक-युवतियों को भर्ती में अधिक से अधिक अवसर दिये जाने से विगत वर्षों में नक्सली संगठनों की भर्ती में उल्लेखनीय कमी आयी है। (एएमएपी)



