लखनऊ में चल रहे सनतकदा महोत्सव में कार्यक्रम पेश करते हुए उन्हें पड़ा हार्टअटैक ।
दिनेश प्रसाद लंबे समय से उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी के कथक केंद्र में कार्यरत रहे। कथक आचार्यों के साथ भी उनके कार्यों का एक लंबा इतिहास रहा है। शाम में कुछ पल पहले तक वह कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में चल रहे सनतकदा महोत्सव में आयोजित ताल वाद्य कचहरी कार्यक्रम में, पखावज वादन कर रहे थे। चंद लम्हें पहले तक जिनकी उंगलियां पखावज पर थिरक रहीं थीं, वह कलाकार अब इस दुनिया में नहीं रहा। अपने अंतिम समय में वह पखावज के साथ ही रहे।

दिनेश प्रसाद मथुरा घराना के पखावज वादकों में से थे। उन्होंने 1989 से 2014 तक संगीत नाटक अकादमी में संगीत की शिक्षा दी थी, जहां उन्हें 2005 में पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह दूरदर्शन और रेडियो के प्रतिष्ठित कलाकारों में रहें उनके खुशमिजाज व्यक्तित्व को पूरा लखनऊ हमेशा याद रखेगा।
प्रसिद्ध कथक नृत्यागंना आकांक्षा श्रीवास्तव ने बताया कि कथक केंद्र में होने से उन्हें कई कथक नृत्यागंनाओं के कार्यक्रम में संगत की है। बताया कि हम जब 11-12 साल के रहे होंगे, तब से उनका नाम सुन रहे हैं। उनके न रहने पर संगीत की अपूर्ण क्षति हुई है। (एएमएपी)



