दाहोद व वडोदरा के शिक्षकों ने शोध के पेटेंट के लिए किया आवेदन।
डॉ जानी और डॉ मोहसिन ने अपनी पढ़ाई, अनुभव के अलावा पर्यावरण संबंधी विषय में रुचि लेकर ग्रीन एसी सिस्टम को विकसित किया है। इस शोध के लिए इन्होंने तीन वर्ष की कड़ी मेहनत की। यह डिजाइन प्रोजेक्ट इनोवेटिव डेसीकेंट डिहयूमीडिफिकेशन एंड एयर कंडिशनिंग सिस्टम पर आधारित है। इसकी वजह से परंपरागत एसी से यह 29 फीसदी कम ऊर्जा पर संचालित होती है।

डेसिकेन्ट नमीशोषक आधारित कुलिंग सिस्टम पर डॉ. दिलीप ने बताया कि वातावरण में कूलिंग के लिए आमतौर पर परंपरागत वेपर कप्प्रेशन कूलिंग सिस्टम में एक ही कूलिंग क्वॉइल नमी शोषक और कूलिंग ऑपरेशन करता है। इसकी वजह से कम्प्रेशन में अधिक इलेक्ट्रिसिटी इस्तेमाल होने से बिजली बिल अधिक आता है। इसके अलावा प्रदूषण फैलने से ग्लोबल वॉर्मिंग का भी खतरा रहता है। इसके वैकल्पिक रूप में डेसिकन्ट नमीशोषक आधारित कुलिंग सिस्टम के उपयोग से नमीशोषक के जरिए सर्वप्रथम नमी दूर करने से सुखी हवा के अधिक तापमान को कुलिंग किया जाता है, इससे ऊर्जा खर्च करीब 29 फीसदी कम होता है। इसे ग्रीन कुलिंग भी कहा जाता है।
सौर आधारित ऊर्जा कलेक्टर के जरिए संचय कर रीजनरेशन के लिए उपयोग किया जा सकता है। इससे इनोवेटिव कुलिंग बड़े कैपिसिटी के लिए प्रभावी साबित होता है। डेसिकेंट नमीशोषक जो कि सिलिका जेल, मोलिक्यूलर सॉयल, मेटल सिलिकेट जैसे डेसिकेंट रसायनों से बनाया जाता है। यह अपने वजन से 10 हजार फीसदी नमीशोषित करने की क्षमता रखता है। नमीशोषक पार्शियल प्रेशर के डाल्टन के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें नमी वाली हवा को सूखे डेसिकेंट के ऊपर से ले जाने से डेसिकेंट का दबाव सूखे वातावरण में कम होता है। इससे नमी प्राकृतिक नमी वाली हवा से दूर होकर प्रेसर डेसिकेंट के कारण डेसिकेंट की सतह पर जमा हो जाता है। दूसरे छोर से बाहर निकलने वाली हवा सूखी होती है और इसे जरूरत के अनुसार कूलिंग की जाती है। इसके कारण ऊपर से विपरीत नमी, नमीशोषक में से हवा में स्थानांतरित होती है। इसे एक्सोस के रूप में खुली हवा में हटाया जाता है और नमीशोषक पूर्ववत कार्यरत हो जाता है। इसी साइकिल से लगातार काम होता रहता है।(एएमएपी)



