देश विरोधी ताकतों से कड़ाई से निपटने का वक्त।
देश विरोधी शक्तियां अब खुलकर मैदान में आ गई हैं। अब लुका छिपी का खेल बंद हो गया है। प्रशांत भूषण कह रहा है कि देश में क्रांति और खून खराबे की जरूरत है। सोनिया गांधी का एजेंट योगेंद्र यादव पहले से ही कह रहा था कि देश अब संसद से नहीं, सड़क से चलेगा। ध्रुव राठी नाम का यूट्यूबर कह रहा है कि सारा बॉलीवुड, पुलिस वाले और सेना के लोग सड़कों पर आ जाएं तो सरकार क्या कर लेगी। आईसा नेता और इस समय राहुल गांधी की सबसे प्रिय नेहा बोरा का कहना है कि बांग्लादेश में जो हुआ, वही यहां भी होना चाहिए। अब इन बयानों से आप समझ जाइए कि इस देश में क्या करने की कोशिश हो रही है और राहुल गांधी इन सबके साथ हैं।
राहुल गांधी याचिका दायर करने के नाम पर भीड़ लेकर एक तरह से सुप्रीम कोर्ट पर चढ़ाई करने गए थे। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री को तो धक्का देकर किनारे कर दिया, लेकिन नेहा बोरा और प्रियंका वाड्रा के कंधे पर हाथ रखकर चल रहे थे। इससे एक बात तो स्पष्ट हो गई कि इनका जनतंत्र और संविधान से विश्वास उठ गया है। अब ये कह रहे हैं कि हम तो सड़क पर अराजकता फैलाएंगे। सरकार को जो करना हो कर ले। अब सरकार के सामने कानून का राज स्थापित करने की चुनौती है। अब वह समय चला जाना चाहिए जब सड़क पर पुलिस वाले पिटें। एक टीवी प्रोग्राम में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कह रहे थे कि इन लोगों की ठीक से सेवा नहीं हुई। मुझे लगता है कि इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ उन्होंने ही सही बात कही है क्योंकि लातों के भूत बातों से कभी मानते नहीं। आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार करके जेल जरूर भेजा गया है, लेकिन अभी ठीक से संदेश गया नहीं है। हम भारतवासियों का जो क्षमा करने का स्वभाव है,वह हमारी कमजोरी बन चुका है और उसका भारत विरोधी शक्तियां फायदा उठा रही हैं। अमेरिका की एक गायिका साफ तौर पर कह रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से फंडिंग मिल रही है। इनके बीच से एक ऐसा यूट्यूबर पकड़ा गया है, जो ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के एक अधिकारी से पैसा लेकर वीडियो बना रहा था। तो अब किसी तरह का कोई संदेह नहीं रह गया है। अब हमारे आपके सामने दो ही विकल्प हैं। हमें देश के विरोध में खड़ा होना है या देश के साथ। बीच का कोई रास्ता नहीं है। यह दुनिया को दिखाने का अवसर है कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। मैं सारे राष्ट्रवादियों से कह रहा हूं कि इस बात पर फूले मत समाइए कि इन राष्ट्र विरोधियों की संख्या बहुत कम है। आक्रांता हमेशा छोटी संख्या में आता है। मुगल और अंग्रेज कोई बहुत बड़ी संख्या में नहीं आए थे, लेकिन इन लोगों ने लगभग 1000 साल तक बहुसंख्यक भारतीयों पर राज किया। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी से पूछा गया था कि आपकी पार्टी तो कोई चुनाव जीतती नहीं। उन्होंने जवाब दिया कि हमारे पास विधायक और सांसद भले न हों, लेकिन देश में जितने आंदोलन होते हैं, उनका नैरेटिव हम तय करते हैं। उनकी वह बात बिल्कुल सही थी। दुश्मन अंदर तभी घुसता है,जब दरवाजा अंदर से खुलता है। तो उनकी पहचान करने की जरूरत है जो अंदर से दुश्मन के लिए दरवाजा खोल रहे हैं।
इस समय दो लोगों को याद करने की जरूरत है। आचार्य चाणक्य और भगवान श्रीकृष्ण। आचार्य चाणक्य ने कहा था कि आप अपने दुश्मन को एक अवसर दो, दोस्त को दो अवसर दो, लेकिन गद्दार को कभी अवसर मत दो। उसे अवसर देना आत्मघाती होगा। भारत को तय करना है कि क्या गद्दारों को मौका देना है? इसी से तय होगा कि देश का भविष्य क्या होगा? इसी तरह भगवान कृष्ण ने शरशैय्या पर लेटे भीष्म पितामह से जो कहा था,उसे हर भारतीय को याद रखना चाहिए। श्री कृष्ण ने कहा था कि जब क्रूर और अनैतिक शक्तियां सत्य और धर्म का विनाश करने पर तुली हुई हों तब नैतिकता की बात करना अर्थहीन है।तब महत्वपूर्ण होती है विजय और केवल विजय और उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि भविष्य को यह सीखना होगा। कलयुग में और कठिन परिस्थिति होगी और वह परिस्थिति आज हमारे सामने है। आज परिस्थिति देश को बचाने और दुश्मनों को पहचानने की है। जब बात यह हो कि देश को बांग्लादेश और नेपाल बना देंगे तो समझ जाइए कि उनका इरादा क्या है और इसमें दुनिया का कोई देश आपका साथ नहीं देगा। दुनिया के तमाम ऐसे देश हैं जो भारत को नष्ट होते हुए देखना चाहते हैं। इनमें पहले नंबर पर है अमेरिका। इतिहास उठाकर देख लीजिए जिस जिसने अमेरिका का विरोध किया या साथ नहीं दिया, उसका क्या हाल हुआ? बांग्लादेश आपके सामने है। शेख हसीना ने अमेरिका की बात मानने से मना कर दिया था तो उनकी सत्ता चली गई। फ्रांस ने युद्ध में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया तो वहां भी शिक्षा को सुधारने के नाम पर आंदोलन शुरू हुआ। आज पूरा फ्रांस जल रहा है। अमेरिका के एक मंत्री की बात तो आपको याद ही होगी। उसने कहा था कि हम भारत को चीन नहीं बनने देंगे। उसे इतना ताकतवर नहीं होने देंगे कि एक दिन हमें चुनौती देने लगे। तो अब यह चुनौती अमेरिका और बहुत से यूरोपीय देशों को महसूस हो रही है। इसलिए देश विरोधी ताकतों को भरपूर पैसा और संसाधन मिल रहे हैं। यूरोप के मीडिया में एसआईआर को लेकर एक जैसा कंटेंट छप रहा है। झूठ को प्रचारित किया जा रहा है कि 13 करोड़ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया। वह यह डिटेल नहीं बताते कि इनमें कितने मर गए, कितने जगह छोड़कर चले गए और कितने नाम डुप्लीकेट थे। क्योंकि यह डिटेल देंगे तो एक्सपोज हो जाएंगे।
ये इंफॉर्मेशन वारफेयर का समय है। ये ऐसा युद्ध है जो हथियारों से नहीं लड़ा जाएगा। आपने देखा ही होगा कि हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी ने जो कुछ किया और उसे विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने जिस तरह से एंप्लीफाई किया। पूरी दुनिया में ऐसी धारणा बनाई गई कि भारत में संवैधानिक संस्थाएं, जनतंत्र सब खत्म हो गया है। अराजकता है। सरकार अधिनायकवादी हो गई है। इसलिए इस खतरे को किसी सरकार, किसी नेता, किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ मत देखिए। नेता और सरकारें आती जाती रहेंगी। देश बचेगा तभी कुछ हो पाएगा। इस समय देश के अस्तित्व और देश की संस्कृति को चुनौती दी जा रही है। उससे लड़ने के लिए जरूरी है कि इन लोगों की नीति नहीं, नीयत पर ध्यान दीजिए। नीयत को पहचान कर उसको एक्सपोज करने का काम कीजिए। ये लड़ाई बहुत कठिन लड़ाई है क्योंकि ये तथ्यों, तर्कों और सत्य पर नहीं लड़ी जा रही। यह एक झूठ के आधार पर बनाई गई धारणा पर लड़ी जा रही है। आपने देखा होगा कि राहुल गांधी जब राष्ट्रपति से मिलने गए थे तो राष्ट्रपति ने कहा कि वोट चोरी का प्रमाण दे दीजिए। वह आज तक प्रमाण नहीं दे पाए। प्रमाण होगा तब तो देंगे। उनको तो सिर्फ वोट चोरी का नैरेटिव खड़ा करना है। इस षड्यंत्र को नाकाम करने की जरूरत है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)












