#santoshtiwariडॉ. संतोष कुमार तिवारी।
भारत के राष्ट्रपति डॉ. अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम (1931-2015) की प्रसिद्ध मिसाइल मैन के तौर पर है। वह वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि पशु पक्षियों से भी उनका बहुत लगाव था।
अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में, उन्होंने राष्ट्रपति भवन परिसर में एक घायल हिरण के बच्चे को देखा, जिसका पैर टूटा हुआ था और वह बहुत मुश्किल से चल पा रहा था। वे तुरंत उसकी देखभाल में जुट गए। उस नन्हे जानवर को यह जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसे भारत के राष्ट्रपति के तौर पर एक बहुत बड़ा रक्षक मिल गया है। उन्होंने उस हिरण के बच्चे को स्वस्थ करने का जिम्मा तुरन्त पशु चिकित्सा विशेषज्ञों को सौंपा। और डॉ. कलाम तब तक चैन से नहीं बैठे जब तक उन्होंने उस हिरण के बच्चे को फिर से खुशी-खुशी चलते हुए नहीं देख लिया।
डॉ. कलाम पहले डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) में काम करते थे। उस समय, उन्होंने वहां सुरक्षा दीवारों के ऊपर टूटे हुए कांच के टुकड़े लगाने की योजना को मना कर दिया था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नुकीले कांच से दीवार पर बैठने की कोशिश कर रहे स्थानीय पक्षियों को चोट लग सकती है।
राष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान 61वीं घुड़सवार सेना के एक घोड़े की आंख का कैटरेक्ट का ऑपरेशन किया गया।
जब डॉ. कलाम राष्ट्रपति भवन में आए, तो उन्होंने वहां बगीचों की तरफ की खिड़कियों के लकड़ी के पैनलों को पारदर्शी कांच के पैनलों से बदल दिया गया ताकि वे हरियाली और पक्षियों को बिना उन्हें परेशान किए देख सकें।
राष्ट्रपति भवन में डॉ. कलाम की दिनचर्या में पक्षियों को खाना खिलाना भी शामिल था।
एक बार डॉ. कलाम ने हास्यबोध में एक बात कही थी जिसका तात्पर्य यह था कि राष्ट्रपति भवन के परिसर में रहने वाले ये हिरण, मोर आदि पशु पक्षी ही यहाँ के असली स्थायी निवासी हैं। राष्ट्रपति पद पर आसीन लोग तो लोग आते-जाते रहते हैं।
(लेखक सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं।)