सराहनीय पहल।

उत्तर प्रदेश के जिले गोंडा से खाकी की हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिसे देखकर हर कोई तारीफ कर रहा है। दरअसल यूपी पुलिस में तैनात एक सिपाही गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए पेड़ के नीचे स्कूल चलाता है। सिपाही को ड्यूटी से जब भी समय मिलता है वह जरूरतमंद गरीब बच्चों को पढ़ाता है। अपने इस काम की वजह से सिपाही चारों ओर चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस विभाग में तैनात सिपाही ने गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई है तो उसको पूरी लगन से पूरा भी करता है।

वर्तमान समय में सिपाही के पास है 100 बच्चे

जानकारी के अनुसार शहर के कर्नलगंज कोतवाली में सिपाही तैनात है। बच्चों के बीच में पुलिस सर के नाम से सिपाही मशहूर है और अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद प्रतिदिन एक घंटे गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए निकालते हैं। वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब 100 बच्चे पुलिस के इस सिपाही से पढ़ने के लिए आते हैं। सिपाही मोहम्मद जाफर की पाठशाला में सुबह होते ही बच्चों का आना शुरू हो जाता है। विज्ञान वर्ग से स्नातक मोहम्मद जाफर बड़े ही लगन से सभी बच्चों को पढ़ाते हैं। किसी भी बच्चे से अगर कोई पूछता है कि किससे पढ़ रहे हैं तो सभी की जुबान पर सिर्फ एक बात होती है। वह यह कि पुलिस सर बहुत अच्छा पढ़ाते हैं।

बच्चों को नवोदय विद्यालय की कराते हैं तैयारी

सिपाही मोहम्मद जाफर की पाठशाला में कक्षा एक से लेकर दस तक के बच्चों को पढ़ाते हैं। इसके साथ ही नवोदय विद्यालय की तैयारी भी कराते हैं। खाकी वर्दी धारण करे सिपाही बच्चों को अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान की शिक्षा देते हैं। जाफर का कहना है कि उनका सिविल सर्विसेज में जाने का सपना अधूरा रहा गया है। अपनी परिस्थितियों की वजह से वह सफल नहीं हो पाए और आईएएस बनने का सपना अधूरा रह गया। उसके बाद पुलिस में नौकरी मिलने के बाद सिविल सर्विसेज में जाने का सपना अधूरा ही रह गया।

सिविल सर्विसेज में जाने का सपना रह गया अधूरा

मोहम्मद जाफर का कहना यह भी है कि सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे लेकिन वह किसी कारणवश पूरा नहीं हुआ। अब वह चाहते हैं कि उनका पढ़ाया कोई बच्चा अगर सिविल सेवा में सफल हो गया तो उनकी आत्मा को संतुष्टि मिलेगी। इसके अलावा जाफर का शिक्षा देना शौक है। वह रोजाना उठकर घूमने टहलने की जगह बच्चों को पढ़ाते हैं। ऐसा करने से उनकी अंतरआत्मा को संतुष्टि मिलती है। प्रतिदिन पुलिस चौकी के पास में ही सुबह-शाम सिपाही की पाठशाला लगती है। जावेद का यह काम बच्चों, उनके अभिभावकों समेत विभाग में भी चर्चा में हैं।  (एएमएपी)