अंग्रेज शासन के 127 सालों बाद मिली रेल दोहरीकरण की सौगात।
देवेन्द्र ताम्रकार।

कोटा-बीना रेल लाईन पर रेल दोहरीकरण का कार्य पूरा होने के बाद अब यहां रेल यात्रियों के लिए लम्बी दूरी की नई-नई ट्रेनें मिलेंगी,विकास की रफ्तार बढ़ेगी और ट्रेनों की लेटलतीफी से भी छुटकारा मिलेगा।
पश्चिम-मध्य रेलवे के भोपाल रेल मण्डल द्वारा बीना से रुठियाई तक एवं रुठियाई से कोटा तक कोटा रेल मण्डल के तहत आरवीएनएल के द्वारा कोटा-बीना रेल दोहरीकरण का कार्य खण्ड स्तर पर किया गया।
नए प्लेटफार्म और पुलों का हुआ निर्माण
कोटा-बीना रेल दोहरीकरण के तहत रेल विकास निगम के द्वारा कई रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए नए प्लेट फार्म और पुलों का निर्माण किया गया है।
एक जानकारी के अनुसार बीना स्टेशन से गुना स्टेशन के बीच अशोकनगर, शाढौरा, हिनोतिया-पीपलखेड़ा, ओर, पिपरई, रेहटवास, गुनेरू-बामोरी, मुंगावली, कंजिया,सेमरखेड़ी, पिलीघाट, पगारा और माबन स्टेशन पर 14 नए हाई लेवल प्लेट फार्म का निर्माण किया गया हैं और कई नए ब्रिज बनाए गए हैं।

इसी प्रकार रुठियाई-कोटा स्टेशन के बीच 20 नए प्लेट फार्म का निर्माण किया गया है।
नव निर्मित भौंरा और सोगरिया स्टेशन का कार्य उच्चस्तरीय है। इस मार्ग पर कालीसिंध, चंद्राशल और पार्वती नदी पर बड़े पुलों का निर्माण किया गया है। यहां नए प्लेट फार्म निर्माण के साथ नई टिकट बिंडो भी खोली गईं हैं।
इस रेल लाईन दोहरीकरण परियोजना की कुल लम्बाई 282.66 किमी रही जिसको पूरा होने में पूरे 11 साल लगे वहीं इसकी एस्टीमेट लागत 1417.74 करोड़ थी, बाद में टोटल लागत 2476.43 करोड़ रही।

1970 तक चलती थी कोयले के इंजन वाली ट्रेन
दरअसल अंग्रेज शासन काल में 1896-97 बिछाई गई इकहरी रेल लाइन के बाद इस रेल खण्ड पर विस्तार नहीं हुआ था। 1970 के दरम्यान इस लाईन पर एक कोयले के इंजन वाली कोटा-बीना ट्रेन चलती थी। तत्पश्चात 1990 के बाद से इस लाईन पर ट्रेनों में इजाफा होना शुरू हुआ। पर जब 2012 में रेल दोहरीकरण परियोजना में यहां रेल दोहरीकरण के कार्य के शुरू होने पर दोहरीकरण का पूर्ण विस्तार होने पर रेल विस्तार के साथ विकास की रफ्तार पकड़ेगी और 127 वर्षों बाद रेलवे का नया इतिहास लिखा गया। (एएमएपी)



