आरबीआई ने जी-20 देशों के यात्रियों को भारत में रहने के दौरान मोबाइल आधारित यूपीआई के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया। इसमें कहा गया है कि प्रीपेड भुगतान उपकरण (पीपीआई) जारी करने की अनुमति प्राप्त बैंक या गैर-बैंक भारत आने वाले विदेशी नागरिकों या अप्रवासी भारतीयों को भारतीय रुपये में पूर्ण केवाईसी पीपीआई जारी कर सकते हैं। ये पीपीआई फेमा के तहत विदेशी मुद्रा में लेनदेन के लिए अधिकृत संस्थाओं के साथ सह-ब्रांडिंग व्यवस्था में भी जारी किए जा सकते हैं।

पीपीआई को यूपीआई से जुड़े वॉलेट के रूप में जारी किए जाने की है संभावना

उल्‍लेखनीय है कि यूपीआई एक भुगतान मंच है, जिसपर हम कई बैंक खातों को एक मोबाइल ऐप पर एकीकृत कर सकते हैं और उसके माध्यम से कहीं से भी कभी भी अपने बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसा भेज और मंगा सकते हैं। नए आए सर्कुलर के अनुसार पीपीआई को यूपीआई से जुड़े वॉलेट के रूप में जारी किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ मर्चेंट पेमेंट्स (पी2एम) के लिए हो सकता है। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

फिलहाल चुनिंदा हवाईअड्डों पर पहुंचने वाले जी-20 देशों के यात्रियों के लिए है ये सुविधा

इस संबंध में केंद्रीय बैंक ने कहा, शुरुआत में यह सुविधा चुनिंदा हवाईअड्डों पर पहुंचने वाले जी-20 देशों के यात्रियों को मिलेगी। बाद में इसका विस्तार देश में सभी प्रवेश बिंदुओं पर कर दिया जाएगा।आरबीआई ने कहा कि जी-20 देशों के यात्रियों के पासपोर्ट और वीजा के भौतिक सत्यापन के बाद पीपीआई जारी किए जाएंगे। खर्च होने के बाद पीपीआई में बची हुई रकम को जी-20 देशों के यात्री विदेशी मुद्रा में भुना सकते हैं या उसे ‘बैक टु सोर्स’ में स्थानांतरित किया जा सकता है।

जनवरी में 13 लाख करोड़ का लेनदेन

जी-20 दुनिया के विकसित और विकासशील देशों का मंच है। भारत ने एक दिसंबर, 2022 को जी-20 की अध्यक्षता संभाली थी । शुरुआत में इन्हीं देशों के यात्रियों को यूपीआई सुविधा मिलेगी। इन देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं।आरबीआई ने विदेशी नागरिकों और भारत आने वाले प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को इसके उपयोग की अनुमति देने की बुधवार को घोषणा की थी।यूपीआई के जरिये भुगतान जनवरी में मासिक आधार 1.3 फीसदी बढ़कर करीब 13 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।  (एएमएपी)