भारत के सैनिकों ने घोड़ों व खच्चरों पर सवार होकर गलवान घाटी के पास किया सर्वे।
हालांकि, पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत के बीच मई, 2020 से गतिरोध चल रहा है, लेकिन गलवान घाटी की घटना के बाद तनाव और बढ़ा, जिसकी वजह से सीमा पर दोनों देशों के हजारों सैनिक तैनात हैं और कई बार विवाद की भी स्थिति पैदा हुई है। भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बीच अचानक भारतीय सेना ने गलवान घाटी और पैन्गोंग झील एरिया में अचानक हलचल बढ़ा दी। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात भारतीय सेना की टुकड़ियों ने एलएसी के आसपास के इलाकों में घोड़ों और खच्चरों से सर्वेक्षण किया। इसके अलावा जमी हुई पैन्गोंग झील पर हाफ मैराथन जैसी गतिविधियां कीं।
सेना ने आधिकारिक तौर पर तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख में किसी स्थान पर क्रिकेट खेलते दिख रहे हैं। लेह स्थित सेना की 14 कॉर्प्स ने ट्वीट किया, पटियाला ब्रिगेड, त्रिशूल डिवीजन ने शून्य से नीचे तापमान में अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में पूरे उत्साह और जोश के साथ क्रिकेट मैच का आयोजन किया, हम असंभव को संभव बनाते हैं। हालांकि, सेना ने इस स्थान का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह जगह पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। गलवान घाटी की यह वही जगह है, जहां 15/16 जून, 2020 को चीनी सेना ने भारत के जवानों पर विश्वासघात कर हमला किया था। इस हमले में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे और चीन ने काफी समय बाद माना कि इस संघर्ष में उसके भी 5 जवान मारे गए थे।
पूर्वी लद्दाख सीमा पर जिस जगह भारतीय सेना के जवानों ने क्रिकेट खेली, वह स्थान भारत और चीन की ओर से आमने-सामने के टकराव से बचने के लिए बनाए गए बफर जोन से अच्छी खासी दूरी पर है। दोनों देशों की सेनाओं ने टकराव से बचने के लिए अपनी-अपनी तैनाती से 1.5 किलोमीटर पीछे हटने का फैसला किया है, इसलिए यह स्थान बफर जोन में तब्दील हो गया है। भारतीय सेना ने इस क्षेत्र में पहला कैंप 700 मीटर पीछे हट कर बनाया है। इसके बाद भारत की सेना का कैंप नंबर-2 और कैंप नंबर-3 है। ये कैंप लगभग समान दूरी पर मौजूद हैं, ताकि चीनी गतिविधियों पर निगाह रखी जा सके।(एएमएपी)



