संकट के समय नकारात्मक बयानबाजी 2027 में भारी न पड़ जाए
प्रदीप सिंह।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। ईरान ने उस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है,जहां से दुनिया के 20% तेल, गैस और दूसरी चीजें का ट्रांसपोर्ट होता है। इस युद्ध के कारण भारत में भी पैनिक बाइंग और अफवाहें समस्या पैदा कर रही हैं। एलपीजी के लिए बहुत सी जगहों पर लोग परेशान हैं, हालांकि एलपीजी की कोई कमी नहीं है। कई जगहों पर पेट्रोल के लिए भी लाइनें देखी जा रही हैं जबकि देश में 60-70 दिन का स्टॉक पहले से सरकार के पास है। उसके बाद के 60 दिन का आर्डर दिया जा चुका है, जो कुछ ही दिन में भारत आ जाएगा। संकट के समय अगर सब लोग मिलजुलकर काम करें तो समस्या बहुत छोटी हो जाती है, लेकिन जब लोगों को आपदा में राजनीतिक अवसर नजर आने लगता है तो वे अराजकता और अफवाहें फैलाते हैं।
तो इसी सबके बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का एक बयान आया है। उनके बयानों पर मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि कौन उनको इस तरह से बोलने के लिए कहता है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने तो पहले ही कहा था लकड़ी, कंडा और कोयला खरीद लीजिए। संकट बढ़ने वाला है। यह एक महीने,दो महीने,तीन महीने पता नहीं कितने दिन चलेगा। मैंने तो अपने घर के लिए मिट्टी के दो चूल्हे और कोयला मंगवा लिया है। अब आप कल्पना कर सकते हैं कि जो व्यक्ति उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का मुख्यमंत्री रह चुका हो,वह इस तरह की बात करेगा। अखिलेश यादव और उनके जैसे तमाम नेता राजा-महाराजाओं की तरह रहते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि उनके यहां पीएनजी का कनेक्शन होगा, जिसमें एक सेकंड के लिए भी कोई रुकावट नहीं आई। ऐसा व्यक्ति अगर कहे कि मैंने मिट्टी का चूल्हा और कोयला मंगवा लिया है तो आप समझ सकते हैं कि उसका उद्देश्य क्या है? वह दरअसल पैनिक पैदा करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि लोगों में अफरा-तफरी पैदा हो। वह चाहते हैं कि कालाबाजारियों को मौका मिले और वे जमाखोरी करें।
अखिलेश यादव 5 साल यूपी के मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री रहते हुए वह जो एक चुनाव लड़े,उसमें जनता ने उन्हें पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया। 2012 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो वह चुनाव मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में लड़ा गया था। उसमें यूपी की 403 सीटों में से सपा को 224 सीटें मिली थीं। अखिलेश यादव के पांच साल मुख्यमंत्री रहने के बाद जब समाजवादी पार्टी उनके नेतृत्व में चुनाव में उतरी तो 47 सीटों पर आ गई। तो एक संदेश उत्तर प्रदेश के मतदाता का बड़ा साफ है कि वह अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहती है। वह अखिलेश यादव को विपक्ष के नेता के रूप में देखना चाहती है। लेकिन वह दो साल से ज्यादा तो प्रतिपक्ष के नेता भी नहीं रह पाए। लोकसभा का चुनाव लड़े और दिल्ली चले गए। प्रतिपक्ष के नेता की जो जिम्मेदारी यूपी के मतदाता ने उनको दी थी,वह उसको भी छोड़कर चले गए और अब उनकी इच्छा है कि लोग फिर से उनको मुख्यमंत्री बना दें। तो दुनिया में दो ही ऐसे नेता हैं, जो कॉमेडी के जरिए सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं। एक हैं यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादिमीर जेलेंस्की और दूसरे हैं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान। ये दोनों टीवी पर कॉमेडी शो करते थे। तो अखिलेश यादव के सलाहकारों ने उन्हें समझाया होगा कि कॉमेडी के जरिए आप भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। इसीलिए आप देखिए कि उनके हर बयान में आपको तंज, मसखरापन और अपने विरोधियों का मजाक उड़ाने वाला तत्व मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में बयान दिया था कि जिन लोगों को गैस की कमी हो रही है वे सरकार को संदेश भेजें, हम उनको गैस भिजवाएंगे। इस पर अखिलेश यादव की जो प्रतिक्रिया आई,आप कल्पना नहीं कर सकते। अखिलेश ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य को डिलीवरी डिप्टी सीएम बन जाना चाहिए। जिस पीडीए का ढिंढोरा अखिलेश दिन-रात पीटते हैं, केशव प्रसाद मौर्य उसी पीडीए से आते हैं। पीडीए समाज का व्यक्ति उप मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है और आप उसका मजाक उड़ा रहे हैं। और उसके बाद आप चाहते हैं कि पीडीए समाज के लोग आपका समर्थन करें। अखिलेश में अगर जरा भी राजनीतिक समझ होती तो कम से कम केशव प्रसाद मौर्य के बारे में इस तरह का बयान नहीं देते, लेकिन अखिलेश यादव बीते 9 साल से लगातार यही काम कर रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपमान करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ते। हाल ही में उन्होंने योगी और प्रधानमंत्री के बारे टिप्पणी की कि कहीं तेल की कमी का बहाना बनाकर किसी उद्घाटन समारोह से कन्नी न काट जाएं क्योंकि आने पर नमस्ते लेनी पड़ेगी। न आएंगे और न नमस्ते करनी पड़ेगी। इससे पता चलता है कि अखिलेश यादव की सोच किस तरह की है। ऐसे में मेरा तो उनसे एक ही सवाल है कि भाई आपने मिट्टी का चूल्हा तो मंगवा लिया है और आप कह रहे हैं तेल की भी कमी होने वाली है। देश के लोगों को यह भी बता दीजिए कि आप बैलगाड़ी कब मंगाने वाले हैं क्योंकि तेल की कमी होगी तो कार कैसे चलेगी और आपका चार्टर्ड प्लेन तो बिल्कुल ही नहीं उड़ पाएगा। बाकी लोगों को भी सलाह दे दीजिए कि भाई बैलगाड़ी में चलो, गाड़ी-वाड़ी छोड़ दो।
अखिलेश यादव जब राजनीति में आए थे तो पढ़े-लिखे समझदार व्यक्ति माने जाते थे। जब वह मुख्यमंत्री बने थे तो कई लोगों ने उनकी प्रशंसा की थी,दुर्भाग्य से मैं भी उन लोगों में था। लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जो किया और खासतौर से मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जो किया, उससे वह उनकी प्रशंसा करने वालों को बता रहे हैं कि आप गलत थे। आप मुझे समझ नहीं पाए। मैं वह नहीं हूं, जो आप बता रहे थे। मैं वह हूं, जो मैं आपको बता रहा हूं। कुल मिलाकर इन परिस्थितियों में अखिलेश जिस तरह का वक्तव्य दे रहे हैं,वह उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को 2027 के विधानसभा के चुनाव तक याद रहेगा। संकट के समय नकारात्मक बात करने वाले किसी व्यक्ति को जनता पसंद नहीं करती है। अरविंद केजरीवाल का उदाहरण सामने है। राजनीतिक गंभीरता दिखाने में अखिलेश यादव लगातार चूक रहे हैं। अपने बयानों से सबसे ज्यादा वह अपना ही नुकसान कर रहे हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



