नई जनगणना के बाद दक्षिणी राज्यों की सीटें घटेंगी।
प्रदीप सिंह।अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारकर खुश होने वालों को आपने देखा है? हमारे देश में कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने वोट, सीटों और नैरेटिव की दृष्टि से अपना भारी नुकसान कर लिया है फिर भी जीत की खुशी मना रहे हैं।
विपक्ष ने शुक्रवार को लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक को गिरा दिया। इसके साथ दो और विधेयक आए थे, जिसमें से एक का जिक्र करना जरूरी है और वह है सीटों की संख्या को निर्धारित करने का। दक्षिण के राज्यों को आशंका थी कि उनकी आबादी ज्यादा नहीं बढ़ी है इसलिए उनकी सीटें कम हो सकती हैं। इस पर सरकार ने आश्वासन दिया कि अक्रॉस द बोर्ड हर स्टेट और यूनियन टेरिटरी की सीटों की संख्या में 50% की वृद्धि होगी। किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। लेकिन जब उसी से जुड़ा हुआ संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हुआ तो वह विधेयक भी गिर गया। ये विधेयक गिरने के बाद विपक्ष कह रहा है कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सवाल है कि वह 30 साल से यह बात कह रहा है और जब महिला आरक्षण का समर्थन करने का मौका आता है तो वह इसके खिलाफ हो जाता है। अब वह कह रहा है कि इस समय जो 543 सदस्यों की लोकसभा है,उसी आधार पर महिला आरक्षण को लागू कर दीजिए और सरकार पर मंशा ठीक न होने का आरोप लगा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार 2026 के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करना चाहती है। 15 साल पुराने आंकड़े के आधार पर महिला आरक्षण लागू करना हमें मंजूर नहीं है। सुनने में यह बात तार्किक लगती है। लेकिन इसके साथ ही वह कह रहा है कि 543 सदस्यों की लोकसभा में आप महिला आरक्षण दीजिए तो 1971 का जो सेंसस है, उसके आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू कीजिए।
1971 के सेंसस के बाद सीटों की संख्या पर फ्रीज लग गया था। कहा गया था कि आबादी के अनुपात में सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी। 2001 में फिर वह मौका आया जब फ्रीज खत्म हो रहा था। तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार फ्रीज की अवधि 25 साल के लिए और बढ़ा दी। अब 2026 में जो जनगणना होगी, वहां से यह फ्रीज हटेगा। महिला आरक्षण बिल को गिराकर विपक्ष ने जो किया है, उसका नतीजा आप समझिए। अब यह नैरेटिव बना है कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने महिला आरक्षण लागू नहीं होने दिया। कांग्रेस पार्टी यह काम पहले भी कर चुकी है और लगातार करती रही है। कांग्रेस और उसके साथियों को डर है कि महिला आरक्षण लागू हो गया तो भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका राजनीतिक लाभ मिल जाएगा। एक-दो राज्यों को छोड़ दें तो वैसे भी बाकी सब जगह महिलाओं का ज्यादा वोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के कारण भाजपा को मिलता रहा है। यह बिल अगर पास हो जाता तो दक्षिण के राज्यों को फायदा ही था क्योंकि गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में लिखित गारंटी देने को तैयार थे कि आपकी सीटों का अनुपात वही बना रहेगा। आपकी 50% सीटें बढ़ेंगी। बिल गिर जाने से अब वह सारी व्यवस्था खत्म हो गई। अब क्या होगा? 2026 की जनगणना के आंकड़े 2027 में पब्लिश होंगे। तब तक आबादी के अनुपात में सीटों की संख्या तय करने का जो फ्रीज लगा है,वह खत्म हो जाएगा। अब सीटों की संख्या आबादी के अनुपात के अनुसार तय होगी। सबको मालूम है कि दक्षिण के राज्यों की आबादी उतनी नहीं बढ़ी है तो इसलिए सबसे ज्यादा नुकसान उनको ही होने वाला है। एक सज्जन हैं जयप्रकाश नारायण। उन्होंने एक कैलकुलेशन किया है कि इस बिल के गिरने के बाद किसका क्या नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद अब सात राज्यों में 35 लोकसभा सीटें घट जाएंगी। आंध्र प्रदेश में पांच, तेलंगाना में तीन, तमिलनाडु में 10, कर्नाटक में दो,केरल में सात, उड़ीसा में चार और पश्चिम बंगाल में चार लोकसभा सीटें घटेंगी। जो विधेयक गिरा है,उसमें सरकार देश के सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ाने का वादा कर रही थी। इसलिए मैं कह रहा हूं कि विपक्ष और दक्षिण के राज्यों ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है। दक्षिण की सीटें कम करने की व्यवस्था विपक्ष ने खुद कर दी है।
2026 की जनगणना के बाद चार राज्यों में 34 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। इसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 12 सीटें, बिहार में 10, मध्य प्रदेश में पांच और राजस्थान में सात सीटें बढ़ जाएंगी। इस तरह से एम के स्टालिन और उनके साथी जो यह नैरेटिव चला रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर भारत में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं और दक्षिण के राज्यों की सीटों की संख्या घटाना चाहते हैं, वह उन्होंने खुद कर दिया। जो विधेयक गिरा है उसमें तो सरकार एक तरह से उत्तर भारत के राज्यों के साथ नाइंसाफी कर रही थी। वह समान अनुपात में सीटें बढ़ा रही थी। दक्षिण की तुलना में उत्तर में भाजपा वैसे भी मजबूत है तो द्रमुक, कांग्रेस और उसके साथियों द्वारा संविधान संशोधन विधेयक को गिराने से बाय डिफॉल्ट भाजपा को चुनावी लाभ हो गया है। केंद्र में इस समय भाजपा की जो सरकार बनी है वह सिर्फ और सिर्फ नॉर्थ, वेस्ट और ईस्ट के दम पर बनी है। दक्षिण का कोई योगदान नहीं है। दक्षिण की 130 सीटों में से मात्र 30-31 ही भाजपा के पास हैं।
महिला आरक्षण लागू नहीं होने देना है, यह संदेश विपक्ष ने लोकसभा से पूरे देश को दिया है। इस बात को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता के बीच में ले जाएंगे। वह कहेंगे कि हमने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की कोशिश की। उस अधिकार को कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने छीन लिया है। संविधान संशोधन विधेयक गिराने का
कोई फायदा विपक्ष को नहीं होने वाला है, यह तय बात है। भाजपा इसका कितना फायदा राजनीतिक रूप से उठा पाती है, यह इस पर निर्भर करेगा कि वह अपनी बात लोगों तक कैसे पहुंचा पाती है। राहुल गांधी के पीछे चलकर स्टालिन ने तमिलनाडु का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। उसकी सीटें सबसे ज्यादा कम होने जा रही हैं। बीजेपी का नुकसान करने के लिए मतलब बीजेपी की एक आंख फोड़ने की कोशिश में दक्षिण के राज्यों ने और कांग्रेस पार्टी ने अपनी दोनों आंखें फोड़ ली है। इस विधेयक के गिरने से नुकसान का असर कोई दो चार दिन तक नहीं रहने वाला है। इसका लंबा असर होगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)
कोई फायदा विपक्ष को नहीं होने वाला है, यह तय बात है। भाजपा इसका कितना फायदा राजनीतिक रूप से उठा पाती है, यह इस पर निर्भर करेगा कि वह अपनी बात लोगों तक कैसे पहुंचा पाती है। राहुल गांधी के पीछे चलकर स्टालिन ने तमिलनाडु का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। उसकी सीटें सबसे ज्यादा कम होने जा रही हैं। बीजेपी का नुकसान करने के लिए मतलब बीजेपी की एक आंख फोड़ने की कोशिश में दक्षिण के राज्यों ने और कांग्रेस पार्टी ने अपनी दोनों आंखें फोड़ ली है। इस विधेयक के गिरने से नुकसान का असर कोई दो चार दिन तक नहीं रहने वाला है। इसका लंबा असर होगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



