विदेश जाकर भारत का अपमान करने की सजा मिलनी ही चाहिए।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
राम माधव का नाम आपने सुना जरूर होगा। इनका पूरा चरित्र बड़ा रहस्यमय है। वह भारत के साथ हैं या भारत के खिलाफ, भाजपा के साथ हैं या भाजपा के खिलाफ, भारत सरकार के साथ हैं या भारत सरकार के खिलाफ, यह तय करना बहुत मुश्किल है।
हाल ही में अमेरिका के हडसन इंस्टिट्यूट में उन्होंने जो बात कही, उसने पूरे देश और भारत सरकार को अपमानित करने का काम किया है। अगर यही काम विपक्ष का कोई नेता या राहुल गांधी करते तो अब तक भाजपा का हर छोटा-बड़ा नेता उनकी आलोचना में उतर गया होता। लेकिन राम माधव के बारे में ऐसा कुछ नहीं हो रहा। आखिर उन्हें यह छूट क्यों? उन्होंने हडसन इंस्टिट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा कि अमेरिका के कहने पर भारत से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया। रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। अमेरिका ने 50% टैरिफ लगाया तो उसे स्वीकार कर लिया। ट्रेड डील का फ्रेमवर्क बना तो उसमें भी अमेरिका ने 18% टैरिफ लगा दिया, उसे भी भारत ने स्वीकार कर लिया। राम माधव की कही ये चारों बातें सरासर झूठ हैं। अगर एक क्षण के लिए मान भी लें कि भारत ने ऐसा किया, तब भी क्या भाजपा के किसी नेता को विदेश जाकर इस तरह से बोलने का अधिकार है। लेकिन राम माधव ने यह किया है और ऐसा उन्होंने कोई पहली बार नहीं किया है। वह करते रहे हैं। इतना सब बोलने के बाद राम माधव ने एक ट्वीट किया कि मैंने हडसन इंस्टिट्यूट के कार्यक्रम में जो कुछ कहा, वह फैक्चुअली सही नहीं है। मतलब उनको देश और भारत सरकार को अपमानित करने का कोई अफसोस नहीं है।
मोदी सरकार लगातार कहती रही है कि भारत की अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी है। अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए हमें जहां से तेल और गैस खरीदना होगा,खरीदेंगे। हमको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या सोचता है। यह भी गलत है कि 50% टैरिफ को भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया था। उसका विरोध किया गया था। तब भी राम माधव भारत सरकार के खिलाफ क्यों बोल रहे हैं ? उनको किसने अधिकृत किया? वह किसका खेल खेल रहे हैं। उन्हें न तो सरकार में कोई पद मिला है और न पार्टी में। उनको भाजपा से निकालकर संघ वापस भेज दिया गया था। वह भाजपा में फिर लौट कर आए हैं। उनको कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जम्मू कश्मीर चुनाव के समय उनको जरूर वहां का जिम्मा दिया गया था, लेकिन उनसे कोई काम नहीं लिया गया। जब वह संघ से दोबारा भाजपा में आए तो संघ ने उनको साफ-साफ बता दिया था कि अब दोबारा वापसी नहीं होगी। तो आप मानकर चलिए कि राम माधव अब संघ में तो वापस नहीं जा पाएंगे। भाजपा में भी कितने दिन रह पाएंगे यह कहना मुश्किल है। हडसन इंस्टिट्यूट में राम माधव ने जो कुछ बोला वह ऐसा नहीं है कि नासमझी में बोला गया। ऐसा हो नहीं सकता कि राम माधव को पता नहीं है कि भारत सरकार का इन सब मुद्दों पर स्टैंड क्या है? संसद, संसद के बाहर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट है। यह संभव है क्या कि राम माधव को फैक्ट्स क्या है,यह पता न हो। और इसका भी अंदाजा न हो कि इससे भारत का अपमान होगा। मैं फिर कह रहा हूं कि यह पहला मामला नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने एक विदेशी मीडिया आउटलेट को इंटरव्यू दिया और कहा 2019 में एनडीए की सरकार बनेगी। अब आप इसका मतलब समझिए। मतलब वह कह रहे थे कि 2019 में भाजपा को अकेले दम बहुमत नहीं मिलने जा रहा है। 2014 में जो जनादेश मिला,उससे भाजपा नीचे जाएगी। पार्टी के विरोध में इससे ज्यादा आप क्या बोल सकते हैं? यही बोल सकते थे कि सरकार नहीं बनने जा रही है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले हैं। लेकिन शायद उनकी यह बोलने की हिम्मत नहीं हुई।

इसके अलावा अमेरिका ने जब भारत पर 50% टैरिफ लगाया तो उन्होंने एक एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखा। उसमें उन्होंने कहा कि यह समस्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फोन कॉल से हल हो सकती है। उनका मतलब था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करें और एक तरह से माफी मांगें। लेकिन भारत टस से मस नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति का फोन तक नहीं उठाया। राम माधव ऐसे नेताओं में हैं पाकिस्तान की दोस्ती की बड़ी बात करते हैं। जो चाहते हैं कि गोली और बोली दोनों साथ-साथ चले। उनको ऐसा लगता है कि उन्हें कुछ भी कहने का खुला लाइसेंस मिला हुआ है। उनकी जीवन शैली देखिए। साल में एक दर्जन से ज्यादा बार वह विदेश जाते हैं। किसके लिए काम करने जाते हैं? भारत सरकार और पार्टी ने तो उनको कोई ऐसा जिम्मा दे नहीं रखा है। दरअसल वह किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। हो सकता है कि किसी के दबाव में भी हों। उनके कारनामों की सूची बहुत बड़ी है। यह भाजपा और संघ के लोग अच्छी तरह से जानते हैं।


अमेरिका जाकर राम माधव ने जो भी बातें कहीं हैं, वह भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपमानित करने के लिए कही हैं। वह भारत को अमेरिका का पिट्ठू बता रहे हैं। जो राहुल गांधी बोलते हैं,वही बातें राम माधव बोल रहे हैं। लेकिन राम माधव का नाम आएगा तो भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम आएगा। अगर इन दोनों संगठनों को अपनी प्रतिष्ठा, देश के गौरव और देश के स्वाभिमान की चिंता है तो राम माधव जैसे लोगों के साथ क्या होना चाहिए यह उनको तय करना चाहिए। राम माधव सरकार या पार्टी के कोई प्रवक्ता नहीं हैं। अमेरिका में जाकर ऐसी बात बोलने की उनकी हिम्मत कैसे हुई? यह हिम्मत उनको किस ताकत से मिल रही है? उन्होंने जो काम किया है, इसके मेरी नजर में सिर्फ तीन कारण हो सकते हैं। पहला आप कह सकते हैं कि उनको जानकारी नहीं थी। दूसरा आप कह सकते हैं कि उन्होंने किसी बुरे इरादे से ऐसा नहीं किया। लेकिन यह दोनों बातें पूरी तरह से गलत है। तीसरा कारण है और वही इस मामले में सही हो सकता है कि वह अपने को परम ज्ञानी मानते हैं। वह सोचते हैं कि प्रधानमंत्री क्या जानते हैं? विदेश मंत्री क्या जानते हैं? विदेश नीति मैं जानता हूं। मुझे पता है कि किस तरह का स्टैंड सरकार को लेना चाहिए। उनकी बातों से ऐसा लगता है कि वह डोनाल्ड ट्रंप के सामने मर्सी पिटीशन लेकर गए थे कि भारत को बख्श दीजिए। भारत आपके कहने के मुताबिक चलेगा। वह अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से कॉम्प्रोमाइज करने के लिए तैयार है। राम माधव के इस आचरण से विपक्ष को एक बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया है। अगर कांग्रेस पार्टी इसका लाभ उठाए तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा। उनके एक लाइन के स्पष्टीकरण कि मैं फैक्चुअली इनकरेक्ट था, से बात नहीं बनने वाली। आप भारत को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा चुके हैं। मुझे लगता नहीं कि इसको भारत सरकार चुपचाप बर्दाश्त करने वाली है। यह नेशनल पॉलिसी की बात है।

राम माधव वही बोल रहे हैं जो राहुल गांधी बोलते हैं। राम माधव वह बिल्कुल नहीं बोल रहे हैं जो भारत सरकार बोलती है। उन्होंने भारत सरकार, प्रधानमंत्री, भारत की विदेश नीति, ट्रेड पॉलिसी और इकोनमिक पॉलिसी पर सीधा हमला बोला है। वह हर महीने या हर दूसरे महीने दुनिया में किसी न किसी राष्ट्रध्यक्ष या शासनाध्यक्ष से मिल रहे हैं। आखिर किस हैसियत से? और भाजपा एवं संघ इसको बर्दाश्त कर रहा है। सवाल यह है कि क्यों? अगर राम माधव के खिलाफ इस समय कोई कार्रवाई न हुई तो आप समझिए कि कुएं में भांग पड़ी हुई है। राम माधव को अगर रोका नहीं गया तो भारत सरकार और भाजपा को नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। देश की प्रतिष्ठा गिराने वाले को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए। वरना आज राम माधव बोले हैं कल कोई और बोलेगा और कोई रोक नहीं पाएगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं आपका अखबार के संपादक हैं)