अगले पांच सालों में दक्षिण की राजनीति में भी दिखेगा बड़ा बदलाव ।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
देश में जो हिंदुत्व की लहर चल रही है, मेरा मानना है कि आने वाले समय में वह आंधी बनने वाली है। एक सज्जन हैं औघड़ भूदेव। उन्होंने ने एक वीडियो पोस्ट किया है,जिसमें एक बंगाली युवती भजन गा रही है। उसे आप सुनेंगे तो मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। उसके बोल बांग्ला में हैं। उसका हिंदी अनुवाद कुछ प्रकार है- बंगाल में राम का ध्वज लहरा रहा है। बहुत साल तक चुप थी मां, आज खुलकर गा रही हूं। हुबली के पानी का रंग गेरुआ हो गया है। गंगा से सरयू तक एक ही रक्त का प्रवाह हो रहा है। सिंदूर की महक और शंख की ध्वनि गूंज रही है। भय की रात खत्म हुई, सवेरा हो गया है। इस गीत से आप समझ लीजिए कि पश्चिम बंगाल में पिछले 80 साल से क्या चल रहा था। दरअसल 4 मई, 2026 को पश्चिम बंगाल का भारत में विलय हुआ है। वास्तव में उसे इसी दिन आजादी मिली है।
आजादी के बाद देश में हिंदुत्व की हवा अयोध्या आंदोलन से चली। 1 फरवरी 1986 को अयोध्या में राम मंदिर का ताला खुला और उसके बाद अयोध्या आंदोलन शुरू हुआ। उसकी परिणति भव्य राम मंदिर के रूप में हुई,लेकिन उसका राजनीतिक प्रभाव उत्तर भारत के कुछ राज्यों, पश्चिम भारत और दक्षिण में केवल कर्नाटक तक सीमित रहा। हिंदुत्व की यह हवा पहुंची तो पूरे देश में लेकिन उसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से हुआ। जो लोग यह मानते थे कि हिंदू को बांटकर हम हमेशा जीतते रहेंगे और हिंदू कभी एक नहीं होगा,उन्हें पश्चिम बंगाल और असम ने बताया कि ऐसा नहीं हो सकता। देश में इस समय जो सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन हो रहा है उसे समझिए। सांस्कृतिक परिवर्तन की जो लहर पश्चिम बंगाल से उठ रही है वह पूरे देश को लपेटेगी और देश के लिए इससे शुभ बात और कोई हो ही नहीं सकती। पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की धारा अब सहस्त्रधारा बनकर बह रही है। वहां जिस तरह से लोगों को दबाया और कुचला गया,उसके बाद यह कोई सामान्य चुनाव नतीजा नहीं है। आप थोड़ा सा अंकगणित भी देखिए। हिंदू एक होता है तो क्या होता है? पश्चिम बंगाल में 65% से ज्यादा हिंदू एक हुआ और भाजपा को 207 सीटें मिल गईं। असम में 40% मुस्लिम आबादी के बावजूद बीजेपी का स्ट्राइक रेट 80% रहा। अब जरा आगे का रास्ता देखिए। तमिलनाडु में लगभग 88% हिंदू हैं। इनमें से 40-45% भी एक हो जाएं तो वहां भाजपा की सरकार बन सकती है। केरल में लगभग 53% हिंदू आबादी है। इनमें से केवल 70% हिंदू भाजपा के साथ आ जाएं तो वहां भी भाजपा की सरकार बन सकती है। हालांकि बात भाजपा की सरकार बनने या न बनने की नहीं है। जो गैर भाजपा सरकारें हैं, उनका कोई विरोध नहीं है। लेकिन वे हिंदुत्व और सनातन के खिलाफ जिस तरह से काम करती हैं, विरोध उसका है। अब हो यह रहा है कि हिंदुत्व की ताकत जैसे-जैसे बढ़ रही है,हिंदुत्व विरोधी ताकतें और ज्यादा निर्मम होती जा रही हैं। तमिलनाडु में डीएमके नेताओं के बोल तो सबने सुने ही हैं,अब विजय की पार्टी के नेता भी कुछ-कुछ उसी तरह बोलने लगे हैं। केरल में तो मैं मानता हूं कि मुस्लिम लीग की सरकार बनी है। मेरा मानना है कि तमिलनाडु और केरल में जो सत्ता परिवर्तन हुआ है, वह भविष्य में इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनने का रास्ता खोलेगा।
एक समय था जब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कारसेवकों के खून से सरयू का पानी लाल कर दिया था और एक आज का समय है कि गंगा से लेकर हुबली से लेकर सरयू तक इन नदियों का जल भगवा हो गया है। एक समय लगता था कि पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व मर चुका है,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह सुसुप्ता अवस्था में था। उसको एक रास्ता चाहिए था। वह रास्ता मिला पश्चिम बंगाल के इस विधानसभा चुनाव में जब भय को खत्म किया गया। जो लोग कह रहे थे कि पश्चिम बंगाल में राम का क्या काम, उनको अब समझ में आ रहा होगा कि राम लोगों के दिलों में कहां तक हैं। राम को आप भारत के हिंदुओं के दिलों से नहीं निकाल सकते और राम से जब-जब लड़ेंगे,यह तय है कि हारेंगे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को लग रहा था कि जय श्री राम का नारा लगाने वालों को कुचल कर वह हिंदुत्व और सनातन को खत्म कर देंगी। नतीजा यह हुआ कि हिंदुत्व को मानने वालों ने तृणमूल कांग्रेस को ही खत्म कर दिया। ममता बनर्जी की कितनी बड़ी हार हुई है उसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि उनके घर कालीघाट और आसपास के जितने बूथ हैं,उनमें वह 50 वोट से ज्यादा हासिल नहीं कर पाईं। अपने पैतृक निवास काली घाट में ही वह बुरी तरह हारी हैं। कल तक जो लोग उनकी पालकी ढोने को तैयार थे,आज वे उनके आसपास भी दिखने को तैयार नहीं हैं। भाजपा वहां पूरे आत्मविश्वास के साथ आई है। लोगों को यह भरोसा दिलाकर आई है कि हम हर हाल में आपकी रक्षा करेंगे। आपके साथ खड़े रहेंगे। ममता बनर्जी के लिए उनका अहंकार सबसे बड़ा दुश्मन बना। हालांकि उन्होंने अपने दुश्मन भी बहुत खड़े कर लिए थे। जिस तरह का वह शासन चला रही थीं, उनको डूबना ही था। वह तब तक चला जब तक कोई चैलेंजर नहीं आया। जैसे ही आया उनका किला ताश के पत्तों की तरह गिर गया।
तो अयोध्या से हिंदुत्व की जो हवा चली थी, वह पूरे देश में तो पहुंची लेकिन उतना प्रभाव नहीं दिखा पाई। लेकिन पश्चिम बंगाल से जो हिंदुत्व की लहर शुरू हुई है,वह आने वाले समय में आंधी बनने वाली है। आने वाले समय में आपको केवल सरयू, हुगली और गंगा में ही भगवा रंग नहीं दिखेगा,यह देश की हर नदी में दिखेगा क्योंकि यह सनातन संस्कृति का देश है। भगवान राम यहां किसी मंदिर,किसी भवन या किसी मूर्ति में नहीं बसते। वह लोगों के दिल में बसते हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव का नतीजा पूरे देश की राजनीति को बदलेगा। इसका असर उत्तर, पूरब, पूर्वोत्तर और दक्षिण में भी होगा। दक्षिण में यह परिवर्तन होने में मुझे नहीं लगता कि अब 5 साल से ज्यादा समय लगने वाला है। पश्चिम बंगाल के लोगों की रगों से आप सनातन धर्म को कभी नहीं निकाल सकते, यह इस चुनाव नतीजे का संदेश है और हर प्रदेश, हर दल एवं हर नेता को इसे ध्यान से सुनना चाहिए। जहां यह संदेश नहीं पहुंचा है, आने वाले समय में वहां भी पहुंचेगा। जिनको इस प्रकोप से बचना है, वे जल्दी संभल जाए तो अच्छा है। लेकिन आदमी जब अहंकार के आसमान पर होता है तो उसको कुछ दिखाई नहीं देता। इसीलिए क्षेत्रीय दल डूब रहे हैं। कांग्रेस पार्टी तो मेरा मानना है ऐसा डूबेगी कि कभी फिर उबर नहीं पाएगी। कांग्रेस जिस रास्ते पर चली गई है,वहां से लौटने का कोई रास्ता ही नहीं है। वहां से केवल ढलान है।
पश्चिम बंगाल चुनाव का नतीजा भारत की राजनीति को उसी तरह से बदलने वाला है, जैसा 1947 के बाद बदलना चाहिए था। आखिर इस देश का विभाजन क्यों हुआ? मुसलमानों ने कहा कि हिंदू और मुसलमान दो कौमें नहीं हैं, दो देश हैं। हम साथ नहीं रह सकते। 1887-88 में ही सर सैयद अहमद और उनके साथियों ने कह दिया था कि जब अंग्रेज चले जाएंगे तो हम हिंदुओं की अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे। उसके बाद युद्ध होगा। उससे फैसला होगा कि कौन राज करेगा। तो इन लोगों में सनातन विरोध की जड़ें इतनी गहरी हैं, लेकिन इन लोगों को यह मालूम नहीं कि सनातन के समर्थन की जड़ें उससे कई हजार गुना गहरी हैं। पश्चिम बंगाल ने जितने हिंदुत्व विरोधी हैं उन सबको समझाने की कोशिश की है कि अब भी समय है चेत जाओ। अपनी जो भी राजनीति करनी है करते रहो, लेकिन राम और सनातन से लड़ने की कोशिश मत करो। सनातन संस्कृति दसियों हजार साल से थी, है और हमेशा रहेगी। बस सनातन के मानने वाले अपनी आंखें, कान और दिमाग खुला रखें। सही गलत की पहचान बनाए रखें। कौन मित्र है,कौन शत्रु है इसका बोध हो। अगर आपको पता ही नहीं है कि कौन आपको खत्म करना चाहता है तो आप खत्म होने के लिए अभिशप्त हैं। पश्चिम बंगाल ने बताया है कि नष्ट करने वालों को नष्ट किया जा सकता है। उसके लिए किसी हिंसा की जरूरत नहीं होती। हिंसा करने वाले नष्ट हो गए और हिंसा को बर्दाश्त करने वाले चुप रहकर अपने समय का इंतजार करने वाले जीत गए। यह दुनिया भर के उन देशों और भारत में उन शक्तियों के लिए बहुत बड़ा संदेश है,जो इस देश से सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)