भारत के दुश्मनों से दोस्ती तारिक रहमान को पड़ सकती है बहुत भारी

#pradepsinghप्रदीप सिंह
कहते हैं कि गीदड़ की जब मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है। इस समय बांग्लादेश की स्थिति कुछ ऐसी ही है। लेखक और पत्रकार उत्पल कुमार ने एक लेख में इसको बहुत विस्तार से समझाया है।
उन्होंने लिखा है कि बांग्लादेश भारत के धैर्य को उसकी कमजोरी समझने की गलती कर रहा है। बांग्लादेश तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है। दुनिया से उसके संपर्क का रास्ता बंगाल की खाड़ी है। जहां भारतीय नौसेना की बहुत मजबूत उपस्थिति है। उसका कोई मुकाबला बांग्लादेश नहीं कर सकता। इसलिए अगर बांग्लादेश भारत के हितों के खिलाफ जाता है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। हाल ही में आपने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक संधि की खबर पढ़ी होगी, जिसे मक्का पैक्ट कहा जा रहा है। इस संधि में कहा है कि एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। अब इस संधि का व्यावहारिक रूप से कितना असर होगा यह तो भविष्य की बात है, लेकिन वह मुद्दा अभी अलग है। पाकिस्तान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होने के बारे में विचार कर रहा है। अब इसी से मैं कहता हूं कि गीदड़ की मौत आती है तो शहर की ओर भागता है। बांग्लादेश पूरी दुनिया को यह तर्क देकर बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है कि वह इस पैकट में इसलिए शामिल होना चाहता है ताकि उसका व्यापार और इकॉनमी बढ़े। सबको मालूम है कि पाकिस्तान जैसे भिखमंगे देश के साथ उसका क्या व्यापार होगा और कौन सी इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा। तुर्की भी एक सीमा के बाद उसकी कोई मदद करने की स्थिति में नहीं है। भारत पर बांग्लादेश की निर्भरता इतनी ज्यादा है कि वह जरा भी चूड़ी कस दे तो बांग्लादेश में त्राहि-त्राहि मच जाएगी।
शेख हसीना के समय भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत अच्छे थे। उस समय बांग्लादेश की इकॉनमी 7% की रफ्तार से बढ़ रही थी। उसके एक्सपोर्ट का 80% हिस्सा उसकी गारमेंट इंडस्ट्री से आता है। उसके लिए 78% धागा भारत देता था। जब से शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया है तब से बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री का बुरा हाल है। हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। भारत बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़े ड्यूटी फ्री आने देता था। वह बांग्लादेश को सप्लाई चेन प्रदान करता था। बांग्लादेश में जब से अमेरिका का भेजा हुआ मोहम्मद यूनुस नाम का जोकर आया तो उसने दोनों देशों के संबंध खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसको गलतफहमी थी कि वह भारत से लड़ सकता है। फिर चुनाव हुआ। बांग्लादेश की नंबर एक पार्टी शेख हसीना की आवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो नंबर दो की पार्टी बीएनपी जीत गई और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन गए। तारिक रहमान से उम्मीद की जा रही थी कि वह मोहम्मद यूनुस के रास्ते पर नहीं चलेंगे और भारत से संबंध बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन लगता है कि उनको भी कुछ गलतफहमी हो गई है। उनको लगता है कि वह भारत पर दबाव डाल सकते हैं और उसके जरिए बहुत सारी रियायतें ले सकते हैं। अभी तक परंपरा थी कि बांग्लादेश में जो भी प्रधानमंत्री बनता था वह पहली विदेश यात्रा भारत की करता था। उन्होंने इस परंपरा को तोड़ा और सबसे पहले मलेशिया और चीन गए। भारत अभी तक नहीं आए हैं। आपको याद होगा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे का समझौता हुआ था। वह समझौता दिसंबर 2026 में यानी इसी साल रीनेगोशिएट होना है। अब यह भारत के हाथ में ऐसी चाबी है जिससे बांग्लादेश का हाथ मरोड़ा जा सकता है।
तारिक रहमान के पास भारत पर दबाव डालने के लिए कुछ नहीं है। भारत बिजली देना बंद कर दे तो बांग्लादेश अंधेरे में डूब जाएगा और गंगाजल बंटवारे में अगर भारत थोड़ी सी कड़ाई बरत दे तो बांग्लादेश में पानी का संकट हो जाएगा। तो किसी भी संकट के समय बांग्लादेश की मदद केवल और केवल भारत कर सकता है। सवाल है कि अगर पाकिस्तान फिर से कोई आतंकवादी घटना भारत में करवाता है और भारत ऑपरेशन सिंदूर पार्ट टू शुरू करता है तो बांग्लादेश क्या करेगा? क्या वह पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर हमला करेगा। पाकिस्तान से बांग्लादेश को मिलेगा क्या? पाकिस्तान से संबंध बढ़ाकर वह सिर्फ भारत के लिए झुंझलाहट पैदा कर सकता है। चीन से बांग्लादेश अगर फाइटर जेट खरीद रहा है तो कहां इस्तेमाल करेगा? पाकिस्तान तो उसका दोस्त है। फिर सवाल है किस पर? भारत के खिलाफ हमला करने की क्या बांग्लादेश की हैसियत है। जिस दिन सोचेगा उस दिन बांग्लादेश का नक्शा कैसा होगा शायद इसका तारिक रहमान को अंदाजा नहीं है। बांग्लादेश को लग रहा है कि पाकिस्तान और चीन के साथ मिलकर वह भारत को परेशान कर सकता है। लेकिन सवाल है कि भारत अगर परेशान करने पर आएगा तो बांग्लादेश का क्या हाल होगा? तब उसे न पाकिस्तान बचा पाएगा और न ही चीन। भारत अगर डीजल भेजना बंद कर दे, यान की सप्लाई पूरी तरह से रोक दे, सप्लाई चेन बंद कर दे तो बांग्लादेश का क्या हाल होगा।
बांग्लादेश में जब से नई सरकार बनी है तब से भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के संबंध सुधरें, लेकिन तारिक रहमान के रवैये में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। जिस रास्ते पर मोहम्मद यूनुस चल रहे थे,उसी पर वह भी चल रहे हैं। वह चाहते क्या हैं यह तो पता नहीं, लेकिन जिस रास्ते पर चल रहे हैं वह बांग्लादेश की बर्बादी का रास्ता है। भारत से संबंध बिगाड़कर बांग्लादेश सर्वाइव नहीं कर सकता। बांग्लादेश का निर्माण भारत ने कराया। वहां की इकॉनमी को खड़ा करने में सबसे बड़ा योगदान भारत का है। शेख हसीना की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि जब तक वह प्रधानमंत्री रहीं भारत के स्ट्रेटेजिक हितों से कभी समझौता नहीं किया। आज भी वह भारत में रह रही हैं। अब वह बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। बांग्लादेश में बहुत से लोगों का मानना है कि देश की आज जो हालत है उसमें एकमात्र उम्मीद शेख हसीना हैं। आप कल्पना कीजिए उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं लगता तो क्या तारिक रहमान की पार्टी जीत पाती। तारिक रहमान पर जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों का बहुत दबाव है। ऐसे में अगर वह भारत के हितों की उपेक्षा करते हैं और यह सोचते हैं कि भारत इसको नजरअंदाज कर देगा तो उनकी इससे बड़ी गलती कोई नहीं होगी।
अब समय आ गया है कि भारत अपनी ताकत का इस्तेमाल करे। भारत कोई एक चूड़ी कस दे तो बांग्लादेश की हालत खराब हो जाएगी। सबसे पहला मामला तो गंगा नदी के जल बंटवारे का आ ही रहा है। उसमें भारत अपने हितों का अगर पूरी तरह से ख्याल रखता है तो उसी से बांग्लादेश की परेशानी बढ़ जाएगी और पूरी उम्मीद है कि भारत ऐसा ही करेगा क्योंकि छूट देना अगर कमजोरी का लक्षण माना जाने लगे तो फिर छूट नहीं देनी चाहिए। मक्का संधि में शामिल होने की बांग्लादेश ने जो इच्छा जाहिर की है, यह भारत के हिसाब से रेड लाइन है। उसे चेतावनी है कि अगर ऐसा किया तो फिर भारत को मजबूरी में ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो वह सामान्य स्थिति में नहीं चाहेगा। मक्का पैक्ट में भारत के दो दुश्मन देश पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं और भारत के दुश्मनों से दोस्ती बांग्लादेश को बहुत भारी पड़ सकती है। आने वाले दिनों में यह होता हुआ दिखाई दे रहा है कि भारत अब बांग्लादेश को और ज्यादा रियायतें देने के मूड में नहीं है। अगर तारिक रहमान मोहम्मद यूनुस के रास्ते पर चलते रहे तो उनके और बांग्लादेश दोनों के लिए आने वाला समय बहुत संकट का होने वाला है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)