पश्चिम बंगाल को देश का नया ग्रोथ इंजन बनाने की तैयारी ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 में अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में होंगे। सवाल है कि किस मुद्दे और किस क्षेत्र से मिली बढ़त उनको फिर से प्रधानमंत्री पद पर बिठाएगी।
नरेंद्र मोदी को 2014 में गुजरात मॉडल ने प्रधानमंत्री बनाया। हालांकि उस समय भ्रष्टाचार भी एक मुद्दा था,लेकिन उसमें कोई नयापन नहीं था। नेहरू से लेकर राजीव गांधी, मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी तक कोई नई बात नहीं थी। लोग मान चुके हैं कि कांग्रेस होगी तो भ्रष्टाचार होगा ही। उस समय पूरे देश में गुजरात मॉडल की चर्चा थी। गुजरात मॉडल पर ही कांग्रेस और विपक्षी दल सबसे ज्यादा हमला कर रहे थे। सारे विमर्श का केंद्र गुजरात मॉडल बन गया था। अब चौथे कार्यकाल के लिए उनको एक ऐसे ही स्टेट के ग्रोथ इंजन की जरूरत है। पश्चिम भारत विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र के विकास के बारे में आप जानते ही है। उत्तर भारत विशेषकर यूपी में पिछले साढ़े नौ साल में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जितना विकास का काम किया है,वह अभूतपूर्व है। अब उसमें बहुत बड़ा जंप होने की उम्मीद कम है। वैसे उत्तर प्रदेश हमेशा से लोकसभा चुनाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है और रहेगा भी। तो भाजपा को अब गुजरात जैसे एक नए ग्रोथ इंजन की तलाश है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का एक नया लक्ष्य घोषित किया है। प्रधानमंत्री की इकोनमिक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य संजीव सानियाल ने कहा है कि विकसित भारत का सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक विकसित पूर्वी भारत नहीं होगा। पूर्वी भारत में मुख्य तौर से बिहार,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल आते हैं। बिहार में परिवर्तन हो रहा है। नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों में काफी कुछ किया है। अब भाजपा का पहली बार मुख्यमंत्री बना है। वहां निवेश लाने की कोशिशें हो रही हैं। उड़ीसा में भी पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है। इससे पहले नवीन पटनायक ने उड़ीसा के विकास के लिए काफी कुछ किया है। लेकिन इन दो राज्यों के विकास से पूर्वी भारत के विकास की वह तस्वीर नहीं बनती जो पश्चिम बंगाल बना सकता है।
भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के सौभाग्य से पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। शुभेंदु अधिकारी वहां के मुख्यमंत्री हैं। शुभेंदु सरकार के सामने सबसे बड़ा खतरा यह है कि भाजपा भी तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और कांग्रेस जैसी न बन जाए। उनके सामने तीन चुनौतियां हैं। कट मनी, दबंगई और लैंड गैब के कारण ही तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और कांग्रेस डूबीं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस से ही आए हैं। इसलिए उनको इस खतरे का आभास है। इसी कारण उन्होंने दो टोल फ्री हेल्पलाइन बनाई हैं, जिन पर आप कटमनी, दबंगई और लैंड ग्रैब की शिकायतें कर सकते हैं। वैसे भी पश्चिम बंगाल में भाजपा का तृणमूलीकरण किसी हालत में नहीं हो पाएगा। उसके बहुत से कारण हैं। ममता बनर्जी या सीपीएम पर अंकुश के लिए कोई केंद्रीय शक्ति नहीं थी जो शुभेंदु अधिकारी की सरकार पर है। दूसरा सरकार के पीछे आरएसएस की शक्ति है, जो कुछ भी गलत करने से रोकती है। पश्चिम बंगाल का विकास केंद्र सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। इसीलिए वहां नए-नए प्रोजेक्टों की घोषणा हो रही है। रेलवे, इंडस्ट्री या आप कोई क्षेत्र देख लीजिए। आपको अगले छह महीने में पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर निवेश होता हुआ दिखाई देगा। उससे पूरे प्रदेश की तस्वीर बदलेगी। पश्चिम बंगाल में वह ताकत है कि वह पूरे पूर्वी भारत का ग्रोथ इंजन बन सकता है। वहां हर तरह के प्राकृतिक संसाधन, नदियां, पानी भरपूर है, लेकिन समस्याओं की भी कमी नहीं है। घुसपैठ सबसे बड़ी समस्या है और उससे निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकार दोनों पूरी तरह दृढ़ संकल्प हैं। जिस तरह से भाजपा के सत्ता में आते ही बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को फेंसिंग के लिए जमीन दी गई है, वह बताता है कि सरकार का इरादा क्या है? उसके अलावा कानूनों में परिवर्तन हो रहे हैं। एफसीआरए बिल का संसद के शीत सत्र में पास होना तय है। घुसपैठियों की पहचान के लिए पहला कदम एसआईआर के जरिए उठाया गया। अब दूसरे कदम की बारी है। वह जनगणना के जरिए होगा। सरकार का अगला कदम एनपीआर या एनआरसी का है। इसके लिए सरकार पर्याप्त मात्रा में आंकड़े जुटा रही है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भले ही तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए हों लेकिन वह कई भाजपा नेताओं से ज्यादा हिंदुत्ववादी हैं। उनका हिंदुत्व दिखावे वाला नहीं, निष्ठा वाला हिंदुत्व है। वह ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो भाजपा की विचारधारा भी समझता है और उसकी चुनौतियां भी। वह जानते हैं कि तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम सत्ता से बाहर क्यों गईं। उनको मालूम है कि क्या नहीं करना है। दूसरी बात, उनको भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का पूरा समर्थन है। तो मेरा मानना है कि अगले लोकसभा चुनाव तक आपको दिखाई देगा कि पश्चिम बंगाल देश का ऐसा राज्य है जो ग्रोथ का नया इंजन बना है। जैसे एक समय दक्षिण के राज्य बने थे फिर पश्चिम में गुजरात और महाराष्ट्र बने और अब उत्तर भारत में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को बना दिया है। कमी केवल पूर्वी भारत में रह गई थी। उड़ीसा में नवीन पटनायक ने निवेश लाने के लिए काफी कुछ किया लेकिन वह नेशनल इंपैक्ट पैदा नहीं कर पाए। पश्चिम बंगाल में क्षमता है कि उसके ग्रोथ इंजन बनने का असर राष्ट्रीय स्तर पर पड़े। जैसे गुजरात का पड़ा। नरेंद्र मोदी ने गुजरात मॉडल का ऐसा नैरेटिव पेश किया जिसको उनके समर्थकों ने तो स्वीकार किया ही विरोधी भी तथ्यात्मक आधार पर विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सबसे बड़ा उदाहरण तो नर्मदा बांध का है। इसका विरोध करके मेधा पाटकर और कांग्रेस पार्टी ने क्या हासिल किया? बांध बनने के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान में क्या परिवर्तन आया,वह सबको दिखाई देता है। इसी तरह से पश्चिम बंगाल में जब परिवर्तन दिखाई देगा तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल 2029 में नरेंद्र मोदी की चौथी पारी का इंजन बन सकता है। वहां अब वे सारी केंद्रीय योजनाएं लागू हो रही हैं, जिनको ममता बनर्जी ने 12 साल तक रोके रखा। ममता ने तो राज्य से इंडस्ट्री को भगाया। पश्चिम बंगाल में आजकल जिस तरह से तृणमूल नेताओं पर अंडों की बरसात हो रही है उससे कुछ लोग कहने लगे हैं कि भाजपा भी वही सब कर रही है जो टीएमसी और सीपीएम के लोग करते थे। लेकिन दोनों स्थितियों में बहुत भारी अंतर है। सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस जो कर रही थीं वह सरकारी संरक्षण में हो रहा था। इस समय जो हो रहा है यह जनता का पिछले करीब 50 सालों से जमा आक्रोश है। वे केवल अंडे फेंककर आक्रोश निकाल रहे हैं। इससे कोई घायल नहीं होने वाला है। अगर उन्हें हिंसा करनी होती तो पत्थर फेंकते। कहीं एक भी पथराव की घटना नहीं हुई है। सरकार सिर्फ लोगों का गुस्सा निकलने दे रही है। जब उद्योग धंधे लगेंगे, निवेश आएगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो यह आक्रोश भी शांत हो जाएगा। अब जिस तरह से हाईवेज के निर्माण, पोर्ट के विकास और नया डीप सी पोर्ट बनाने की घोषणा हो रही है, यह सब पश्चिम बंगाल को भारत का नया ग्रोथ इंजन बनाने वाला है। पश्चिम बंगाल का ग्रोथ मॉडल 2029 तक किस तरह की शक्ल अख्तियार करता है इसी पर निर्भर करेगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का नैरेटिव क्या होगा। ग्रोथ का असर व्यापक रूप से दिखना चाहिए। इसीलिए उत्तर प्रदेश की बात होने पर मैं बार-बार कहता हूं कि 2027 में होने वाले वहां के चुनाव का नतीजा पहले से तय है। भाजपा की सरकार फिर बनेगी। तो पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए एक चुनौती भी है और अवसर भी। 2029 के चुनाव की दृष्टि से देखें तो समय बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन इन ढाई सालों में परिवर्तन होते हुए दिखाई देने चाहिए। ऐसा हुआ तो आप मान कर चलिए कि 2029 में नरेंद्र मोदी के चौथे कार्यकाल का जो राजमार्ग है, वह पश्चिम बंगाल से होकर जाएगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)









