इस मामले में विधायक अब्बास अंसारी, उनकी पत्नी निखत बानो, ड्राइवर नियाज़, चित्रकूट जेल अधीक्षक अशोक सागर, डिप्टी जेलर सुशील कुमार, कॉन्स्टेबल जगमोहन समेत 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दरअसल, निखत बानो बीते कई दिनों से अब्बास अंसारी से रोजाना 11 बजे मिलने पहुंचती थीं और 3 से 4 घंटे जेल में बिताकर वापस जाती थीं। इतना ही नहीं, अब्बास से निखत के मिलने के लिए जेल में कोई रोक टोक नहीं थी। बताया ये भी जा रहा है कि अब्बास अपनी पत्नी निखत के मोबाइल फोन से मुकदमे के गवाहों और अभियोजन से जुड़े अफसरों को फोन भी करता था। उन्हें फोन पर ही डराया-धमकाता था। पत्नी के ही फोन से रंगदारी भी मांगी जाती थी।
अब्बास से लगातार बे-रोकटोक मिलने के लिए जेल कर्मचारियों को पैसे और गिफ्ट दिए जाते थे। वहीं, कर्वी थाने में दर्ज एफआईआर में ड्राइवर नियाज़ की मदद से अब्बास को जेल से भगाने की योजना का भी जिक्र किया गया है।
पुलिस को मिली सूचना के बाद अब्बास अंसारी की बैरक पर डीएम और एसपी ने मारा छापा तो वह बैरक में नहीं मिला। डीएम और एसपी की छापेमारी की खबर मिलते ही जेल का सिपाही जगमोहन अब्बास को जेल अधीक्षक के कमरे से निकालकर बैरक ले गया था। इसके साथ ही डीएम और एसपी को अब्बास की पत्नी निखत जेल अधीक्षक के कमरे में मिली थी।

निखत की तलाशी ली गई तो उसके पास से 2 मोबाइल फोन, 21000 रुपये और 12 रियाल भी बरामद हुए। छापेमारी में बरामद फोन से निखत बानो ने डाटा भी डिलीट किया था। जब पुलिस अधिकारियों ने उनके फोन का पासवर्ड मांगा तो उन्होंने गलत पासवर्ड बताया।
डीआईजी जेल प्रयागराज को इस मामले की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद चित्रकूट जेल में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही अब्बास चित्रकूट जेल में बंद है। (एएमएपी)



