मोदी सरकार के कड़े कदमों का संदेश- सुधर जाओ वरना पानी समेत हर चीज को तरसोगे।
भारत बांग्लादेश के संबंध पहले जैसे नहीं रह गए हैं। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद अमेरिका से भेजा गया जिहादी मोहम्मद यूनुस भारत-बांग्लादेश संबंधों को जितना खराब कर सकता था, उसने किया। अब भारत सरकार को लग रहा है कि जवाब देने का मौका है तो उसने बांग्लादेश की घेरेबंदी शुरू की है।
बांग्लादेश पानी से लेकर बिजली तक हर चीज में भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश में हाल ही में सत्तारूढ़ हुई तारिक रहमान सरकार पाकिस्तान और चीन की ओर ज्यादा झुकती दिख रही है। तारिक रहमान अमेरिका परस्त भी हैं। ये तीनों मिलकर भारत को परेशान किए रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों हुईं तीन घटनाओं पर जरा ध्यान दीजिए। पहली बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन कोलकाता लौट आई हैं। बांग्लादेश ने उनको देश निकाला दे दिया था तो वह भारत आईं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने भी उनको कोलकाता से निकाल दिया था। चूंकि तस्लीमा नसरीन इस्लाम की खामियों के बारे में बताती हैं तो यह भारत के लेफ्ट इको सिस्टम को बर्दाश्त नहीं हुआ। इसीलिए ममता बनर्जी भी उनकी दुश्मन बन गईं। पश्चिम बंगाल से ममता सरकार की विदाई के बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन ने कहा है कि बांग्लादेश में जब तक जिहादी तत्व हैं तब तक भारत -बांग्लादेश के संबंध सुधरने वाले नहीं हैं। दूसरी घटना हुई शेख हसीना वाजेद ने दिल्ली में एक कार्यक्रम किया। इससे बांग्लादेश को बहुत परेशानी हुई है और उसने तुरंत एतराज जाहिर किया। भारत सरकार ने कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम था। भारत सरकार की ओर से कोई आयोजन नहीं किया गया। शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की सोच सकती हैं। हो सकता है कि उनको गिरफ्तार कर लिया जाए या मार दिया जाए फिर भी वह लौटना चाहती हैं। उनकी इस बात से तारिक रहमान बहुत परेशान हैं। हाल ही में हुए चुनाव में उनकी पार्टी जीती है। लेकिन कैसे जीती,यह भी जान लेना चाहिए। बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी आवामी लीग,जिसकी प्रमुख शेख हसीना हैं, को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। देश की नंबर एक पार्टी चुनाव नहीं लड़ी तो नंबर दो को जीतना ही था। अब शेख हसीना अगर वापस जाती हैं तो ये अंदाजा लगेगा कि बांग्लादेश के लोग जो पार्टी सत्ता में है उसके साथ हैं या शेख हसीना के साथ। पाकिस्तान और अमेरिका यह नहीं चाहेंगे कि हसीना बांग्लादेश लौटें। अमेरिका के डीप स्टेट ने ही मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में स्थापित किया था।
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अघोषित प्रधानमंत्री के तौर पर काम करने वाला मोहम्मद यूनुस सपने देखने लगा था कि भारत की चिकन नैक काट देगा और पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग कर देगा। वह चीन और पाकिस्तान की गोद में जाकर बैठ गया। अमेरिका की कठपुतली तो वह पहले से ही था। लेकिन तारिक रहमान के आने के बाद से भी स्थिति में कोई बहुत परिवर्तन नहीं आया है। भारत के लिए शेख हसीना की सबसे बड़ी उपयोगिता ये थी कि वह भारत के स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट के खिलाफ कभी नहीं गईं। चीन से भी उनके संबंध थे, लेकिन कभी उन्होंने ये नहीं होने दिया कि चीन का प्रभाव बांग्लादेश पर भारत से ज्यादा हो जाए। दूसरा अमेरिका अपना मिलिट्री बेस बनाने के लिए बांग्लादेश से एक आइलैंड चाहता था, लेकिन शेख हसीना ने देने से मना कर दिया और वही उनकी सरकार के तख्ता पलट का कारण बना। भारत सरकार को यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही है कि अमेरिका, चीन, पाकिस्तान तीनों मिलकर उसकी घेरेबंदी करना चाहते हैं। तो मैंने दो घटनाएं बताईं। उन्हें आप लक्ष्य की दृष्टि से शॉर्ट टर्म कह सकते हैं। तीसरी जो घटना है, वह लॉन्ग टर्म की दृष्टि से है। बांग्लादेश के संदर्भ में बात करें तो इस समय भारत में सबसे बड़ी समस्या घुसपैठ है। राजनीतिक संरक्षण के कारण बांग्लादेश से बड़ी संख्या में घुसपैठिये आते थे और फर्जी तरीके से बर्थ सर्टिफिकेट और अन्य डॉक्यूमेंट्स बनवा लेते थे। तो संसद में भारत सरकार एक कानून लेकर आई। अब कोई भी जन्म या मृत्यु होने पर एक महीने के अंदर आपको उसका रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। एक महीने में आप बर्थ सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं। जैसे-जैसे देर होती जाएगी वैसे-वैसे अप्रूवल देने वाली अथॉरिटी का लेवल बढ़ता जाएगा। इस कानून के लागू होने के बाद अब देश में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे भविष्य में बांग्लादेशियों की घुसपैठ की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अब भारत के सामने समस्या यह है कि जो आ गए हैं उनका क्या करना है? तो डिटेक्ट, डिटेल और डिपोर्ट ये तीन डी भारत सरकार की नीति का हिस्सा हो गए हैं। अब बांग्लादेश के लिए मुश्किल हो रही है। बड़ी संख्या में उनकी आबादी भारत आती थी। इससे उनकी इकॉनमी पर दबाव कम हो जाता था। साथ ही बॉर्डर पर फेंसिंग शुरू हो गई है। जैसे ही पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनी उसने फेंसिंग के लिए जमीन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को हैंड ओवर कर दी। फेंसिंग से घुसपैठ और बंद हो जाएगी। ये सारे कारण बांग्लादेश को झुका सकते हैं।
बांग्लादेश पर नकेल के लिए सबसे बड़ा काम जो होने जा रहा है वह है बांग्लादेश और भारत के बीच दिसंबर 1998 में एक नदी जल समझौता हुआ था। उसके तहत दोनों देशों में नदियों के जल का बंटवारा होता है। दिसंबर 2026 में वह समझौता खत्म हो रहा है। अब उसके रिन्यूअल का समय आ रहा है। भारत कह रहा है कि हम इसको रिन्यू करने से पहले रिव्यू करेंगे। हम अपना नुकसान करके बांग्लादेश को ज्यादा पानी नहीं देंगे। अब आप देखिए कि बिजली के मामले में बांग्लादेश पहले ही भारत पर निर्भर है। इस संधि के रिव्यू के बाद अगर भारत तय कर ले तो बांग्लादेश पानी के लिए भी तरस सकता है। तो बांग्लादेश के लिए भारत के खिलाफ जाना अब दिन पर दिन मुश्किल होने वाला है। सिलीगुड़ी और दूसरी जगहों पर भारतीय सेना की जिस तरह से तैनाती हो रही है उसके बाद चीन और पाकिस्तान का साथ मिलने पर भी बांग्लादेश का भारत के सामने खड़ा रह पाना मुमकिन नहीं रह जाएगा। भारत से लड़ाई लड़ने की उसकी हैसियत नहीं है, लेकिन भारत को परेशान करते रहने की उसकी हैसियत है। लेकिन इन कदमों के बाद भारत के दुश्मनों को रियायत देने के बारे में बांग्लादेश की मौजूदा सरकार अब 100 बार सोचेगी। याद करिए 1975 जब शेख हसीना के पिता शेख मुजीब उर रहमान की हत्या कर दी गई थी, तब भारत में खुफिया एजेंसियों को पता तक नहीं चला था। उस हत्याकांड में शेख हसीना इसलिए बच गईं क्योंकि वह और उनकी एक बहन विदेश में थे। इस बार भारत ने ऐसा नहीं होने दिया। जब तख्ता पलट हुआ तो भारत सरकार बांग्लादेश की ही सेना की मदद से शेख हसीना को निकालकर भारत ले आई। अगर कुछ मिनट की भी देरी होती तो शेख हसीना दिवंगत हो चुकी होतीं। शेख हसीना ने भारत से जो दोस्ती निभाई थी उसी के एवज में भारत उनको प्रोटेक्शन दे रहा है।
भारत सरकार बांग्लादेश की नई सरकार को संदेश दे रही कि आप हमारे राष्ट्रीय हित में काम करेंगे तो हम आपकी हर तरह की मदद करने को तैयार हैं, लेकिन हमारे राष्ट्रीय हित के खिलाफ जाएंगे तो फिर आपके लिए बड़ी मुश्किल होने वाली है। शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से बांग्लादेश की आर्थिक हालत बहुत खराब है। अब वहां बिजली, पानी, संसाधन हर तरह का संकट है। अमेरिका हो,चीन हो या पाकिस्तान सब अपना हित देख रहे हैं। वे बांग्लादेश की स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं। भारत सरकार ये बात समझ रही है। इसीलिए बांग्लादेश पर शिकंजा धीरे-धीरे कसता जा रहा है। भारत सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि बांग्लादेश नहीं माना तो आने वाले समय में उसके लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)









