देश में अजब तमाशा, अभद्र और अराजक तत्वों को ही जेन जी मान लिया।
देश में इस समय एक तमाशा चल रहा है। यह जेन जी का तमाशा है। इसको ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे दुनिया में इससे पहले ये एज ग्रुप होता ही नहीं था। मुझे तो शक होने लगा है कि हमारी पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ियां क्या बूढ़ी ही पैदा हुई थीं। उनकी बात आज तक क्यों नहीं हुई? आखिर क्या किया है इस जेन जी ने जिसकी वजह से आज चर्चा में है। सब लोग कह रहे हैं कि बात होनी चाहिए। राजनीतिक दलों और प्रधानमंत्री ने कोई कसर छोड़ी थी क्या कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी जेन जी के साथ एक कार्यक्रम कर लिया और कहा कि इनसे संवाद होना चाहिए।
मुझे लगता है कि हमारी पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ियों को धिक्कार है कि चौराहे पर खड़े होकर गाली देने का साहस नहीं जुटा पाए। जंतरमंतर पर जो कुछ हुआ उसके बाद से यह बताने की कोशिश हो रही है कि गंदी-गदी गालियां देने से ही जेन जी की पहचान बनती है। जेन जी से संवाद की बात राजनीतिक लोग करें यह फिर भी समझ में आता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्यों कर रहा है। वह तो दुनिया की एकमात्र संस्था है जिसमें बाल स्वयंसेवक होते हैं। बचपन से शाखा में जाते हैं। किशोरावस्था और युवा अवस्था में भी वे संघ के स्वयंसेवक होते हैं। तो क्या संघ के पदाधिकारी उनसे संवाद नहीं करते? या वे लोग जेन जी में नहीं आते। पहले तो यह तय कीजिए कि कौन से जेन जी से संवाद कर रहे हैं। जब कुएं में ही भांग पड़ जाए तो जाहिर है कि पूरा गांव ही नशे में होता है। वही हालत हमारी हो गई है। इस समय देश में एक ही मुद्दा है जिस पर मतैक्य है कि जंतरमंतर पर जो लोग बैठे थे, उनसे बात करनी चाहिए। एक आदमी अमेरिका से आया या कहें भेजा गया वह रातों रात इस देश में नायक बन गया। जेन जी का प्रतिनिधि बन गया। जबकि उसका न तो जेन जी, न छात्रों और न ही नीट परीक्षा, जिसके पेपर लीक को लेकर मुद्दा बनाया गया, से कोई लेना-देना है। जो लोग कह रहे हैं कि जेन जी से बात होनी चाहिए उनको जरा याद कर लेना चाहिए कि सिर्फ 23 साल की उम्र में सरदार भगत सिंह ने इस देश के लिए बलिदान दे दिया था। चूंकि उन्होंने कभी किसी को गाली नहीं दी तो आज की परिभाषा के अनुसार उनको तो कभी जेन जी में गिना नहीं जाएगा। उनके जैसे लोगों से संवाद नहीं होना चाहिए जो देश के लिए बलिदान देने को तैयार हों या सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हों। पिछले पांच सालों से सेना में अग्निवीरों की भर्ती हो रही है। इनकी उम्र की सीमा 16 से 20 साल रखी गई है। हजारों की संख्या में ये सीमा पर तैनात हो चुके हैं, देश के लिए बलिदान दे चुके हैं, लेकिन इनसे संवाद हो यह बात आपने कभी सुनी।
जंतरमंतर पर जो कुछ हजार छात्र जुटे उन्हीं को पूरे देश के जेन जी का प्रतिनिधि मान लिया गया है। चलो इसे फिर भी स्वीकार कर लेना चाहिए लेकिन उनके साथ जो अपराधी, आतंकवाद के समर्थक और आतंकवादी घटना को अंजाम देने की योजना बनाने वाले थे, उनको भी जेन जी में शामिल कर लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस कह रहे हैं कि जिसका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं होना चाहिए। केंद्र समेत अलग-अलग सरकारों ने घोषणा कर दी है कि सारे मुकदमे वापस लिए जाएं। सवाल है कि क्यों, उसकी कोई समीक्षा होगी? अपराध की क्षमा कैसे हो सकती है? सीजेआई को लगता है कि इससे उनको प्रसिद्धि मिलेगी। जेन जी में उनकी लोकप्रियता बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट को भारत का संविधान माफी देने का अधिकार नहीं देता है। तो नए जेन जी की पहचान है कि चौराहे पर खड़े होकर गाली दो, उसका वीडियो बनाओ और उसको वायरल करो। तब तुमसे सरकार भी बात करेगी और तुम्हारे प्रति सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया भी सहानुभूति दिखाएगा। सारे राजनीतिक दल तुम्हारे साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाने को तैयार हो जाएंगे। इस अमेरिका रिटर्न अभिजीत दीपके की देश, देश के अतीत और देश की संस्कृति के बारे में समझ क्या है,यह किसी को मालूम है। मैं समझता हूं कि उसने एक ही काम बहुत अच्छा किया है जो पार्टी का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखा है। तिलचट्टा क्या करता है? गंदगी और बीमारी फैलाता है। वही काम ये लोग कर रहे हैं। लेकिन बाकी लोगों को क्या हो गया है? वे अपने घर में गंदगी का स्वागत क्यों कर रहे हैं? क्या जेन जी का मतलब है कि आपकी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस वालों पर जानलेवा हमला करना। उनसे संवाद होना चाहिए। क्या किसी ने उन पुलिस वालों का मामला उठाया जिन पर हमला किया गया। वे तो किसी पार्टी या किसी सरकार के पक्ष में या विरोध में नहीं खड़े थे। वे तो सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन पुलिस वालों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया उनके खिलाफ एक्शन होना चाहिए। सवाल है कि किन परिस्थितियों में किया? उसके अलावा कोई विकल्प था कि नहीं? आखिर पुलिस वाले को अपनी जान की रक्षा करने का अधिकार है या नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट उनकी सुन रहा है जो गाली दे रहे हैं और जिन्होंने हिंसा की है।
सुप्रीम कोर्ट से लेकर प्रधानमंत्री, संघ प्रमुख और सारे राजनीतिक दलों के नेता कह रहे हैं कि बात होनी चाहिए, लेकिन किनसे जो कानून हाथ में लेते हैं, जो गालियां देते हैं, जो अपने साथ खड़े अपराधियों की आलोचना करने को भी तैयार नहीं होते। पूरी व्यवस्था इन लोगों को बचाने के लिए पतली गली खोज रही है कि बच्चे हैं। इनकी बात नहीं सुनेंगे तो किसकी सुनेंगे। जेन जी की बात सुननी चाहिए, इसमें किसी को एतराज नहीं हो सकता। लेकिन सवाल यह है कि किन मुद्दों पर कि उनको पत्थर चलाने का अधिकार होना चाहिए, उनको देश की चुनी हुई सरकार का तख्ता पलट करने का अधिकार होना चाहिए, विदेशी ताकतों के इशारे पर देश में अराजकता फैलाने का अधिकार होना चाहिए। क्या इसके लिए बातचीत होनी चाहिए? जिसकी चर्चा हो रही है ये ऐसा जेन जी है जो सिर्फ वही सुनना चाहता है, जो वह चाहता हैं। आप उनसे जाकर बात करिए और कहिए कि प्रधानमंत्री को हटा देते हैं, वह तुरंत सुनने को तैयार हो जाएंगे। उनसे कहिए कि पुलिस वालों पर मुकदमा चले, तुरंत तैयार हो जाएंगे। उनसे कहिए कि दंगाइयों और हिंसा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए,वे तुरंत सुनने को तैयार हो जाएंगे। इन लोगो की कोई रीजनेबल मांग या देश के बारे में सोच है क्या? इस देश में लगभग 15-16 करोड़ परिवारों को मुफ्त अनाज मिल रहा है। हर परिवार में मान लीजिए कि एक या दो जेन जी वर्ग के युवक हैं तो 16 करोड़ होते हैं। उनमें से कोई सड़क पर उतरा क्या? क्या वह कहेगा कि ये सरकार हमको मुफ्त अनाज क्यों दे रही है? 9 करोड़ परिवारों को मुफ्त शौचालय मिला है। क्या उस परिवार के बच्चे जो इस कैटेगरी में आते हैं, वे सड़क पर आएंगे कि हमारे परिवार को शौचालय क्यों दे दिया? कोई बात तार्किक ढंग से होगी कि नहीं या जो कानून तोड़ेगा और संविधान के खिलाफ जाएगा, उसकी ही बात सुनी जाएगी। जो चुपचाप इस देश के विकास में सहयोग कर रहा है, अपनी आजीविका कमा रहा है, पढ़ाई कर रहा है लेकिन वह गाली देने के लिए सड़क पर नहीं आता इसलिए उनकी बात क्यों सुनी जाए?
इस पूरे तमाशे में देश का जो असली जेन जी है, उसकी किसी को चिंता ही नहीं है। सरकार और राजनीतिक दलों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सब यह साबित कर रहे हैं कि अगर हिंसा करने की ताकत है तो तुम्हारी बात सुनी जाएगी। अगर देश में अराजकता पैदा करना चाहते हो तो तुम्हारी बात सुनी जाएगी। ऐसा माहौल बन गया है कि जैसे इस देश में पहली बार कोई जेन जी वर्ग पैदा हुआ है। इससे पहले जेन जी पैदा ही नहीं होते थे। ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक असली जेन जी सड़क पर उतर कर नहीं आएगा।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)









