आज के दौर में सतुंलित खानापान नहीं होने से कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कम उम्र के लोग कई तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में क्‍या खाएं, क्‍या न खाएं एक बड़ी परेशानी है। ज्‍यादातार लोग यही जानते हैं कि दूध, दही, पनीर और छाछ सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं। क्‍योंकि डेयरी प्रॉडक्ट्स को संतुलित भोजन का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है। ये कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन बी, पोटैशियम और विटामिन डी जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो बच्चों के विकास से लेकर बुजुर्गों तक के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन जब हृदय रोगियों की बात आती है तो डेयरी प्रॉडक्ट्स का सेवन सावधानी से किया जाना चाहिए। डेयरी उत्पादों में सैचुरेटेड फैट होता है जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है और हृदय रोगों को दावत देता है।

ये लोग रहे सावधान!

विशेष रूप से उन लोगों के मामले में जिन्हें पहले से ही हृदय रोग है, फुल फैट डेयरी प्रॉडक्ट्स दिल के रोगों का कारण बन सकते हैं। रिसर्च के अनुसार, प्रतिदिन 200 ग्राम तक डेयरी प्रॉडक्ट्स का सेवन हृदय के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से नहीं छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि इनमें महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है जो शरीर और दिमाग को लाभ पहुंचाती है। इसलिए कम वसा वाले दूध, दही और पनीर का सेवन करना चाहिए। फुल फैट दूध और क्रीम, पनीर का सेवन हमेशा कम मात्रा में किया जाना चाहिए।

हृदय रोगियों के लिए क्या हैं डेयरी ऑप्शन

हृदय रोगियों के लिए कम संतृप्त वसा वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये घटक हृदय संबंधी जोखिम कारकों को बढ़ा सकते हैं। सबसे बढ़िया विकल्पों में लो फैट मिल्क और मलाई रहित दूध शामिल है जो कम संतृप्त वसा वाला होता है और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। इसी तरह कम वसा वाले दही विशेष रूप से बिना चीनी वाला सादा दही फैट और कैलोरी से बचना का एक बढ़िया विकल्प है।

कम वसा वाले पनीर जैसे कि कॉटेज पनीर के जरिए भी शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए पोषण प्रदान किया जा सकता है, हालांकि पनीर में कैलोरी होती है इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। सामान्य दही की तुलना में ग्रीक योगर्ट हाई प्रोटीन और लो कार्बोहाइड्रेट के लिए जाना जाता है जो इसे हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बनाता है।

हृदय रोगियों के लिए सबसे खराब डेयरी उत्पाद

फुल फैट मिल्क 
हृदय रोगियों को फुल फैट मिल्क वाले दूध और दही से बचना चाहिए क्योंकि उनमें सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होती है जिससे हृदय रोग की परेशानी और बढ़ सकती है।

चीज 
सैचुरेटेड फैट से भरपूर क्रीम चीज का कम से कम सेवन करना चाहिए, जबकि चेडर या स्विस जैसी हार्ड चीज भी फैट से भरपूर होती है इसलिए हृदय रोगियों को इससे बचना चाहिए।

इन बीमारियों में नहीं पीना चाहिए दूध

सूजन बढ़ सकती है
अगर आपको शरीर में कही सूजन की समस्या है तो दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। एक्सपर्ट्स की माने तो जिन लोगों को सूजन संबंधी समस्या है उन्हें दूध पीने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। दूध में सैचुरेटेड फैट होता है, जो शरीर में लिपि पॉलीसेकेराइड नामक इन्फ्लेमेटरी अणुओं के अवशोषण को बढ़ाता है। इससे सूजन और बढ़ सकती है।

लिवर संबंधी परेशानी
अगर किसी को लिवर संबंधी समस्याएं हैं जैसे फैटी लिवर या लिवर में सूजन है तो दूध नहीं पीना चाहिए। ऐसी स्थिति में लिवर दूध को ठीक से पचा नहीं पाता है और लिवर में सूजन की समस्या हो सकती है। शरीर में फैट बढ़ सकता है जिससे पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।

दूध से एलर्जी
कुछ लोगों को दूध से एलर्जी की समस्या हो सकती है। ऐसे लोगों को दूध आसानी से नहीं पचता है। जिन लोगों को दूध से एलर्जी होती है उन्हें लैक्टोज इंटॉलरेंस कहते हैं। ऐसे लोगों को दूध पीने से पाचन की दिक्कत होने लगती है। कई बार दस्त, गैस, सूजन और ब्लोटिंग की परेशानी होने लगती है।

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पाचन की दिक्कत

अगर आपका पेट खराब रहता है तो दूध नहीं पीना चाहिए। पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को दूध से परहेज करना चाहिए। खासतौर से जिन लोगों को पेट में गैस, कब्ज, ब्लोटिंग रहती है। दूध पीने से ये समस्याएं और गंभीर हो सकते हैं। (एएमएपी)