मनुस्मृति को महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया लेकिन बाकी मजहबों पर चुप्पी। 

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
राहुल गांधी ने अब मनुस्मृति का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं को दोयम दर्जे का माना गया है। उनकी अपनी कोई स्वतंत्रता नहीं है। उन्हें पुरुषों के अधीन बताया गया है। जबकि ये सब बातें गलत हैं। राहुल गांधी को मालूम होना चाहिए कि हिंदू दर्शन में सरस्वती को विद्या की देवी, लक्ष्मी को समृद्धि की देवी और दुर्गा को शक्ति की देवी कहा गया है।
जो लोग भी मनुस्मृति का मुद्दा उठाते हैं उनसे एक सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए। इस देश में कितने ऐसे ईसाई हैं जो बाइबल पर विश्वास करते हैं,जवाब 100 परसेंट निकलेगा। कितने ऐसे मुसलमान हैं जो कुरान पर विश्वास करते हैं,जवाब 100 फीसदी निकलेगा। अब जरा यह पता कर लीजिए कितने ऐसे हिंदू हैं जो मनुस्मृति को पढ़ते हैं या उस पर विश्वास करते हैं, एक परसेंट भी नहीं निकलेंगे। हिंदुओं ने मनुस्मृति को तो जाने कब का भुला दिया है। मनुस्मृति एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें नारी स्वतंत्रता और नारी अधिकार की जितनी बातें कही गई हैं दुनिया के किसी धर्म और मजहब में नहीं कही गई हैं। नारी के बारे में कहा गया है कि अगर योग्य वर न हो तो युवती का अविवाहित रहना बेहतर है। उसको पैतृक संपत्ति में अधिकार की बात केवल मनुस्मृति करती है। 1925 में कांग्रेस के जिस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की मांग की गई उसमें मनुस्मृति को उद्धृत किया गया। अब जरा दूसरे मजहबों में देख लीजिए। ईसाई मजहब में वह फॉरबिडन फ्रूट मतलब महिला ने वह सेब जो नहीं खाना था, खा लिया तो उसके बाद उनके गॉड महिला से कहते हैं कि तुम्हारी इच्छा सिर्फ तुम्हारा पति होना चाहिए। वही तुम्हारे ऊपर राज करेगा। कुरान कहता है कि पुरुष श्रेष्ठ है। महिला उसके कहे के अनुसार चले। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो उसे अनुशासित किया जाना चाहिए। कुरान तो यहां तक मानता है कि पुरुष की गवाही नारी से दुगनी है। और मनुस्मृति में क्या कहा गया है- जहां पर नारी का सम्मान होता है वहां देवता विराजते हैं। कौन सा ऐसा मजहब है जो नारी को अर्धांगिनी कहता है? तो राहुल जैसे लोग मनुस्मृति की बात क्यों उठाते हैं? सिर्फ इसलिए क्योंकि उनको हिंदू धर्म को गाली देनी होती है। इसलिए मैं मानता हूं कि राहुल गांधी बिल्कुल सही रास्ते पर चल रहे हैं।
राहुल गांधी के पिता के नाना की भी यही सोच थी कि हिंदू धर्म पुरातन पंथी है। वह उसे घटिया मानते थे। वही बताने की कोशिश राहुल गांधी कर रहे हैं। वह इस देश की संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ हैं। वह सामाजिक व्यवस्था जो परिवार पर आधारित है, उसके खिलाफ हैं। उनकी सारी कोशिश है कि पहले परिवार को तोड़ो फिर समाज को तोड़ो और फिर देश को तोड़ो। ऐसे लोगों से एक सवाल पूछा जाना चाहिए कि तुम जो नारी स्वतंत्रता की बात कर रहे हो, यह तुम्हारा सिद्धांत है जिसमें तुम विश्वास करते हो या केवल हिंदू धर्म को गाली देने का तुम्हारा राजनीतिक हथियार है। तो जैसे-जैसे बात आगे बढ़ती है स्पष्ट होता जाता है कि यह केवल हिंदू धर्म को गाली देने का हथियार है। हमारा देश संविधान से चलता है, मनुस्मृति से नहीं चलता है। लेकिन इसे शरिया और बाइबल से चलाने की कोशिश हो रही है। जब से देश आजाद हुआ है आपको एक भी ऐसा मामला नहीं मिलेगा जहां किसी हिंदू ने किसी दूसरे मजहब वाले का लालच या धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराया हो। लेकिन करोड़ों की संख्या में ऐसे मामले मिलेंगे जहां डरा धमकाकर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया गया है। यही कारण है कि लगभग पूरा नॉर्थ ईस्ट क्रिश्चियन बन चुका है। देश में आजादी के समय जितने मुसलमान थे, उससे कई गुना उनकी संख्या बढ़ चुकी है।
राहुल गांधी को अगर वास्तव में नारी अधिकारों की चिंता होती तो वह कहते कि जिस भी धर्म या मजहब में नारी को अधिकारों से वंचित किया गया है उन सबकी आलोचना होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने उस धर्म को चुना जिसमें नारी का सबसे ज्यादा सम्मान और अधिकार हैं। अविवाहित युवती का पैतृक संपत्ति में एक चौथाई हिस्सा होना चाहिए,यह बात केवल मनुस्मृति कहती है। लेकिन गाली किसको मिलेगी? हिंदू धर्म को। पूरी दुनिया से हिंदुत्व को खत्म करने की जो अंतरराष्ट्रीय साजिश है दरअसल राहुल गांधी उसी का हिस्सा हैं। जब उदयनिधि स्टालिन ने बयान दिया था कि सनातन धर्म का समूल नाश कर देना चाहिए तब राहुल गांधी के मुंह से एक भी शब्द निकला था। क्या उदयनिधि स्टालिन या राहुल गांधी या जिन-जिन लोगों ने इसका समर्थन किया,वे किसी दूसरे मजहब के बारे में यही बात बोलने की हिम्मत भी कर सकते हैं। बहुत से लोगों को लग रहा होगा कि राहुल गांधी जो कर रहे हैं वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बना रहे हैं। यह उनका छोटा सा लक्ष्य है। उनका दूरगामी लक्ष्य इस देश से सनातन धर्म को समाप्त करना है। किसी चीज को समाप्त करने के लिए जरूरी होता है कि आप उसकी खामियां बताएं। उसे लोगों के लिए अहितकर बताएं। राहुल गांधी और उनके साथी यही कर रहे हैं। पुणे के जिस कार्यक्रम में राहुल बोल रहे थे,उसमें कहा जा रहा था कि हिंदू युवतियों को घर से निकलने नहीं दिया जाता है। कहा जाता है कि स्कार्फ पहन के जाओ। वहीं उनके बगल में एक महिला पूरा लबादा ओढ़े खड़ी हुई थी। उससे उन्होंने नहीं पूछा कि तुम अपने मन से पहन कर आई हो या तुम्हें जबरदस्ती पहनाया गया है? इस्लाम में बुर्का पहनने का जो चलन है,उसके बारे में राहुल गांधी के मुंह से आपने एक बार भी सुना है क्या? बाइबल या क्रिश्चियनिटी के खिलाफ राहुल गांधी का एक भी बयान आपने कभी सुना या देखा है। इसका मतलब है कि राहुल गांधी मानते हैं कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी में कोई खराबी नहीं है। सब कुछ अच्छा है। खराबी केवल सनातन धर्म में है और उसको नष्ट करना चाहिए। तो वह वही कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी से पहले हिंदू धर्म को खत्म करने की कोशिश मुगलों और अंग्रेजों ने भी की। वे 1000 साल में भी उसे खत्म नहीं कर पाए। आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू ने यह कोशिश की। और अब राहुल गांधी उस कोशिश में लगे हैं। आप अच्छी तरह से समझ लीजिए कि ये उनका कोई पॉलिटिकल कैंपेन नहीं है। ये सनातन के विरोध का एजेंडा है। उनको लग रहा है कि जो मुगल और अंग्रेज नहीं कर पाए, वह हम अराजकता के जरिए कर सकते हैं। तो जो व्यवस्था हिंदुत्व का संरक्षण करती है उसको खत्म करो। नेपाल में यही हुआ और उसे हिंसा की आग में झोंक दिया गया। लेकिन वहां का हिंदू जाग गया। अब नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग हो रही है। लोग सड़कों पर हैं। तो अगर आप सनातन धर्म को दबाने या खत्म करने की कोशिश करेंगे तो वह नए सिरे से उठकर खड़ा होगा। राहुल गांधी जो कर रहे हैं वह तात्कालिक रूप से जरूर सनातन धर्म के लिए नुकसानदेह है, लेकिन अगर सनातन धर्म के मानने वालों को यह बात समझ में आ जाएगी तो उसकी प्रतिक्रिया इतनी भयंकर होगी कि सनातन विरोधी कहां उड़ जाएंगे कुछ पता नहीं चलेगा। लेकिन सवाल वही स्वयं बोध और शत्रु बोध का है। पहले आप यह जानिए कि आप कौन है? आपका धर्म क्या है? आपकी संस्कृति क्या है? और उसके शत्रु कौन हैं? जब तक शत्रु की पहचान नहीं होगी तब तक आप लड़ नहीं सकते।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)