शाह कांग्रेसियों को बेनकाब न कर दें इसीलिए संसद से भागे थे राहुल।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
मनुस्मृति में कहा गया है कि राजदंड कभी सोता नहीं है। राजदंड ही राजा है। राजा को इसलिए बनाया ताकि सभी अपने अपने वर्णाश्रम धर्म का पालन करते हुए सुरक्षित रह सकें। अब ये उस समय की बात है जब राजशाही थी। आज जनतंत्र है। तो आज राजदंड भारत का संविधान है। संविधान तय करता है कि नागरिकों को किस नियम से चलना है,उनके अधिकार और कर्तव्य क्या हैं? संवैधानिक संस्थाएं तय करती हैं कि उनकी सीमा क्या है? सत्ता प्रतिष्ठान तय करता है कि अगर कोई कानून तोड़ता है तो उसके लिए दंड क्या है? उसकी जिम्मेदारी है कि वह लोगों को सुरक्षित महसूस कराए।
यह तो मनुस्मृति की बात हो गई। अब लौट कर आते हैं वर्तमान में। इसी अगस्त महीने की 10, 11 और 12 तारीख की बात है। इन्हीं दिनों संसद का सत्र भी चल रहा था। इन तीन दिन भारत का आंतरिक सुरक्षा तंत्र एक पल के लिए भी सोया नहीं और देश में इसकी कोई बड़ी खबर नहीं बनी। इन तीन दिनों तक एक ऑपरेशन चला। ये उसी तरह का ऑपरेशन था जैसा पीएफआई के खिलाफ चला ऑपरेशन ऑक्टोपस था। इस बार भी देश के 14 राज्यों में कोऑर्डिनेटेड तरीके से रियल टाइम रेड हुई। उत्तर प्रदेश के 62 शहरों और हरियाणा के 52 इलाकों में आतंकी रेकी कर चुके थे। इसके अलावा दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 ठिकानों पर आतंकवादियों की नजर थी। इंटेलिजेंस ब्यूरो और लोकल इंटेलिजेंस से ये सूचनाएं सरकार को मिल रही थीं। तो 14 राज्यों में तीन दिन तक यह रेड चलती रही। उस दौरान सब लोग पूछ रहे थे कि गृहमंत्री अमित शाह कहां हैं और क्या कर रहे हैं? विपक्षी सवाल उठा रहे थे कि वे संसद में क्यों नहीं आ रहे हैं? तो अमित शाह उन दिनों देश को एक बहुत बड़े खतरे से बचाने में जुटे थे। सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों पर हम बड़ी आसानी से सवाल खड़े कर देते हैं। लेकिन उनके सामने लक्ष्य होता है कि अगर 100 घटनाएं होने की आशंका है तो उन्हें सभी 100 में पास होना है। वे एक में भी फेल होना अफोर्ड नहीं कर सकते। अगर वे एक में भी फेल हो जाते हैं तो समझिए बहुत बड़ा कांड हो गया। जब ये एजेंसियां 100 में 100 आतंकी घटनाएं रोकने में सफल रहती हैं तो हमको आपको पता भी नहीं चलता है कि क्या हुआ। हमारे सुरक्षा तंत्र ने कितनी मेहनत से इन्हें रोका है। हमको पता तब चलता है जब कोई इक्का-दुक्का घटना हो जाती है। आपने देखाा होगा कि आतंकियों के नेटवर्क के खिलाफ जिन तीन दिन यानी 10, 11 और 12 अगस्त को यह रेड चली, उन्हीं दिनों मोदी सरकार पर सबसे ज्यादा राजनीतिक हमला हो रहा था। ये सब कड़ियां जुड़ी हुई हैं। यह पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी का नेटवर्क था, जिसको तोड़ा गया। इसने सोशल मीडिया के जरिए भारत में 2000 लोगों को रिक्रूट किया था और इसमें इंटेलेक्चुअल्स तक शामिल थे। रेड के बाद सरकार के पास काफी कुछ जानकारी आ चुकी है कि इसमें किन राजनीतिक दलों और संगठनों के लोग थे। कुछ पत्रकारों के भी नाम सामने आ रहे हैं। उनके यहां भी पुलिस पहुंच गई, लेकिन बाद में पता चला कि जो सिस्टम जनरेटेड इंफॉर्मेशन होती है कि अगर कोई ट्वीट है, जो बाद में पता चलता है आतंकवाद से रिलेटेड है, उसको आपने रीट्वीट कर दिया है भले ही आपका इन्वॉल्वमेंट न हो तो आपका नाम सिस्टम में आ जाता है। यह पता चलने पर पुलिस वापस चली गई लेकिन ऐसे लोगों का डाटा इकट्ठा करने के साथ बैकग्राउंड चेक हो रहा है। इतने बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया के जरिए आतंकवाद का नेटवर्क तैयार करने की यह पहली घटना है।
जिन 2000 लोगों को रिक्रूट किया गया इनको पाकिस्तान से निर्देश दिए जा रहे थे। उन्होंने टारगेट तय कर लिए थे। ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा से हथियार पहुंच चुके थे। योजना थी कि शहरों में खासतौर से जहां ज्यादा ट्रैफिक होता है,वहां रेड लाइट पर कार में बम लगाकर उसको उड़ाया जाए। जैसे लाल किले वाला विस्फोट था। लेकिन देश के चौकन्ने सुरक्षा और खुफिया तंत्र ने आतंकियों की सारी योजना फेल कर दी। एक-दो नहीं पूरे 253 आतंकवादी पकड़े जा चुके हैं और उनसे पूछताछ चल रही है। आपके मन में सवाल होगा कि आखिर जब गृहमंत्री सदन में बयान देने को तैयार हुए तो राहुल गांधी भाग क्यों गए? उन्होंने ऐसा क्यों कहा कि मुझे अमित शाह का भाषण नहीं सुनना है। वह इसलिए क्योंकि संसद में गृहमंत्री बोलेगा तो सारी परिस्थितियां बताएगा। वह बताएगा कि क्या घटना हुई और उसका संदर्भ भी रखेगा। क्या आशंका थी, क्या इंटेलिजेंस इनपुट था और उसके आधार पर सरकार ने क्या किया, ये सब बातें बताई जाएंगी। 20 जुलाई की घटना के बारे में भी बताया जाएगा कि किन लोगों ने साजिश रची थी। कांग्रेस को पता चल चुका था कि गृहमंत्री का बयान होगा तो उसमें कांग्रेस से जुड़े लोगों का भी नाम आएगा और इसीलिए राहुल गांधी भाग गए। उनको समझ में आ गया कि दांव उल्टा पड़ने वाला है। लेकिन कब तक नहीं सुनेंगे? सुनना तो पड़ेगा ही। यह जानकारी ऐसा नहीं है कि फाइलों में दबी रह जाएगी। यह बाहर आएगी। इसको और जांचा परखा जा रहा है। जो लोग इसमें शामिल हैं, उनकी पड़ताल हो रही है। उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। आज हमें लग सकता है कि कोई बड़ी आतंकी घटना तो हुई नहीं। हम चौंकते तभी हैं जब कोई बड़ी घटना हो जाती है। जब रोक ली जाती है तो कोई चर्चा नहीं होती क्योंकि उसके बारे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा बताती नहीं हैं। इसीलिए मनुस्मृति में कहा गया है कि राजदंड कभी सोता नहीं है। वह अगर सो जाएगा तो नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
इस समय अव्यवस्था फैलाने और नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए देसी विदेशी हर तरह की ताकतें सक्रिय हैं। ये कुरुक्षेत्र का मैदान सज रहा है। आप जोड़ते जाइए हर कड़ी जुड़ती चली जाएगी। जल्द ही भारत को निर्णायक लड़ाई लड़नी पड़ेगी। यह किसी नेता,किसी पार्टी, किसी सरकार का सवाल नहीं है। यह देश का सवाल है। देश बचेगा तभी हम आप बचेंगे। नेता और पार्टियां तो आती जाती रहेंगी। इसलिए इस मुद्दे को बहुत हल्के में मत लीजिए। यह जो आपको जगह-जगह कॉकरोच निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं, यह कोई स्वत:स्फूर्त आंदोलन जैसी चीज नहीं है। यह सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है और यह प्रक्रिया आने वाले समय में तेज होने वाली है। आप तय कीजिए कि आप देश के समर्थक हैं या विरोधी हैं। अगर देश के समर्थक हैं तो पहचानिए कि क्या षड्यंत्र क्या हो रहा है। सरकार और पार्टियों को छोड़ दीजिए। असली बात यह है कि देश के दुश्मन क्या कर रहे हैं और उनके इरादे को नाकाम करने के लिए हमारी आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए? जानकारी के अभाव में लिया गया निर्णय बहुत खतरनाक होता है। देश कह रहा है कि जानकार बनकर फैसला लीजिए। इसी में आपका, समाज और देश का भला है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)