टीसीएस में धर्म परिवर्तन और यौन शोषण रैकेट का पर्दाफाश किया।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की। जब से इस्लामी आतंकवाद,जिहाद और धर्म परिवर्तन के खिलाफ सरकारें और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हुई हैं,तब से इस तरह की घटनाएं ज्यादा सामने आ रही हैं। आयेदिन इस तरह की घटनाओं का सामने आना बताता है कि संकट बहुत बड़ा है।
अब आपको एक-दो घटनाएं बताता हूं। उसके बाद असली घटना पर आता हूं। 9 अप्रैल को असम में मतदान था। बोंगई गांव में एक पोलिंग बूथ पर अचानक मतदान की प्रक्रिया रोक दी गई। किसी को समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है। इसी दौरान एक मतदाता ने एक वीडियो शूट किया,जो हैरान करने वाला था। उस पोलिंग बूथ पर जो चुनाव अधिकारी था,वह मुसलमान था। उसने नमाज पढ़ने के लिए मतदान की प्रक्रिया रोक दी और मतदान केंद्र पर ही नमाज पढ़ने लगा। यह सीधे-सीधे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, इलेक्शन कमीशन के नियम और एथिक्स के खिलाफ है। किसी मतदान केंद्र में नमाज कैसे पढ़ी जा सकती है? यह मतदान केंद्र एक सरकारी स्कूल में था। उसी परिसर में एक नाम घर वैष्णव धर्म स्थल है। वहां तो वैसे भी नमाज नहीं पढ़ी जा सकती थी। अगर वह मतदाता वीडियो न बनाता तो यह खबर बाहर आ ही नहीं पाती। कितनी और जगहों पर ऐसा हुआ होगा, इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है। इससे आप समझिए कि ये लोग क्या करने पर आमादा हैं।
अब मैं असली मुद्दे पर आता हूं। नासिक में टीसीएस का बड़ा ऑफिस है। टीसीएस देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है, जो टाटा ग्रुप से जुड़ी हुई है। वहां पिछले तीन-चार साल से महिला कर्मचारियों का यौन शोषण हो रहा था। जबरन कुछ हिंदू कर्मचारियों को गौ मांस खिलाया गया। उसके अलावा उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा था। एचआर से शिकायत की गई लेकिन उसने कुछ नहीं किया। बल्कि पलट कर कहा कि यह कॉर्पोरेट कल्चर का हिस्सा है। जानते हैं वह एचआर मैनेजर कौन थी? वह मुस्लिम थी और इस पूरे कांड की मास्टर माइंड बताई जा रही है। अब वह फरार है। कुछ लोग कह रहे हैं कि टीसीएस का नासिक का दफ्तर मिनी पाकिस्तान बन गया था। एक महिला कर्मचारी के कारण यह मामला सामने आया। जींस-शर्ट पहनने वाली वह कर्मचारी अचानक सलवार कुर्ता पहनने लगी। वह रमजान के दिनों में रोजा रखने लगी। घर वालों को शक हुआ और उन्होंने पूछा तब उसने बताया कि ऐसा-ऐसा दफ्तर में हो रहा है।
घरवाले बेटी को लेकर थाने गए और एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन अब पुलिस को दूसरा डर था कि टीसीएस देश की इतनी बड़ी कंपनी है,अगर मामला झूठा निकला या फिर शिकायतकर्ता ने शिकायत वापस ले ली तब क्या होगा? तब तो पूरी महाराष्ट्र पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के सामने संकट आ जाएगा। उस स्थिति में पूरी सेकुलर ब्रिगेड नासिक पहुंच जाती और आरोप लगाया जाता कि भाजपा के राज में मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। विक्टिम कार्ड खेलना वैसे भी इन सेकुलर लोगों का पुराना शगल है। अब यहां पर आपको महाराष्ट्र पुलिस की प्रशंसा करनी चाहिए। उसने सोचा कि जब तक हम आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं जुटा लेते तब तक एक्शन लेना समझदारी की बात नहीं होगी। पुलिस ने पूरे महाराष्ट्र ऐसी सात युवा महिला पुलिस कर्मचारियों का चयन किया, जो अंग्रेजी बोल सकती थीं और जिनको कंप्यूटर की जानकारी है। उनको टीसीएस में नौकरी के लिए अप्लाई करवाया। टीसीएस में जो गैंग काम कर रहा था उसे लगा कि सात नए शिकार मिल गए हैं। मेरा तो मानना है कि ये सात धुरंधर देवियां हैं। धुरंधर ने जो काम पूरे पाकिस्तानी सिस्टम में घुसकर किया,वही काम इन्होंने टीसीएस के तथाकथित पाकिस्तानी सिस्टम में घुसकर किया। 40 सीसीटीवी कैमरों से गैंग के लोगों की फुटेज इकट्ठा की। उत्पीड़न करने वालों के फोन इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर रखे गए। सारे प्रमाण इकट्ठा करने के बाद नौ एफआईआर दर्ज की गईं हैं और छह लोग गिरफ्तार हो गए हैं। जो महिला एचआर मैनेजर मास्टरमाइंड कही जा रही है वह रहने वाली नासिक की ही है, लेकिन कुछ समय पहले उसने अपना ट्रांसफर बेंगलुरु करा लिया था।
अब सवाल यह है कि बेंगलुरु में बैठे टीसीएस के जो आला अधिकारी हैं, क्या उनको कोई जानकारी नहीं थी? तीन-चार साल से यह रैकेट चल रहा था और शिकायतें भी आ रही थीं, इसके बावजूद कोई एक्शन नहीं हुआ। अभी कंपनी की ओर से जो बयान आया है, उसमें धर्म परिवर्तन की बात नहीं कही गई है। यह भी नहीं कहा गया है कि सेक्सुअल हैरेसमेंट हुआ। सवाल यह है कि अगर टीसीएस जैसी कंपनी में यह हो रहा है तो देश में और दूसरी जो कॉर्पोरेट कंपनियां हैं उनमें क्या हो रहा होगा? जिन कंपनियों में दूसरे या तीसरे टियर के शहरों की लड़कियां काम करती हैं, जो अक्सर अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा पाती हैं, वहां क्या हो रहा है। अगर महाराष्ट्र पुलिस ने इस समझदारी के साथ यह एक्शन न लिया होता तो इस मामले के बारे में भी हमको आपको कुछ पता नहीं चलता। विक्टिम कार्ड खेलने के लिए पहले यह धारणा बनाई जाती थी कि गरीब मुसलमान पर अत्याचार होता है तो वह हथियार उठा लेता है। जो यह बात करते हैं, उनमें से कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि साढ़े चार लाख कश्मीरी हिंदू कश्मीर से निकाल दिए गए,मार दिए गए,घर जला दिए गए,महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ फिर भी कोई कश्मीरी हिंदू है,जिसने हथियार उठाया हो।
टीसीएस में जो हो रहा था दरअसल वह गजवा-ए हिंद योजना का हिस्सा है। अलग-अलग शहरों में अलग-अलग स्तर पर यह चल रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के इतने बड़े कांड का भंडाफोड़ हुआ। यह रुक नहीं रहा है। उसका कारण है कि इनको लगता है कि हमको बचाने वाले बहुत हैं। पूरा लेफ्ट इको सिस्टम है और यह सब भी न बचा पाए तो अदालत में ऐसे न्यायाधीशों की कमी नहीं है जो इनके प्रति सहानुभूति रखते हैं। तो जब तक हम आप नहीं जागेंगे, इस संकट को नहीं समझेंगे और ऐसे लोगों को यह नहीं जताएंगे कि हम आपकी चालबाजी को समझ रहे हैं और उसके विरोध में हैं, तब तक इसकी रफ्तार रुकने वाली नहीं है। अगर महाराष्ट्र पुलिस ने इन सात धुरंधर देवियों के दम पर इस रैकेट के प्रमाण न जुटाए होते तो अब तक आप देखते कि किस तरह से विक्टिम कार्ड खेला जाता। इस खतरनाक खेल को समझिए। इसको रोकने के लिए सिर्फ सरकार के आश्रय मत रहिए। खतरा आखिर में हमारे आपके परिवार पर आने वाला है। भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखना है तो इस अत्याचार, इस आतंकवाद और इस जिहाद के खिलाफ आवाज उठाना बहुत जरूरी है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)