सीमा चतुर्वेदी।
16 अप्रैल 2026 यानी दो दिन बाद संसद में शुरू हो रहे संसद सत्र के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा शुरू हो रही है, दूसरी तरफ अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं के राजनीति में प्रवेश की चर्चाएं भी होने लगी हैं। उत्तर प्रदेश में लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के भाजपा में शामिल होने की चर्चा भी एक बार फिर छिड़ गई है।
कला संगीत की विभिन्न विधाओं का धनी उत्तर प्रदेश बहुरंगी लोक संगीत की बगिया भी है। मालिनी अवस्थी उर्फ “मालन अलबेली” इस बगिया की मालन जैसी हैं। एक बार फिर चर्चाएं हैं कि मालिनी राजनीति में आएंगी और लोकसंगीत की बगिया की मालन की संगीत साधना बाधित होगी ! इस प्रसिद्ध महिला कलाकार के राजनीति में आने की चर्चाएं गलत साबित हों या सही ये अलग बात है पर ये सच है कि सक्रिय राजनीति में आने वाला प्रत्येक कलाकार अपनी कला में सक्रिय नहीं रह सका। इसमें चाहे रवि किशन हो, मनोज तिवारी या मैथिली ठाकुर।
एक बेटी के विवाह उपरांत विदाई की तरह कला क्षेत्र की किसी हस्ती की राजनीति में एंट्री खुशी और ग़म दोनो देती है। खुशी इस बात की कि कलाकार राजनीति में आकर कला के क्षेत्र को आगे बढ़ाएगा, ग़म इस बात का कि राजनीति में आने के बाद कलाकार की कला साधना बाधित होगी।
संसद और विधानसभाओं में एक तिहाई महिलाओं के आरक्षण का कोटा पूरा करने के लिए विभिन्न दल प्रयासरत हैं। दलों में महिला कार्यकर्ताओं की कमी नहीं पर लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने लायक लोकप्रिय महिलाओं की तलाश में दल अलग-अलग क्षेत्रों/पेशों की चर्चित महिलाओं को पार्टी में शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई महिलाओं की सीट आरक्षित होने का बहुप्रतीक्षित कानून पास होने के बाद से राजनीतिक दल अपने अपने दलों में महिलाओं को जोड़ने पर जोर दे रहे हैं। 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे संसद सत्र के विशेष सत्र में ये कानून चर्चा का विषय रहेगा। भाजपा महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान चला रही है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौरखपुर में एक कार्यक्रम में सांसद रवि किशन को चुटकी लेते हुए कहा था कि हो सकता है कि गोरखपुर से अगला लोकसभा चुनाव रवि किशन की जगह कोई महिला चुनाव लड़े !
लखनऊ में आकाशवाणी के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मालिनी अवस्थी को सम्मानित करते हुए उनकी प्रशंसा की। एक सफल पुरुष की सफलता में महिला का हाथ होता है, कहावत को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मालिनी ना सिर्फ कला क्षेत्र में सफल हैं बल्कि लोकसेवा में सराहनीय पारी खेलने वाले अवनीश अवस्थी की सफलता में उनकी पत्नी मालिनी का योगदान रहा होगा। बता दें कि अवनीश अवस्थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी अफसर रहे हैं और सेवानिवृत्त होने के बाद मुख्यमंत्री के सलाहकार हैं।
2024 लोकसभा चुनाव से पूर्व चर्चा थी की लोक गायिका और नौकरशाह अवनीश अवस्थी की पत्नी मालिनी अवस्थी को भाजपा चुनाव लड़वा सकती है। मुख्यमंत्री के कुछ बयानों के बाद एक बार फिर ऐसी चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।
कला साधक मालिनी अवस्थी पर उनके नाम और जन्म स्थल का असर दिखता है। मालिनी का अर्थ है-माला पहनने वाली।प्रशंसाओं,आलोचनाओं और चर्चाओं की मालाएं धारण किए मालिनी की जन्म स्थली सुगंध नगरी कन्नौज है। उनकी शख्सियत संगीत की हर खुश्बू से महकती है। साधना, संघर्ष और समर्पण से गायिकी की हर विधा की साधना करने वाली पद्मश्री मालिनी की सक्रियता और प्रशंसा मीडिया की सुर्खियां में बनी रहती है तो सोशल मीडिया और कला क्षेत्रों में इनकी आलोचना की कानाफूसी भी खूब होती है। कहां जाता है कि इनके पति लम्बे समय तक प्रभावशाली नौकरशाह रहे,सेवानिवृत्त होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार बन गए, इसलिए कला संस्कृति से संबंधित सरकारी विभाग मालिनी पर मेहरबान रहते हैं।आरोप लगते हैं कि पति का प्रभाव पत्नी को सरकारी कार्यक्रम दिला देता है। यूपी के तमाम प्रतिभाशाली कलाकारों को भुलाकर सांस्कृतिक कार्य विभाग मालिनी अवस्थी के दामन में हर बड़ा कार्यक्रम डाल देता है।
भारतेंदु नाट्य स्वर्ण जयंती समारोह में संगीत और रंगमंचीय प्रस्तुति ‘मालन अलबेली’ में मालिनी अवस्थी छा गई। प्रशंसाओं की गूंज में आलोचनाएं भी मुखर हुईं। शहर के कला समीक्षक राजवीर रतन सोशल मीडिया पर लिखते हैं-
“ऐसी कैसी मालन अलबेली! वो भूल गईं कमला श्रीवास्तव को, वो भूल गईं पद्मश्री विद्या विंदु सिंह को सब समय समय की बात है”।
हांलांकि ऐसी आलोचनाएं और सवाल हर बड़े कलाकार पर लगते रहे हैं लेकिन इस तरह के आरोप कभी सिद्ध नहीं हो सके। बड़े कलाकारों के कारण नये कलाकारों को अवसर नहीं मिलते! दिवंगत आशा भोसले और लता मंगेशकर तक पर ऐसे इल्जाम लगे। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख,सलमान और आमिर खान भी आरोपों और आलोचनाओं से बच नहीं सके।
आलोचनाएं और आरोप सही हैं या ग़लत हैं ये अलग विषय है पर ये सच है कि मालिनी का पूरा जीवन कला साधना को समर्पित रहा है।
इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा शास्त्री संगीत प्रशिक्षण रामपुर घराने के उस्ताद शुजात हुसैन खान और गोरखपुर के उस्ताद राहत अली खान से ली। बनारस घराने की विख्यात शास्त्री गायिका गिरिजा देवी से ठुमरी की तालीम हासिल की।
लोकगायक बालेश्वर की खास शैली रई रई … की विरासत को भी अपने की कोशिश की।
उप शास्त्री संगीत की गायिकी के साथ मालिनी लोक गायिकी की अवधि, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली पर महारत हासिल किए हैं। अवधि लोकगायिका के तौर पर वो अधिक लोकप्रिय हैं।
बता दें कि अन्य कलाओं की अपेक्षा अवधि कलाकारों को पिछली हुकुमतों और सियासत में कम सम्मान मिला है। जबकि देश की सियासत में राम जन्म की पवित्र अयोध्या भूमि वाले अवध का सबसे विशेष महत्व है। और भाजपा के देश का सबसे महत्वपूर्ण सूबा यूपी है और यूपी का सबसे पवित्र भूभाग अवध है। अपनी अवधि लोकगायकी से राम जन्मभूमि अवध की पवित्रता को संगीत के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने वाली मालिनी अवस्थी को भाजपा विधानसभा या लोकसभा भेजने का प्रयास करें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।



