25 गुना बढ़ी सीटें
सर्वे में लोकसभा चुनाव को लेकर लोगों से सवाल किया गया। इसके मुताबिक बिहार में यूपीए को 25 सीटें मिल रही हैं। लोकसभा सीटों के हिसाब से महत्वपूर्ण राज्य बिहार में पिछले चुनाव में यूपीए का सूपड़ा साफ हो गया था। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं लेकिन 2019 के चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की झोली में 39 सीटें गिरी थी, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को सिर्फ एक सीट मिली थी।
केमिस्ट्री बदली तो बदल गया गणित
5 साल में यूपीए की सीट बढ़ने के पीछे क्या करिश्मा है, इसे जानने के लिए पिछले चुनाव और इस बार के बीच बिहार के बदलते राजनीतिक समीकरण को देखना जरूरी होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू भी एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। तब चुनाव में राज्य में प्रचंड लहर देखी गई थी और 40 लोकसभा सीट में से 39 एनडीए को गई थी। अब जेडीयू महागठबंधन का हिस्सा है और इसका असर चुनाव पर भी पड़ता दिखाई देने लगा है।

वोट प्रतिशत में भी उछाल
सर्वे में यूपीए के वोट प्रतिशत में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। सर्वे के मुताबिक बिहार में यूपीए को 47 प्रतिशत वोट मिलता दिखाई दे रहा है। छह महीने पहले अगस्त 2022 में भी सी वोटर ने ऐसा ही सर्वे किया था। तब यूपीए को महज 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया था और शून्य सीट मिल रही थी।
वोट प्रतिशत बढ़ने का असर सीटों पर भी दिखा है। जनवरी 2023 के सर्वे में कांग्रेस के गठबंधन की लोकसभा सीटें 2019 में एक के मुकाबले बढ़कर 25 हो गई हैं। छह महीने में 25 सीटों की बढ़त कांग्रेस के लिए बड़ी खुशखबरी है।
देश में किसकी बनेगी सरकार?
सर्वे में देश में एक बार फिर से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार बनती बताई गई है। हालांकि, सीटों में कमी आई है। एनडीए को 298 सीट मिलती दिखाई गई हैं। इसमें बीजेपी को 284 सीट, जबकि 14 सीटें सहयोगियों को मिलने का अनुमान लगाया गया है।
सीटों के आंकड़े देखें तो एनडीए को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। 2019 में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ने 353 सीटें जीती थीं। एनडीए की सीटों में गिरावट बीजेपी की टेंशन बढ़ाने वाली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए़ को 153 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। यूपीए को 30 फीसदी वोट मिलते दिखाए गए हैं। 2019 में यूपीए को 91 सीट मिली थी। (एएमएपी)



