भारत को अस्थिर करने की विदेशी साजिशें जारी।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
दुनिया के सभी बड़े देशों में एक डीप स्टेट होता है। इनमें अमेरिका का डीप स्टेट सबसे ताकतवर है। उसकी ताकत अमेरिकी प्रशासन से भी ज्यादा है और वह तय करता है कि देश कैसे चलेगा, देश की नीतियां कैसे तय होंगी और अंतरराष्ट्रीय संबंध कैसे होंगे। इसमें पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व सुरक्षा सलाहकार या आर्मी चीफ, खुफिया एजेंसियों के पूर्व चीफ, कॉरपोरेट्स और उसके अलावा फार्मा एवं आर्म्स लॉबी के लोग शामिल होते हैं। ये लोग यह भी तय करते हैं कि किस देश में कौन सी सरकार चलनी चाहिए और कौन सी नहीं। कौन सा नेता जिंदा रहे और कौन नहीं।
कहते हैं कि डीप स्टेट ने ही अमेरिका के राष्ट्रपति कैनेडी की हत्या करवाई थी। इसके अलावा बाकी देशों की बात छोड़ दें तो भारत में ही कई ऐसे लोगों की मौत हुई, जिनका रहस्य आज तक खुला नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत हुई। उसके बाद पता नहीं चला कि किन कारणों से हुई। हमारे परमाणु कार्यक्रम के सबसे बड़े साइंटिस्ट डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा, जिन्होंने घोषणा की थी कि हम कुछ महीनों में परमाणु बम बना सकते हैं, की मौत एक हवाई दुर्घटना में हो जाती है। भारत का पूरा स्पेस प्रोग्राम बनाने वाले डॉक्टर विक्रम साराभाई की तमिलनाडु के एक होटल में मौत हो जाती है। कहा जाता है कि मौत हार्ट अटैक से हुई लेकिन उसकी कोई जांच नहीं कराई जाती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या हुई। कहने को तो हत्यारे पकड़े गए, लेकिन वे मोहरे थे। उनके पीछे कौन था, ये आज तक पता नहीं चला। डीप स्टेट केवल एलिमिनेशन का काम नहीं करता है,वह यह भी तय करता है कि किस देश में कौन सा नेता उभरे और देश की बागडोर संभाले।
भारत में पिछले कुछ सालों में जिन परिस्थितियों और जिस तरह के सपोर्ट सिस्टम से कुछ नेता बढ़े, उससे इस बात की आशंका बढ़ती है कि इसके पीछे कोई न कोई बड़ी ताकत है। इनमें सबसे पहला नाम आता है अरविंद केजरीवाल का। एक अलग तरह की राजनीति और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की लहर पर सवार होकर वह आए कि पूरे देश की राजनीति और समाज को बदल देंगे। उन्हें कट्टर ईमानदार व्यक्ति बताया गया। समय बीता और पता चला कि जो कट्टर ईमानदार की मूर्ति बनाई गई थी,उसके पीछे कट्टर बेईमान का चेहरा निकला। किन-किन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की मदद की, अब यह बताने की जरूरत नहीं है। शराब घोटाले में जेल जाने और दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार से अरविंद केजरीवाल नाम का मोहरा फ्लॉप हो गया। जो लोग केजरीवाल को अपना प्रोजेक्ट समझकर आगे बढ़ा रहे थे अब उन्होंने हाथ खींच लिए हैं।

केजरीवाल के अलावा राहुल गांधी को भी आगे लाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले खड़ा करने की तमाम कोशिशें हुईं। कई फर्जी मुद्दे उनसे उछलवाए गए। चाहे वह पेगसस का मामला हो या राफेल या हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का। कई मुद्दे राहुल गांधी को थमाए गए ताकि वह देश में अपनी छवि बना सकें और नरेंद्र मोदी को पीछे धकेल सकें। लेकिन राहुल गांधी चुनावी हार की सेंचुरी बनाने के करीब पहुंच गए हैं। राहुल को बार-बार री-लांच किया गया,लेकिन वह लांच हुए नहीं। हालांकि राहुल गांधी से अभी उम्मीद छोड़ी नहीं गई है। उसकी वजह है कि राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं और कांग्रेस देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। अगर बीजेपी के मुकाबले कोई पार्टी भारत में खड़ी हो सकती है तो वह कांग्रेस ही है। इसलिए प्रोजेक्ट राहुल गांधी अभी बंद नहीं हुआ है। हालांकि राहुल गांधी अब धीरे-धीरे एक्सपोज हो रहे हैं। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया है। वह 10 साल में अपनी आमदनी 11 करोड़ बताते हैं और उनकी विदेश यात्राओं पर अनुमानित खर्च 60 करोड़ हुआ है। तो यह पैसा कहां से आया? उसके अलावा हाईकोर्ट में उनकी नागरिकता का भी मामला चल रहा है। होम मिनिस्ट्री ने इसके बारे में हाईकोर्ट में कुछ दस्तावेज दिए हैं, वे क्या हैं किसी को मालूम नहीं है। राहुल के खिलाफ कई मामलों में जांच और मुकदमे चल रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी पर इस सब का असर नहीं पड़ता क्योंकि उनको मालूम है अगर कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाना चाहती हैं तो उसके लिए एकमात्र विकल्प कांग्रेस है और कांग्रेस पार्टी का एकमात्र नेता राहुल गांधी हैं। इसलिए राहुल गांधी को लगता है कि उनके लिए गुंजाइश अभी बाकी है। तो राहुल गांधी वह मोहरा हैं,जो पिटने के बाद भी सर्कुलेशन में बने हुए हैं और कुछ समय तक बने रहेंगे। दूसरी ओर सरकार ने अब तय किया है कि राहुल के इर्दगिर्द घेरा कसना है। वह नेशनल हेराल्ड के घोटाले में पहले से ही फंसे हुए हैं। इस मामले में वह और उनकी मां सोनिया गांधी दोनों जमानत पर हैं। वह केस कब फिर से तेज हो जाएगा किसी को मालूम नहीं है। फिर जिस तरह से एक के बाद एक चुनाव कांग्रेस पार्टी हार रही है तो ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस और राहुल गांधी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं।

डीप स्टेट या विदेशी ताकतों का तीसरा मोहरा ममता बनर्जी थीं। पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा ने एक टेलीविजन चैनल पर इंटरव्यू में  खुलासा किया कि उनको बांग्लादेश के किसी डिप्लोमेट ने बताया कि यूनुस सरकार की योजना थी कि बांग्लादेश व पश्चिम बंगाल को मिलाकर एक नया देश बनाया जाए और ममता बनर्जी उसकी प्रधानमंत्री बनें। आपको मालूम है कि बांग्लादेश की यूनुस सरकार अमेरिका के डीप स्टेट का ही क्रिएशन थी। उसने यूनुस को पहले नोबेल प्राइज दिलवाकर उनका स्टेटस बढ़वाया फिर शेख हसीना का तख्ता पलट करवाकर उनकी जगह यूनुस को बिठवा दिया। यूनुस के समय बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जमकर हिंसा हुई लेकिन उसकी एक बार भी निंदा अमेरिकी प्रशासन ने नहीं की। हाल के दिनों में बांग्लादेश की पाकिस्तान के साथ जुगलबंदी तेजी से बढ़ी है। सबसे ताजा खबर ये है कि बांग्लादेश के जो सिविल सर्वेंट्स ट्रेनिंग के लिए भारत के मसूरी आते थे, पहली बार उनको पाकिस्तान भेजा गया है। बांग्लादेश वह सब भूल गया है कि पाकिस्तान ने ही उसका सबसे ज्यादा दमन किया। भारत ने ही उसे स्वतंत्र देश बनवाया। ममता बनर्जी जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही थीं और अदालत के आदेश के बावजूद उन्होंने बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन नहीं दी,वह कई सवाल खड़े करता है। वह भारत को तोड़ने की दिशा में भी बढ़ सकती थीं, ऐसे संकेत मिल रहे हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से यह तीसरा मोहरा भी पिट गया है। अब उनके और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू होने वाली हैं।
डीप स्टेट ने अब जिस चौथे मोहरे पर दांव लगाया है,उसका नाम है जोजेफ विजय चंद्रशेखर। वह क्रिश्चियन हैं और हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने हैं। वह क्रिश्चियनिटी को आगे बढ़ाने के सारे संकेत दे रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वह चर्च गए और क्रिश्चियनिटी के जो रिचुअल हैं, उनको निभाया। पूरी दुनिया को उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह से चर्च के साथ हैं। आमतौर पर राजनेता ऐसी चीजों से बचते हैं,खासकर वहां जहां पर वह खुद जिस समाज से आते हैं उसका बहुमत न हो। तमिलनाडु में 85% से ज्यादा आबादी हिंदू हैं। मुश्किल से 6% क्रिश्चियन हैं। उस समाज से मुख्यमंत्री बनता है और वह इस बात को छिपाता नहीं कि वह क्रिश्चियनिटी को आगे बढ़ाना चाहता है। उसका एक विधायक कहता है कि हम डीएमके की इस बात से सहमत हैं कि सनातन को समूल नष्ट कर देना चाहिए। डीप स्टेट का यह चौथा मोहरा सनातन, हिंदुत्व, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबके खिलाफ काम करने के लिए तैयार हैं। लेकिन वह सफल हो पाएंगे, इसमें मुझे भारी शंका है क्योंकि एक तो उनको चुनाव में बहुमत नहीं मिला है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उनकी सरकार 5 साल चले। इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है कि तमिलनाडु में विधानसभा के मध्यावधि चुनाव हों।
तो ममता बनर्जी चली गईं, अरविंद केजरीवाल चले गए, राहुल गांधी लगातार मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं, अब मोहरे के रूप में बचे हैं जोसेफ विजय चंद्रशेखर। वह कब तक चलेंगे यह देखने की बात है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर विजय नाम का मोहरा भी पिट गया तो जो विदेशी ताकतें हैं वे चुपचाप बैठ जाएंगी। भारत के अंग्रेजी मीडिया का एक बड़ा सेक्शन चीन का एजेंडा चला रहा है। गलवान मामले के बाद से चीन भारत के खिलाफ पूरी दुनिया में अभियान और नैरेटिव चला रहा है। तो नया खेल अब अमेरिका के बजाय चीन से होगा। ट्रंप भी जिस तरह से भारत के दो दुश्मन देशों पाकिस्तान और चीन की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं,उससे आप समझिए भविष्य का संकेत क्या है? भारत में तख्ता पलटने की चाहत रखने वाले देश के बाहर ही नहीं, अंदर भी हैं। राहुल गांधी से लेकर तमाम विपक्षी नेता जेन जी से सड़क पर उतरने का आह्वान करते हैं, लेकिन इस देश की जनता बहुत समझदार है और वह जानती है कि उसका भला और बुरा क्या है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)