“स्वामी कालिकानंद सरस्वती और पं. ओंकारनाथ शास्त्री ने किया आध्यात्मिक शंखनाद”
नई दिल्ली स्थित Press Club of India में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में ‘कश्मीर दशार कुंभ 2026’ के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की गई। यह भव्य आयोजन 15 जुलाई से 24 जुलाई 2026 स्वामी कालिकानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में तथा प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ओंकारनाथ शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न होगा।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सेवा समर्पण सनातनी फाउंडेशन, स्वदेशी सनातन संघ – भारत, प्रेमनाथ शास्त्री सांस्कृतिक शोध संस्थान और शादीपोरा समिति ने संयुक्त रूप से पहल की है। सभी संस्थाएं मिलकर इस प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कार्य कर रही हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वामी कालिकानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को पुनर्स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि “ईश्वर एक है” का संदेश पूरे विश्व तक पहुंचाना इस महोत्सव का मूल लक्ष्य है। उन्होंने इसे वर्ष 2030 में प्रस्तावित महाकुंभ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

दुर्लभ ज्योतिषीय योग पर जोर
मुख्य वक्ता पंडित ओंकारनाथ शास्त्री ने ‘दशार कुंभ’ के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ‘दशार’ का अर्थ दस विशेष खगोलीय योगों का संयोग है। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जब विशेष ग्रहों का संरेखण होता है, तब झेलम (वितस्ता) और सिंधु का संगम ‘प्रयाग’ के समान फलदायी हो जाता है।
उन्होंने बताया कि लगभग 75 वर्षों के अंतराल के बाद यह दुर्लभ अवसर कश्मीर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगा। साथ ही, यह आयोजन कश्मीर की प्राचीन खगोलीय गणना और आध्यात्मिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी है।
इस महोत्सव को दो भागों में विभाजित किया जाएगा
धार्मिक आयोजन: सनातन परंपराओं के अनुष्ठान
सांस्कृतिक आयोजन: कश्मीरियत और स्थानीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार
आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर तैयारियों में जुट चुके हैं। आयोजकों का मानना है कि यह महोत्सव कश्मीर को एक बार फिर से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



