भारतीय आईटी कंपनियों पर कार्रवाई के बाद मस्क के जरिए दबाव बनाने की कोशिश।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सारे हथकंडे अपना लिए,लेकिन वह भारत को झुका नहीं पाए। उनको समझ में आ गया है कि भारत ट्रेड डील अमेरिका की नहीं, अपनी ही शर्तों पर करेगा। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बयान दिया है कि अमेरिका से ट्रेड डील गतिरोध की स्थिति में आ गई है। न तो हम उनसे कोई नई रियायत ले सकते हैं और न उनको कोई नई रियायत देने को तैयार हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर के समय से लगातार भारत पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कम से कम 100 बार बोला होगा कि मैंने भारत—पाकिस्तान युद्ध रुकवा दिया, जबकि भारत ने बार-बार उनको झूठा साबित किया। बाद में पूरी दुनिया को पता चल गया कि पाकिस्तान ने सरेंडर किया, लेकिन यह बात डोनाल्ड ट्रंप के ईगो को बहुत ज्यादा घायल कर गई। उनको लगा था कि ट्रेड डील पर वह भारत को दबाकर भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुलवा लेंगे,लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उन्होंने अपने चुनाव के समय अमेरिकी कृषि उत्पाद वाली कंपनियों से वादा किया था कि उनके बिजनेस को बहुत बढ़ा देंगे क्योंकि उन्होंने उनको बड़ा चंदा दिया था। उन्होंने भारत पर इस बात के लिए भी दबाव डाला कि वह रूस से तेल न खरीदे, लेकिन भारत बार-बार कहता रहा कि हम अपनी ऊर्जा जरूरत के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगे। तो ट्रंप ने पहले भारात पर 50% टैरिफ लगाया। उसके बाद रूस की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। अब वह एक नया बिल लेकर आए हैं कि जो देश रूस से तेल खरीदता है उस पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन भारत उस डर के दौर से बाहर निकल गया है कि अमेरिका की धमकी से डर जाएगा। ट्रंप जब दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपाति बने थे तो दावा किया था कि एक सप्ताह में रूस—यूक्रेन का युद्ध रुकवा देंगे,लेकिन उनको राष्ट्रपति बने ढाई साल से ज्यादा हो गए युद्ध जारी है और उनके जले पर नमक यह कि रूस और यूक्रेन कह रहे हैं कि भारत इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। दोनों देश उसकी मध्यस्थता को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा कोई नहीं हुई है। उसके अलावा ईरान पर हमला कर भी ट्रंप ने अमेरिकी इकॉनमी की हालत खराब कर ली। ईरान खुद तो बर्बाद हो गया है, लेकिन लेकिन उसने अमेरिका को जीतने नहीं दिया, यह भी बात सही है।
तो अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को लगातार हार मिल रही है। अब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कई भारतीय कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन प्रोग्राम से प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें टीसीएस,इंफोसिस,एचसीएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन पर आरोप लगाया जा रहा कि ये अमेरिकियों को नौकरी से निकाल रही हैं और उनकी जगह पर विदेशियों खासकर एच1बी वीजाधारकों को नौकरी दे रही हैं। सवाल है कि इसकी कोई जांच हुई है क्या? प्रोसीजर यह है कि पहले आप जांच करिए और जब यह साबित हो जाए तो आप कार्रवाई कीजिए, लेकिन यहां उल्टी प्रक्रिया अपनाई गई। पहले कार्रवाई कर दी अब आगे जांच करेंगे कि नहीं, कुछ पता नहीं है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ने वाला है, लेकिन ट्रंप प्रशासन इस बात को समझ नहीं रहा कि सामान्य माइग्रेंट और हाईली स्किल्ड इंजीनियर्स और टेक्नशियंस में फर्क होता है। ये लोग अमेरिका की इकॉनमी को बढ़ाने में सहायक हो रहे हैं। अमेरिका के पास ऐसे कुशल और प्रोफेशनल लोग उतने नहीं हैं, जितने अमेरिका को चाहिए और भारतीयों का इसमें कोई जवाब नहीं है। इसीलिए आप देख लीजिए कि कितनी अमेरिकन कंपनियों के चीफ भारतीय हैं। लेकिन जब मामला ईगो का हो तो तर्क, तथ्य और सच्चाई दिखाई नहीं देती है। इन कंपनियों पर कार्रवाई सिर्फ इसलिए की गई ताकि भारत ट्रेड डील में रियायत देने को तैयार हो जाए।
इसी बीच एलन मस्क के जरिए भी अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। मस्क ने आरोप लगाया है कि भारत में कुछ बड़े घराने उनकी स्टारलिंक कंपनी, जो सेटेलाइट बेस्ड इंटरनेट कनेक्शन देती है,को भारत में आने नहीं दे रहे। मस्क भारत सरकार के खिलाफ बोल रहा है और विडंबना देखिए कि कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी उसके पक्ष में बोल रहे हैं। सवाल यह है कि जितने लोग भारत और भारतीय हितों के खिलाफ हैं, उन सबके पक्ष में कांग्रेस खड़ी क्यों नजर आती है? दूसरी बात, एलन मस्क का स्टारलिंक बहुत महंगा है। वह जो दावा करते हैं कि भारत के ग्रामीण लोगों को सस्ता इंटरनेट देंगे,इससे बड़ी बकवास कोई नहीं हो सकती। उनको भारत के गरीबों की नहीं, अपने बिजनेस की चिंता है और भारत सरकार को अपने लोगों की चिंता है। स्टारलिंक का भारत आना देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। स्टारलिंक ने ईरान युद्ध और रूस—यूक्रेन संघर्ष में राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक नियंत्रण से जुड़े बड़े खतरे पैदा किए। मान लीजिए कि भारत—पाकिस्तान या भारत—चीन युद्ध हो जाए तो उस समय भारत सरकार इंटरनेट बंद करना चाहे तो ये बंद नहीं होने देंगे क्योंकि ये सेटेलाइट से है, ऑप्टिक फाइबर के जरिए नहीं। ये भारत में आने के लिए बेचैन इसलिए हैं कि भारत की राजनीति और स्ट्रेटेजिक रणनीति को प्रभावित कर सकें। यहां इनका आना खतरे का संकेत है। पहली बात तो मस्क झूठ ये बोल रहे हैं कि भारत सरकार ने तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया है, जिसमें उनकी भी कंपनी है। भारत सरकार ने कहा है कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी की मोनोपोली के पक्ष में नहीं है। एलन मस्क यहां अपनी मोनोपोली स्थापित करना चाहते हैं। दूसरा, एलन मस्क की कंपनी लाइसेंस न मिलने के बावजूद मणिपुर में अपने इक्विपमेंट लगाने के मामले में पकड़ी गई है। पकड़े जाने पर उन्होंने कहा कि हमने सिग्नल बंद कर दिए,लेकिन यहां भी झूठ पकड़ा गया क्योंकि सिग्नल बंद नहीं किए गए। मणिपुर में अमेरिका क्या चाहता है, सबको पता है। अमेरिका चाहता है कि मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट का एक हिस्सा, बांग्लादेश का एक हिस्सा और म्यांमार का एक हिस्सा मिलाकर एक नया क्रिश्चियन देश बनाया जाए। इसके लिए बड़े पैमाने पर सीआईए का ऑपरेशन चल रहा है।
अब आप टाइमिंग देखिए। भारतीय आईटी कंपनियों पर कार्रवाई की घोषणा तब हुई जब भारत यात्रा पर आए अमेरिका के पैसिफिक फोर्सेस के कमांडर लौटकर अमेरिका पहुंचे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क में हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका का नाम लेते हुए कहा कि वह भारत की आतंकवाद की समस्या को समझने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका भारत की किसी चिंता, चाहे वह एनर्जी की हो, आतंकवाद की हो या टेक्नोलॉजी की हो, को समझने को तैयार नहीं है, लेकिन अपने लिए हर तरह की छूट चाहता है। भारत ने साफ कर दिया है कि ऐसा नहीं होगा। तो अभी अमेरिका ने भारत विरोधी जो कदम उठाए हैं,आप बिल्कुल इत्मीनान रखिए आगे और कदम उठाएगा। लेकिन भारत ने सीधा सा संदेश दे दिया है कि वह दिन गए, जब भारत अमेरिका के इशारे पर चलता था। अब ये नया भारत है, जो अमेरिका के दबाव में झुकता नहीं है। ये तन कर खड़ा होता है और अपनी ताकत पर विश्वास करता है। अमेरिका के साथ जो गुड—गुड रिलेशंस का दौर था,वह खत्म हो रहा है। अब भारत को कुछ कड़े निर्णय लेने पड़ेंगे। अमेरिका वैसे ही पूरी दुनिया में आइसोलेट हो रहा है। ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका का तो नहीं, लेकिन भारत का फायदा जरूर होगा। जितना दबाव अमेरिका भारत पर डालेगा उतना ही भारत आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप भारत की आर्थिक प्रगति को रोक नहीं सकते।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)