भारत की इकॉनमी डेड बताने वाले देश से मांगेंगे माफी!
कुछ समय पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की इकॉनमी को डेड बताया था। इसके बाद राहुल गांधी ने तुरंत कहा कि देखिए ट्रंप साहब कह रहे हैं कि भारत की इकॉनमी डेड है। यह बात केवल प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को नहीं पता है,बाकी पूरी दुनिया को पता है। अब लेटेस्ट फिगर आई है। वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ रही है। यह आरबीआई ने जो आकलन किया था, उससे भी ज्यादा है। इसको ब्लॉकबस्टर ग्रोथ रेट कहा जा सकता है।
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ में सभी सेक्टर्स का योगदान है। मैन्युफैक्चरिंग को हमारा सबसे कमजोर सेक्टर माना जाता था। वही सबसे ज्यादा जॉब भी क्रिएट करता है। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2% है जबकि सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 10.1% है। बीते 10 सालों में देश में हर साल 1 करोड़ 90 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए। यह बिना ग्रोथ के तो हो नहीं सकता। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि शताब्दी की सबसे बड़ी महामारी कोरोना से हम निकले हैं। उसके बाद रूस और यूक्रेन का युद्ध और अब अमेरिका-ईरान युद्ध यानी इन तीन चुनौतियों के बीच भारत की इकॉनमी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। इसके बाद भी अगर आप कहते हैं कि भारत की डेड इकॉनमी है और आर्थिक सुनामी आने वाली है तो पहले आपको माफी मांगनी चाहिए और फिर अपनी मानसिक जांच करानी चाहिए। आप विपक्ष में हैं और सरकार पर आरोप लगाना आपका काम है, लेकिन उसका कोई आधार तो होना चाहिए। राहुल गांधी ने भविष्यवाणी की थी कि भारत की गिरती इकॉनमी को नरेंद्र मोदी संभाल नहीं पाएंगे और भागेंगे। उसके बाद यह सरकार गिर जाएगी। इस तरह की बात जब कोई नेता प्रतिपक्ष बोलता है और कुछ महीने में आंकड़ों के साथ उसकी बात गलत साबित हो जाती है तो पूरी दुनिया देखती है। सबको मालूम है कि भारत की अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति है। अगर अमेरिका और ईरान का युद्ध न हुआ होता तो हम अब तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके होते। अब यह टारगेट खिसक कर 2028 तक चला गया है।
राहुल गांधी लगता है कि शूट एंड स्कूट की कहावत में विश्वास करते हैं- झूठ बोलो और आगे बढ़ जाओ। अगर आप ऐसी अविश्वसनीय बात कहेंगे जो कुछ महीने में ही गलत साबित हो जाए तो इसका मतलब है या तो आपको जमीनी वास्तविकता की कोई जानकारी नहीं है या आप जानकारी रखना ही नहीं चाहते। प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ समिट से 7.8% ग्रोथ रेट की उपलब्धि पर बधाई दी है। यह उपलब्धि केवल किसी सरकार, किसी पार्टी या किसी प्रधानमंत्री की नहीं है। यह इस देश के आम लोगों के परिश्रम की उपलब्धि है। सरकार तो केवल ऐसी परिस्थितियां पैदा करती है जिससे उनको काम करने में आसानी हो। असली परिश्रम तो आम आदमी करता है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को कोई अंदाजा ही नहीं है कि देश में हो क्या रहा है। यह 7.8% की ग्रोथ जनता का दूसरा मैंडेट है। एक मैंडेट तो चुनाव के समय आता है। हम लगभग एक दशक से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था हैं। यह उपलब्धि न तो अमेरिका जैसा ताकतवर देश हासिल कर पाया और न ही चीन। ऐसे में जब आप भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताते हैं तो आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उनकी सरकार पर आरोप नहीं लगा रहे, ये आप इस देश, देश के लोगों के पुरुषार्थ, लोगों के परिश्रम, उनकी मेधा, उनकी उत्पादन क्षमता का अपमान कर रहे हैं। आप पार्टी, सरकार या प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलें, वह एक बात है। लेकिन आप मजदूर, कामगार, देश के नए-नए स्टार्टअप, इनोवेशन में लगे लोगों के खिलाफ बोलेंगे तो कोई देश कैसे बर्दाश्त कर सकता है। यही कारण है कि लगातार तीन बार से कांग्रेस पार्टी केंद्र की सत्ता से बाहर है। यही कारण है कि 1984 के बाद आज तक कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं मिला। यही कारण है कि देश के 28 राज्यों में से आज सिर्फ चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार बची है और वह भी कब तक बची रहेगी किसी को पता नहीं है।
देश में अगर एक करोड़ 90 लाख लोगों को हर साल रोजगार मिल रहा है तो क्या वह बिना ग्रोथ के मिल रहा है। देश में लगभग 60% लोग कृषि पर निर्भर हैं तो क्या ये हो सकता है कि कृषि में किसी को रोजगार ही न मिल रहा हो। कृषि के आर्थिक विकास की बात करते समय कांग्रेस को जरा याद कर लेना चाहिए कि कृषि क्षेत्र की समस्या स्ट्रकचरल है, उसी को दूर करने के लिए तीन कृषि कानून लाए गए थे जिनको आपने वापस करवा दिया। कल्पना कीजिए कि अगर वह कानून वापस न हुए होते तो कृषि के क्षेत्र में कैसा क्रांतिकारी परिवर्तन होता। कृषि को इस समय प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। केवल सरकारी इन्वेस्टमेंट से काम नहीं चलने वाला है। कृषि में डायवर्सिफिकेशन समेत ऐसी तमाम जरूरते हैं जिनके लिए निजी निवेश चाहिए। निजी निवेश तभी आएगा जब आप रिफॉर्म करेंगे और रिफॉर्म को अगर आप रोक देंगे तो यह कैसे हो सकता है? बात केवल अर्थव्यवस्था की नहीं, बात देश के बारे में सोच की है। कांग्रेस पार्टी की समस्या यह है कि वह सरकार की आलोचना करते-करते कब देश की आलोचना करने लगती है, इसका उसको पता ही नहीं चलता या पता चलने पर भी वह सोचती है कि कोई हर्ज नहीं है। भारत तेरे टुकड़े होंगे नारे लगाने वालों के साथ खड़े होने वालों को देश की कहां चिंता होगी? इसी तरह की बात करने वालों के लिए प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से दिमागी नक्सल कहा था। डोनाल्ड ट्रंप ने जब भारत की इकॉनमी को डेड बताया था तो आपको पलट कर ट्रंप से सवाल पूछना चाहिए था कि कैसे भारत की इकॉनमी डेड हो जाएगी? हमारे पास सब कुछ है। प्राकृतिक संसाधन हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी है, जो इनोवेशन का काम कर रही है। आप तो जो भी भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तुरंत उसका समर्थन करने लगते हैं और जब वही व्यक्ति भारत की प्रशंसा करे तो आप कहते हैं कि ये तो मिलाजुला खेल है। जहां इतना रोजगार सृजन हो रहा है, जहां इतनी इकोनमिक एक्टिविटी हो रही हैं, एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, रेलवे का विस्तार हो रहा है, उस देश की इकॉनमी को आप डेड बता रहे हैं। बोलने से पहले कुछ तो सोचना चाहिए। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी जो कर रहे हैं,दरअसल वे अपने लिए गड्ढा खोद रहे हैं। वह और नीचे जाने का प्रयास कर रहे हैं। जनता चाहे भी तो उनको उस गड्ढे से निकाल नहीं पाएगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)












