डॉ. राजेश पाटिल ने बेहद रोचक ढंग से पूरे घटनाक्रम को महाभारत से जोड़ा ।
प्रदीप सिंह।महाभारत आप लोगों में से ज्यादातर ने पढ़ी होगी या कम से कम टेलीविजन पर महाभारत सीरियल तो देखा ही होगा। महाभारत में ही गीता समाहित है। हमारे जीवन के किसी भी पहलू में जो समस्या आती है,उसका हल महाभारत और श्रीमद्भागवत गीता में मौजूद है। वर्तमान की घटना को लेकर महाभारत के संदर्भ में उसकी व्याख्या कम लोग कर पाते हैं। यह एक कला है। एक हैं डॉक्टर राजेश पाटिल। उन्होंने एक्स पर एक कहानी पोस्ट की है। यह कहानी बताती है कि महाभारत के रूप में हमें अपने पूर्वजों का कितना बड़ा वरदान मिला है।
तो अब वर्तमान की उस घटना पर आते हैं। हाल ही में आपने खबर पढ़ी होगी कि हिजबुल्ला का नया चीफ नईम कासिम इजराइल के हमले में मारा गया। यह वास्तविक घटना है। लेकिन इसके पीछे के घटनाक्रम को डॉक्टर पाटिल ने जिस तरह से महाभारत से जोड़ने की कोशिश की है,वह बहुत ही रोचक है। उन्होंने लिखा है कि कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गीता की प्रति भेंट की थी। नेतन्याहू ने जब गीता पढ़ी तब उनको कर्म का असली अर्थ समझ में आया। 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास के लोगों ने त्योहार मनाते कई सौ इजराइलियों की हत्या कर दी,महिलाओं से बलात्कार और उनका अपहरण कर लिया तो इस घटना से नेतन्याहू बहुत दुखी हुए। वह चाहते थे कि इस घटना के लिए जो भी दोषी हैं, उनको कड़ी सजा और पीड़ितो को न्याय मिले। तो उन्होंने एक बार फिर से गीता का अध्ययन किया और महाभारत पर जो भी शोध हुए हैं,उनको पढ़ा। इससे उनको एक बात समझ में आई कि हमास,हिजबुल्ला,हूती और ईरान ये सब कौरव हैं, जिन्होंने धर्म विरुद्ध आचरण किया और इसलिए इनको दंड देना जरूरी है। तो उन्होंने पहले हमास पर हमला कर उसे लगभग खत्म कर दिया। फिर हिजबुल्ला पर आक्रमण किया, जो अभी भी चल रहा है और फिर ईरान में घुसकर खामेनेई और उसके लगभग 50 साथियों को मारा। इजराइल का मानना है कि 7 अक्टूबर 2023 को जो घटना हुई उसके पीछे साजिशकर्ता खामेनेई ही था। लेकिन एक व्यक्ति अब भी बचा हुआ था और वह था हिजबुल्लाह का नया प्रमुख नईम कासिम, किंतु समस्या यह थी कि नईम कासिम बंकर से बाहर निकलता ही नहीं था। वह कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट इस्तेमाल नहीं करता था। मोसाद जैसी प्रभावी इंटेलिजेंस होते हुए भी नईम कासिम का पता इजराइल को नहीं मिल रहा था। डॉक्टर पाटिल कहते हैं कि इसीलिए नेतन्याहू ने अपने आध्यात्मिक गुरु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को युद्ध से पहले इजराइल बुलाया। आपको मालूम है कि युद्ध से दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल की यात्रा पर गए थे,हालांकि उसके बहुत सारे कारण थे। लेकिन आप देखिए कि किस तरह से डॉक्टर पाटिल ने इस पूरी कहानी को रचा है। तथ्य,तर्क और महाभारत का संदर्भ जोड़कर इस पूरी कहानी को उन्होंने बुना है।
नेतन्याहू ने मोदी से पूछा कि इस परिस्थिति से निपटने का तरीका क्या है? मोदी ने कहा, मैं तरीका नहीं बता सकता, लेकिन महाभारत का एक प्रसंग सुना सकता हूं। मोदी ने नेतन्याहू से पूछा कि तुम्हें पता है कि अभिमन्यु कैसे मारा गया? चूंकि नेतन्याहू ने पूरी महाभारत पढ़ी हुई थी तो उन्होंने कहा कि द्रोणाचार्य,कर्ण,कृपाचार्य,अश्
अब नेतन्याहू को समझ में आ चुका था कि अगर नईम कासिम को मारना है तो उसे बंकर से बाहर निकालना पड़ेगा। तो डाक्टर पाटिल कहते हैं, इसके बाद नेतन्याहू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फेल्ड फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पैसा दिया और उनसे कहा कि सिर्फ इतना करना है कि जो युद्धविराम की शर्तें हैं, उनमें लेबनान भी शामिल हो जाए। डाक्टर पाटिल की इन बातों में कितनी सच्चाई है मैं फिर कह रहा हूं नहीं मालूम लेकिन इतना तो सच है कि पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच डॉक्यूमेंट्स का आदान-प्रदान कर रहा था। ऐसी खबरें आईं कि उसने ईरान के सामने कुछ बातें रखीं और अमेरिका के सामने कुछ और। युद्धविराम की शर्तों में लेबनान में इजराइल के हमले बंद हों, यह शामिल था या नहीं इस पर विवाद है। इजराइल का कहना है कि शामिल नहीं था। ईरान का कहना है कि शामिल था। अमेरिका दोनों तरफ की बात कर रहा है। लेकिन उसने इजराइल को लेबनान पर हमला करने से रोका भी नहीं। तो जैसे ही युद्धविराम की खबर आई और उसमें यह बात सामने आई कि लेबनान को भी इसमें शामिल किया गया है, नईम कासिम अपने बंकर से बाहर आ गया। नेतन्याहू ने अपने आईडीएफ चीफ से कहा, यह लो तुम्हारा जयद्रथ। उसी समय एफ35 से रॉकेट चला और नईम कासिम का खात्मा हो गया।
अब देखिए डॉक्टर पाटिल ने अपनी कहानी को रोचक बनाने के लिए कैसे कड़ियों को जोड़ा है। अब आप तय करें कि इनमें से कितनी बातों को आप तथ्यात्मक रूप से सच मानते हैं और कितना कहानी का हिस्सा मानते हैं। लेकिन कुछ बातें तो तथ्यात्मक रूप से निसंदेह सही हैं। एक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध से दो दिन पहले इजराइल गए थे और प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मिले थे। दूसरा लौटकर उन्होंने वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी। तीसरा युद्धविराम में लेबनान और हिजबुल्लाह शामिल हैं कि नहीं, इस पर दुविधा बनी हुई थी।
युद्धविराम के बाद अमेरिका और ईरान में एक दौर की बातचीत हो चुकी है और लगता है कि आगे चलती रहेगी। कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान दोनों इस युद्ध से निकलना चाहते हैं, लेकिन अपनी-अपनी शर्तों पर। इजराइल इससे नहीं निकलना चाहता है। उसका मानना है कि जब तक ईरान की यह हालत न हो जाए कि वह आक्रमण करने लायक ही न रहे, तब तक इस युद्ध को खत्म नहीं होना चाहिए। खाड़ी के देशों में भी धीरे-धीरे यही राय बन रही है। अगर इस युद्ध से ईरान मजबूत होकर निकला तो खाड़ी देशों के सामने उसके सामने सरेंडर करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचेगा। देखना यह भी है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू महाभारत के किसी और प्रकरण से प्रेरणा लेकर कोई और रणनीति बनाते हैं क्या? तो याद रखिए महाभारत भले ही 5000 साल से पुराना हो लेकिन जीवन की हर परिस्थिति में आज भी प्रासंगिक और मार्गदर्शक बना हुआ है। इसलिए अपने पौराणिक ग्रंथों को सम्मान की नजर से देखिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



