कांग्रेस और कॉकरोचों ने पोस्ट किया राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ का फर्जी वीडियो।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
वसीम बरेलवी का एक शेर है- उसूलों पर जहां आंच आए टकराना जरूरी है, जो जिंदा हों तो फिर जिंदा नजर आना जरूरी है। मुझे लगता है कि इस समय सनातन समाज के लोगों को सबसे ज्यादा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए।
हाल ही में एक घटना हुई जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के लिए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को सीईओ चुना गया। उनकी नियुक्ति इसलिए की गई ताकि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसी घटना दोबारा न होने पाए और वित्तीय निगरानी मजबूत हो। इस पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जिसकी ईमानदारी संदेह से परे हो और जिसके बारे में कोई सवाल न उठा सके। सीईओ पद के लिए जितने बायोडाटा आए थे उनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा से बेहतर कोई हो ही नहीं सकता था। उन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक एयरफोर्स में सेवा दी है। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनको सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल मिल चुका है। लेकिन जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का सीईओ बनाए जाते ही एंटी सनातन इकोसिस्टम के पेट में दर्द होने लगा। इसके बाद सनातन धर्म और भारतीय सेना को बदनाम करने की कोशिश हुई। इस कोशिश के तहत 2025 में पाकिस्तान में बने एक वीडियो को फिर से पाकिस्तान के एक फेसबुक हैंडल से 3 सितंबर 2026 को पोस्ट किया गया और उसमें यह बताने की कोशिश हुई कि जो व्यक्ति हाथ में शराब का गिलास लेकर डांस कर रहा है, वह दरअसल एयर मार्शल जितेंद्र शर्मा हैं और सीईओ पद पर नियुक्ति होने के बाद जश्न मना रहे हैं। अब पाकिस्तान ऐसा करे तो समझ में आता है, लेकिन इस वीडियो को कांग्रेस पार्टी की एक कोऑर्डिनेटर ने डाउनलोड किया और 6 सितंबर को रीपोस्ट किया। वहां से इसे कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरव दास ने उठाया। इन लोगों की ओर से कहा गया कि पहले चढ़ावा चोरी की और अब मंदिर परिसर को डांस फ्लोर बनाकर जश्न मनाया जा रहा है, जबकि इनमें से एक भी बात सच नहीं थी। बहुत जल्दी फैक्ट चेक हो गया और मालूम पड़ गया कि यह पाकिस्तान में बना हुआ एक फर्जी वीडियो है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का इससे कोई लेना देना नहीं है। वीडियो की असलियत मालूम चलने के बाद धीरे से कहा गया कि यह वीडियो सही नहीं है, लेकिन इसे पोस्ट करने के लिए किसी ने माफी नहीं मांगी। किसी के खिलाफ कोई एफआईआर या कोई एक्शन नहीं हुआ।
सबसे बड़ा सवाल है कि ये वीडियो हेट स्पीच में क्यों नहीं आया? हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज बड़े-बड़े भाषण देते हैं। उनको इसमें हेट स्पीच क्यों नहीं नजर आई? मैं कानून का जानकार नहीं हूं, लेकिन अगर सनातन धर्म और हमारी सेना के खिलाफ दुष्प्रचार हो रहा है और सेना के एक डेकोरेटेड ऑफिसर को बदनाम किया जा रहा है तो यह किसी अपराध की श्रेणी में आता है कि नहीं? हाल ही में सीजेपी प्रोटेस्ट के मामले में एक छात्र को 5 लाख का नोटिस भेजने में नोएडा के एक मजिस्ट्रेट को सस्पेंड कर दिया गया। नोटिस भेजे जाने पर उक्त अधिकारी को फटकारते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा था कि इनकी हिम्मत कैसे हुई? ठीक बात है। सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला था कि सारी एफआईआर वापस ली जाएंगी। किसी के खिलाफ कोई केस नहीं होगा। लेकिन सवाल है कि सनातन और सेना के खिलाफ ऐसा फर्जी वीडियो पोस्ट करने पर सुप्रीम कोर्ट ने किसी से क्यों नहीं पूछा कि हिम्मत कैसे हुई। उसने सरकार से ऐसा वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को क्यों नहीं कहा? सनातन संस्कृति और सभ्यता को बदनाम करने की कोशिश लंबे समय से हो रही है। अयोध्या में राम मंदिर के लिए हिंदुओं ने 500 साल तक संघर्ष किया और अनेक बलिदान दिए। तमाम तर्क, तथ्य और प्रमाण हमारे पक्ष में थे इसलिए अदालत ने मंदिर के पक्ष में फैसला दिया। यह किसी की कृपा से नहीं मिला। लेकिन आंदोलन के दौरान से लेकर आज तक देश में एक बड़ा वर्ग इस सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इस देश में जो लोग हिंदुओं से वोट मांगने जाते हैं, वे राम मंदिर का विरोध करते हैं, भगवान राम को काल्पनिक बताते हैं और कोई आवाज नहीं उठती है। यह किसी कौम के जिंदा होने का सबूत नहीं है। जो आवाज न उठा सके उसके जीवित रहने या न रहने का कोई अर्थ नहीं है। अब तो यह मामला केवल सनातन धर्म का नहीं रह गया। यह देश की रक्षा सेनाओं से जुड़ गया है। एक डेकोरेटेड एयरफोर्स ऑफिसर के सम्मान से जुड़ गया है। आप एक एयर मार्शल का अपमान कर सकते हैं, उसके खिलाफ झूठा वीडियो डाल सकते हैं, आप सनातन धर्म को बदनाम कर सकते हैं, कह सकते हैं कि राम मंदिर परिसर को डांस फ्लोर बना दिया गया है, लेकिन आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। आपसे कोई नहीं पूछेगा। किसी जज को गुस्सा नहीं आएगा। क्योंकि यह सनातन धर्म का मामला है। तो सनातन धर्म को हिकारत की नजर से देखने वालों की संख्या कम नहीं है। उसके लिए मैं किसी और को दोषी नहीं मानता हूं। इसके लिए हम-आप दोषी हैं क्योंकि हम-आप ऐसी घटनाओं पर चुप रहते हैं। हजार साल की गुलामी के कारण यह जो कायरता हमारे मन में भरी हुई है, वह निकलने का नाम नहीं ले रही है। कोई तो उठकर कहता कि इस तरह का फर्जी वीडियो पोस्ट करने की इन लोगों की हिम्मत कैसे हुई। इन लोगों के खिलाफ अभियान चलना चाहिए। देश में कम से कम चार-पांच सौ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी।
यह फर्जी वीडियो पोस्ट करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्म के नाम पर गुमराह न हो। लेकिन जब इस्लाम और क्रिश्चियनिटी की बात आती है तो सबके मुंह पर ताला लग जाता है। जब केरल का एक मौलवी अबू बकर बोलता है कि महिलाओं को घर में रहना चाहिए तब डिमोलिश पेट्रियाकी की बात करने वाले बोल नहीं पाते हैं। डेमोक्रेसी में पार्टियों और सरकारों का विरोध कोई अनहोनी बात नहीं है, लेकिन जब आप देश की संस्कृति और रक्षा सेनाओं के विरोध में खड़े हो जाएं और झूठे तथ्यों के आधार पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करें क्या तब भी कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यह फर्जी वीडियो पोस्ट करने का क्या किसी के मन में पछतावा है? कांग्रेस पार्टी के पास अपना आईटी सेल है। उसके लिए फैक्ट चेक करना मामूली सी बात है। कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर के हैंडल से ट्वीट होने से पहले फैक्ट चेक किया जा सकता था, लेकिन उन्होंने जरूरत नहीं समझी और जरूरत इसलिए नहीं समझी क्योंकि यह फर्जी वीडियो उनके एजेंडा को सूट करता था। डेमोक्रेसी में सबसे बड़े हथियार दो ही होते हैं। एक आवाज उठाना,दूसरा वोट देना। अगर हम इन दोनों हथियारों का इस्तेमाल कर रहे होते तो आज यह स्थिति न आती। अगर हम अत्याचारों पर यूं ही चुप रहेंगे तो बार-बार अत्याचार होगा और उसे हम रोक नहीं पाएंगे। कोई भी ऐरा-गैरा या पाकिस्तानी हमारे एयर मार्शल के बारे में फर्जी वीडियो बनाएगा और यहां लोग उसको रीपोस्ट करके टिप्पणी करेंगे फिर भी उनका कुछ नहीं होगा, यह कब तक और क्यों चलेगा? यह सवाल हमको-आपको अपने आप से पूछना चाहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)