दंगामुक्त और माफियामुक्त यूपी जैसे फैक्टर 27 के विधानसभा चुनाव में बड़ा असर डालेंगे

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में चंद महीनों का ही वक्त रह गया है। प्रदेश में पिछले 12 साल और पिछले साढ़े नौ साल के दो अलग-अलग कालखंडों में बहुत कुछ बदला है। इन कालखंडों में जहां मुस्लिम वोट बैंक का वीटो खत्म हो गया, वहीं मुसलमानों से उनका दंगा करने का अधिकार भी छीन लिया गया।
2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और 2017 में योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बने। दोनों का कार्यकाल क्रमश: 12 साल और साढ़े नौ साल का हो गया है। 2014 से ही यूपी समेत पूरे देश में मुस्लिम वोट बैंक का वीटो खत्म हो गया। यूपी में कभी सपा और बसपा में होड़ रहती थी कि जिसे मुस्लिम वोट ज्यादा मिल गया वह सत्ता में आ जाएगा। इसके बाद योगी ने यूपी की राजनीति और समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन किया। उन्होंने मुसलमानों का दंगा करने का अधिकार, जो उन्हें संविधान ने नहीं,तुष्टीकरण की राजनीति ने दिया था, छीन लिया। आप बताइए कि बीते 9 साल में उत्तर प्रदेश में कौन सा दंगा हुआ। इसके अलावा बहुत से परिवर्तन हुए। यूपी के बड़े शहरों वाराणसी, गोरखपुर, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ के बारे में आप सुनते रहते हैं। बरेली के बारे में चर्चा कम होती है। बरेली उस पांचाल राज्य का हिस्सा था, जहां की द्रौपदी थीं। इससे अंदाजा लगाइए कि हिंदुओं का कितना बड़ा केंद्र था। इस पर 1559 में मुगलों ने कब्जा कर लिया और यहीं बरेलवी संप्रदाय की स्थापना हुई। तभी से यहां पर बरेलवी संप्रदाय की तूती बोलती थी। इस संप्रदाय के लोगों ने देश के विभाजन की मुहिम तो जोर शोर से चलाई लेकिन पाकिस्तान बनने के बाद वहां नहीं गए। यहां इनका एक नेता हुआ करता था तौकीर रजा। हालांकि अब भी है पर 11 माह से जेल के अंदर है। उसका आतंक इतना था कि कोई सरकार उसे हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करती थी। एक बार मायावती की सरकार ने की और उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद बरेली में इस कदर दंगा हुआ कि उसे आधे घंटे बाद ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद तो वह खुलेआम चुनौती देता था कि कोई मुझे हाथ लगाकर दिखाए। योगी सरकार के समय उसने आई लव मोहम्मद अभियान चलाया। उसकी पूरी कोशिश थी कि बरेली से दंगा शुरू हो और पूरे देश में फैले। उसे लगा कि योगी क्या कर पाएंगे? लेकिन योगी सरकार ने उसे, उसके दामाद, उसके परिवार के लोगों और उसके जितने गुर्गे थे सबको गिरफ्तार कर लिया। तौकीर रजा 11 महीने से जेल में है। योगी जी ने क्या परिवर्तन किया है उसे इस बात से समझिए कि अखिलेश यादव, जो खुद को मुसलमानों का रहनुमा समझते हैं, की 11 महीने से हिम्मत नहीं हुई है कि तौकीर रजा के समर्थन में एक बयान ही दे दें। विपक्ष का कोई नेता उसके समर्थन में बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।
बात केवल दंगे की नहीं होती है। दंगे में क्या होता है? 99% दंगे मुसलमान शुरू करते हैं। दंगों के बारे में हम यही जानते हैं कि इतने लोग मारे गए, इतने घायल हुए, इतने घर जला दिए गए, इतनी सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। उसके बाद क्या होता है उसकी ज्यादा चर्चा नहीं होती। उसके बाद होता है हिंदुओं का पलायन। उनकी संपत्तियों पर कब्जा। औने-पौने दाम में उनकी संपत्तियां खरीदना। यह ट्रेंड देश में जहां जहां दंगे हुए हैं, आपको देखने को मिलेगा। उसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश का संभल है। दंगा करके संभल से हिंदुओं का सफाया कर दिया गया। संभल इतना बड़ा तीर्थ है। उसे हड़प लिया गया। अब योगी सरकार उसका पुनरुद्धार करा रही है। देश में जहां भी मुसलमान बहुमत में हैं, वहां से हिंदुओं को जगह छोड़कर जाना पड़ता है। उनके मकानों,घरों, जमीन यहां तक कि मंदिरों पर भी कब्जा हो जाता है। दूसरी ओर आपको देश में कोई ऐसा इलाका नहीं मिलेगा जो हिंदू बहुल हो और वहां से मुसलमानों को अपनी संपत्ति छोड़कर भागना पड़ा हो। इससे आप समझिए कि मैं शत्रु बोध की बात बार-बार क्यों करता हूं। ब्रिटिश काल से ही ऐसा क्यों है कि मुस्लिम बहुल इलाका संवेदनशील माना जाता है। इससे समझिए कि हम किन परिस्थितियों में जी रहे हैं और धन्यवाद दीजिए अपने पुरखों को कि मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी, अत्याचार व बर्बरता के बावजूद हम और आप आज भी हिंदू बने हुए हैं। उन्होंने हर तरह की तकलीफ सही लेकिन अपने धर्म को नहीं छोड़ा। आज लोग थोड़े से पैसे के लालच में आतंकवादियों को मकान, गाड़ी किराए पर दे देते हैं। तो योगी ने यूपी में मुसलमानों से दंगा करने का ही अधिकार नही छीना है, उससे पहले उनसे माफियागिरी करने का भी अधिकार छीना। उससे पहले अवैध बूचड़खाने चलाने का भी अधिकार छीना। ये सारे काम मुसलमानों की फाइनेंशियल बैकबोन थे। योगी ने उसको तोड़ दिया। योगी ने केवल बड़े माफिया का सफाया नहीं किया उनके आर्थिक तंत्र का भी सफाया कर दिया। यह होता है जब आपकी नीयत साफ हो और आप कानून के मुताबिक काम करें। इसलिए आप देखिए योगी सरकार के एक भी कदम पर अदालत से कोई एडवर्स टिप्पणी या फैसला नहीं आया है।
क्या आपको लगता है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इन बातों का कोई असर नहीं पड़ेगा। मुसलमानों के दंगा करने के अधिकार के आधार पर ही ध्रुवीकरण कराया जाता था। मुजफ्फरनगर का दंगा याद कीजिए। उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और उस दंगे में आजम खान का क्या रोल था। किस तरह से मुस्लिम दंगाइयों को छोड़ा गया और हिंदुओं को जबरन फंसाया गया। मुस्लिम दंगा पीड़ितों और हिंदू दंगा पीड़ितों के लिए अलग-अलग कैंप बनाए गए थे। अखिलेश,प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी सिर्फ मुस्लिम दंगा पीड़ितों से मिले और केवल उनके लिए मुआवजे की घोषणा की। वह तो भला हो सुप्रीम कोर्ट का। उसने कहा कि कोई सरकार ऐसे कैसे कर सकती है? तब उस आदेश को वापस लिया गया। इससे अंदाजा लगाइये कि मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए सपा-कांग्रेस किस हद तक जा सकते हैं। अब उत्तर प्रदेश में किसी मुसलमान नेता की हिम्मत नहीं है कि वह सांप्रदायिक दंगे की बात करे। कोई ऐसा माफिया नहीं रह गया है जो हिंदुओं को डराकर उनके घर, मकान और जमीन पर कब्जा कर सके। योगी राज में यह बदलाव आया है। उनकी सरकार के ये जितने कदम मैंने गिनाए हैं इनमें कहीं कोई जाति का एंगल नहीं है। अब कई लोग आरोप लगाते हैं कि मुसलमानों को ज्यादा परेशान किया जा रहा है। अरे भाई, मुसलमान अगर ज्यादा अपराध करेंगे, दंगा करेंगे, अवैध बूचड़खाने चलाएंगे तो सजा किसको मिलेगी? क्या कोई आम मुसलमान परेशान हुआ है? क्या सरकार की कोई योजना ऐसी है जिसमें मुसलमानों के साथ भेदभाव किया गया हो? देखिए ये सब पॉलिटिकल बातें मुसलमानों को बहुत जल्दी समझ में आती है। हिंदुओं को कुछ समझ में नहीं आता। उनकी नींद तभी खुलती है जब उनकी गर्दन पर चाकू रखा जाता है। उससे पहले तक उनको कोई मतलब नहीं कि हमारे मोहल्ले, प्रदेश और देश में क्या हो रहा है। इस मानसिकता से जब तक नहीं निकलेंगे तब तक हम सांप्रदायिक हिंसा का शिकार होते रहेंगे। योगी जी कानून का राज स्थापित कर सकते हैं, लेकिन हमारा आपका दिमाग नहीं बदल सकते। हमें देखना ही होगा कि हमारा हित किसमें है। सिर्फ साथ देने से हम बहुत कुछ बदल सकते हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)