साधुओं का वेश धारण कर घूम रहे 6 युवकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा
अभी कुछ ही दिनों पहले बिहार के वैशाली जिले के मुख्यालय हाजीपुर से एक चौंक देने वाली खबर आई थी, खबर के अनुसार स्थानीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बसहा बैल ( श्रावण मास में पूजन के लिए) लिए क्षेत्र में भिक्षाटन को घूम रहे 6 संदिग्ध साधुओं को पकड़ा था, जिनसे हुई पूछताछ के दौरान साधुओं का वेश धारण कर घूम रहे 6 युवकों ने चौंका देने वाला खुलासा किया था।दरअसल पूछताछ में युवकों ने बताया कि वे सभी उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के निवासी हैं और मुस्लिम धर्म से संबंध रखते हैं जो हिंदू साधुओं का वेश धारण कर क्षेत्र में भिक्षाटन के माध्यम से पैसे एवं अनाज एकत्रित कर रहे थे, पूछताछ में युवकों ने बताया कि यह काम वे कई वर्षों से कर रहे हैं और उनके अतिरिक्त गांव के अन्य गुट भी इसमें संलिप्त हैं।
वैशाली के हाजीपुर की ये घटना कोई अपवाद नहीं है इससे पूर्व पिछले वर्ष उत्तरप्रदेश के अयोध्या में भी पुलिस में हिंदू साधुओं के वेश में घूम रहे सुल्तानपुर के रहने वाले 2 मुस्लिम लड़कों को गिरफ्तार किया था, जिन से हुई पूछताछ में भी दोनों ही लड़कों ने गांव के अन्य लोगों की इस तरह की गतिविधियों में व्यापक संहिता का खुलासा किया था, इस क्रम में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से भी पुलिस ने पिछले सप्ताह भगवा वस्त्र पहने हिंदू साधुओं के रूप में घूम रहे मुस्लिम समुदाय से संबंध रखने वाले 2 लोगों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी है कि यह दोनों ही व्यक्ति क्षेत्र में घूम कर स्थानीय घरों की रेकी कर रहे थे, जिसके पीछे उनका उद्देश्य बच्चे चुराने का बताया जा रहा है, इस क्रम में जब पुलिस के एक जवान को दोनों पर संदेह हुआ तो उसने उनसे गायत्री मंत्र का उच्चारण करने को कहा जिसके बाद दोनों की कलई खुल गई, पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के निवासी हैं, जो यहां बच्चों की रेकी कर रहे थे।
दरअसल पिछले कुछ समय से मुस्लिम युवकों के हिन्दू साधुओं का वेशभूषा धारण कर देश के विभिन्न क्षेत्र में घूमे जाने के ऐसे अनेकों मामले प्रकाश में आ रहे हैं जो सुनियोजित रूप से चलाए जा रहे जिहाद के नए स्वरूप के षड़यंत्र की ओर ही इशारा करता है, इस क्रम में हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का मत है कि यह सब कुछ एक बड़े षड्यंत्र का भाग है जिसके अंतर्गत ना केवल सनातन धर्म में आस्था एवं आदर की दृष्टि से देखे जाने वाले संतो एवं साधुओं की छवि धूमिल करने का कुकृत्य किया जा रहा है अपितु इसकी आड़ में देश भर के बहुसंख्यक क्षेत्रों में एक प्रकार का अघोषित सर्वे कराने का भी षड़यंत्र रचा जा रहा है।
बहुसंख्यक समाज के प्रतिनिधियों कि इन आशंकाओं को बल मिलना इसलिए भी स्वभाविक दिखाई दे रहा है क्योंकि अभी हाल ही में प्रतिबंधित किए गए कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के फुलवारी शरीफ से बरामद किए गए डॉक्यूमेंट के अनुसार, संगठन बेरोजगार मुस्लिम युवाओ के माध्यम से देश भर में अपने सूचना तंत्र को मजबूत करने की बात करता है, इस क्रम में यदि भविष्य में ऐसे गिरोहों का संबंध यदि किसी कट्टरपंथी संगठन से जुड़ता है तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
इसके अतिरिक्त हिंदू साधुओं की वेशभूषा धारण कर घूम रहे मुस्लिम समुदाय के इन गिरोहों में से बातचीत के क्रम में कईयों की भाषा शैली रोहिंग्या अथवा बांग्लादेशी घुसपैठियों से मिलती जुलती है जो जिहाद के इस स्वरूप में इनकी व्यापक संलिप्तता को दर्शाता है, यहां महत्वपूर्ण यह भी है कि सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस संदर्भ में रोहंगिया मुसलमानों को देश की संप्रभुता एवं अखंडता के लिए खतरा बताते हुए आतंकी गतिविधियों में इनकी संलिप्तता की बात मानी है, ऐसे में भविष्य में ऐसे गिरोहों में रोहंगिया मुसलमानों की किसी वृहद उद्देध्य के लिए भागेदारी की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।
इन सब के बीच जिहाद के इस नए स्वरूप का सबसे बड़ा खतरा तो उस बहुसंख्यक समाज के ऊपर है जिसके लिए संत समाज शताब्दियों से आस्था का केंद्र रहे हैं, यही कारण है कि देश के कई राज्यों में वृहद स्तर पर चलाए जा रहे इस जिहाद एवं शताब्दियों से उसकी संस्कृति का अभिन्न भाग रहे संत परंपरा में भेद करने में मोटे तौर पर वह असमर्थ दिखाई दे रहा है।
चिंताजनक यह भी है कि भारतीय संस्कृति में संतो एवं साधुओं के प्रति मातृ शक्ति की भी अटूट श्रद्धा रही है जो जिहाद के इस जटिल स्वरूप के षड़यंत्र का सहजता से शिकार हो सकती हैं, दरअसल भगवा वस्त्र धारण कर साधुओं की वेशभूषा में घूम रहे इन जिहादियों की ऊपर-ऊपर से पहचान करना बेहद कठिन दिखाई पड़ता है, यही कारण है कि बड़े स्तर पर हो रही इस धोखाधड़ी के विरुद्ध कम ही शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और मोटे तौर पर इनकी वास्तविक पहचान तभी सार्वजनिक हुई है जब इन गिरोहों के कुछेक सदस्यों की गतिविधियां सार्वजनिक रूप से संदेहास्पद दिखाई दी हैं।
कुल मिलाकर हिन्दू साधुओं की वेशभूषा धारण कर हिन्दू बहुल क्षेत्रों में घूम रहे मुस्लिम युवकों के ये गिरोह ना केवल आदि काल से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहे संतो-साधुओं की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास कर रहे अपितु सुरक्षा की दृष्टि से भी ये बेहद ही गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। (एएमएपी)



