यूपी ही नहीं, बाहर तक सुनाई देगी इस बयान की गूंज।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान की आजकल बड़ी चर्चा है। प्यार से समझ जाओ तो ठीक है नहीं तो दूसरे उपाय भी हैं। अब सुनने में तो यह बात बड़ी साधारण सी लगती है, लेकिन जिनकी ओर इशारा करके कही गई है उनके लिए यह ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है। इस बयान की गूंज केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। यह पूरे देश में सुनाई देगी।
तो पहले इसका संदर्भ जान लेते हैं। मुसलमानों में बहुत से लोगों की जिद है कि हम सड़क पर नमाज पढ़ेंगे। उस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क चलने के लिए है,नमाज पढ़ने के लिए नहीं। मस्जिद का नाम न लेते हुए उन्होंने कहा कि अगर जगह कम पड़ती है तो दो शिफ्ट में नमाज पढ़ो। और फिर उसके बाद जो बात उन्होंने कही, उसे पूरे देश को सुनना और समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर घर में जगह कम है तो भाई आबादी कम करो। यह ऐसा वाक्य है जो पूरा पॉलिटिकल नैरेटिव सेट करता है। किसी के खिलाफ कोई अपशब्द नहीं, लेकिन चेतावनी ऐसी है कि मुझे योगी के मुंह से ऐसे वाक्य सुनकर बार-बार सरदार पटेल की याद आती है। लखनऊ के अमीनाबाद में ऐतिहासिक झंडे वाला पार्क है। आजादी के बाद मुसलमान दंगा कर रहे थे। उसी दौरान झंडे वाला पार्क में सरदार पटेल की सभा थी। दंगाइयों से उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अगर यही रवैया रहा तो धरती का तवा इतना गर्म कर देंगे कि चूहों की तरह से बिलबिलाकर बिल से बाहर निकल आओगे। अब इस पूरी बात में उन्होंने किसी वर्ग या किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। लेकिन जिन तक संदेश पहुंचना था, पहुंच गया। वही काम योगी आदित्यनाथ करते हैं। वह एक वाक्य से पूरा नैरेटिव खड़ा कर देते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक सत्र में उन्होंने कहा था, मैं ईद नहीं मनाता। मुझे नहीं मालूम कि कितने हिंदुओं ने इस बात के संदर्भ को समझा। आप जानते हैं कि यह त्योहार मनाया क्यों जाता है? यह मोहम्मद साहब की जंगे बद्र में जीत की खुशी में मनाया जाता है। यह लड़ाई मोहम्मद साहब की सेना ने कुरैश कबीले के खिलाफ लड़ी थी। इस्लाम की यह पहली लड़ाई थी। कुरान में इस लड़ाई के अलावा किसी लड़ाई का जिक्र नहीं मिलता है। तो सवाल यह है कि हिंदुओं के लिए इसमें मनाने के लिए क्या है? उन्हें क्यों खुशी मनानी चाहिए? इस्लाम के जो विरोधी थे उनको मारा गया। उसकी खुशी इस्लाम के मानने वाले मनाते हैं। लेकिन हमारे मनाने का क्या कारण है? जो लोग गंगा जमुनी तहजीब के झांसे में आते हैं और कहते हैं कि ईद भाईचारे का त्योहार है। उनसे सवाल है कि युद्ध में लोगों को मारकर अपनी जीत का जश्न मनाना भाईचारे का त्योहार कैसे हो सकता है? लेकिन हिंदुओं को कुछ पता नहीं है। बस एक अंधी दौड़ में चले जा रहे हैं। जो लेफ्टिस्टों, कांग्रेसियों और उनके इतिहासकारों ने बता दिया, उसी पर हम आंख बंद करके चले जा रहे हैं। लेकिन अब देश में बड़ा बदलाव हो रहा है। इस बात को समझने की जरूरत है। योगी आदित्यनाथ के बयान का असर मैं फिर कह रहा हूं केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। उसके बाहर भी होगा। इसका कारण है कि 1947 से 2014 तक एक समुदाय यानी मुसलमानों को एक प्रिविलेज मिला हुआ था कि वह नियम कानून तोड़ सकते हैं। उनके लिए संविधान कोई मायने नहीं रखता। वह सड़क, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या कहीं भी नमाज पढ़ सकते हैं। कोई रोकेगा तो आप सांप्रदायिक हैं। इस तरह की गलतफहमी बहुत से लोगों में होती है। एक बरेली के मौलाना हैं तौकीर रजा। वह 7 महीने से जेल में हैं। कभी उत्तर प्रदेश में उनका भौकाल ऐसा था कि कोई सरकार उनको हाथ नहीं लगा सकती थी। बरेली में एक बार दंगा हुआ। कोर्ट ने उन्हें दंगे का मास्टरमाइंड बताया और कहा कि सरकार ने उन्हें बचाने की कोशिश की। उस समय बसपा की सरकार थी। तौकीर रजा इस गलतफहमी में जीते रहे और 2025 में उन्होंने एक गलती कर दी। वह फ्रायडे की नमाज के बाद निकले और बरेली में लव मोहम्मद के नारे और पोस्टर लगने लगे। भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। पेट्रोल बम चले और पथराव हुआ। तौकीर रजा को पिछली सरकारों का अनुभव था। उन्हें लगा कि उनको तो कोई हाथ लगाएगा नहीं। लेकिन सिर्फ 24 घंटे में योगी की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया। आज तक जेल में हैं। उनका दामाद मोहसिन रजा,जिसे बड़ी गलतफहमी थी कि वह बहुत बड़ा गुंडा है, वह भी जेल में है। तौकीर रजा की गिरफ्तारी के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपील जारी की कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। अब आप समझिए कि इन लोगों की किस तरह की मानसिकता है। जहां पेट्रोल बम चल रहे हों,पथराव हो रहा हो,लोगों के घरों से हथियार बरामद हो रहे हों, उसको शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बता रहे हैं। तो ये सब इसलिए बता रहा हूं कि ये संदर्भ समझिए कि सड़क पर नमाज पढ़ोगे तो पुलिस अपना काम करेगी। अब इस देश के किसी हिस्से में दोबारा कोई शाहीन बाग नहीं बनने वाला है। यह बात जितनी जल्दी ये लोग समझ जाएं उनके लिए उतना अच्छा है।
पहले और अब के वातावरण में जो परिवर्तन आया है, उसका नतीजा देखिए। हाल ही में भोजशाला पर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का फैसला आया कि यह मंदिर है। यहां सिर्फ हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार है। इस फैसले के खिलाफ आपको कहीं से कोई आवाज निकलती हुई सुनाई दी। याद कीजिए अयोध्या में जब रामलला टेंट में थे। तब टेंट के बाहर तुलसी का एक पौधा उग आया था। मुस्लिम पक्षकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और कहा कि यथास्थिति को बदला जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उस तुलसी के पौधे को वहां से उखाड़ा गया। इससे आप समझिए कि हम कहां से कहां पहुंचे हैं। जब अयोध्या का आंदोलन चल रहा था तब किस-किस तरह के बयान आते थे। सार्वजनिक पार्क बना दीजिए,शौचालय बना दीजिए,लाइब्रेरी बना दीजिए। आज किसी की हिम्मत है यह बोलने की कि भोजशाला में शौचालय बना दीजिए या सार्वजनिक पार्क बना दीजिए। यह परिवर्तन आम हिंदुओं में जागरण के कारण आया है। अयोध्या आंदोलन से जो शुरू हुआ था,वह एक अध्याय पूरा हो चुका है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के बाद अब दूसरे अध्याय की शुरुआत हो रही है। देश में इस समय पांच ऐसे नेता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, जो हिंदुत्व के बारे में बोलते हुए अपराध बोध से ग्रस्त नहीं होते। जो कुछ उनके मन में है, वही उनकी जुबान पर है। कानून के राज की स्थापना के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
आप देखिए पश्चिम बंगाल में क्या हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मंदिरों पर कब्जा करके पार्टी का दफ्तर बना लिया था। वह सब खाली करा लिए गए। सरकार को भी कुछ नहीं करना पड़ा। ज्यादातर मामलों में तो पब्लिक ने कर लिया और वहां अब पूजा अर्चना होने लगी है। यह होता है जब आप अपनी ताकत का अहसास कराते हैं। सड़क पर उतरकर हिंसा करने की जरूरत नहीं है। केवल यह बताने की जरूरत है कि हमारी ताकत क्या है। यह बात हमेशा याद रखिए कि हिंसा करने से आपका पक्ष कमजोर होता है। ताकतवर वह है, जिसे अपनी ताकत का इस्तेमाल न करना पड़े। कमजोर व्यक्ति अपनी ताकत का इस्तेमाल करता है। यह जो सड़कों पर नमाज पढ़ने वाले,पथराव करने वाले हैं,दरअसल यह कमजोर और कायर लोग हैं और यह एक ही भाषा समझते हैं। एक बार योगी जी ने कहा भी था कि जो जिस भाषा में समझे, उसको उसी में समझाना चाहिए। तो यह एक वाक्य जो योगी आदित्यनाथ ने बोला है कि प्यार से मान जाओ वरना दूसरे भी तरीके हैं, इससे बहुत से लोगों की रीढ़ में दर्द होने लगा होगा। अब दंगाइयों और आतंकवादियों को बचाने वाली सरकारें देश के ज्यादातर हिस्सों से बाहर हो गई हैं। केंद्र से तो बाहर हुए 12 साल हो गए। पश्चिम बंगाल से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जो अभियान शुरू हुआ है,आप देखते रहिए वह कितनी तेजी से आगे बढ़ने वाला है। जो लोग चिकन नेक काटने का सपना देख रहे थे, वह धरा का धरा रह जाएगा। उस क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की दृष्टि से इतने बड़े पैमाने पर काम होने जा रहा है जिसकी कल्पना बहुत से लोगों ने नहीं की होगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)