अजय विद्युत।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक यूं ही नहीं है। 4 जुलाई को वह उत्तराखंड के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कोई भी नेता गदगद हो सकता है और इसे धूमधाम से सेलिब्रेट करता। लेकिन धामी को पता है कि उनकी असली ताकत वह जनता है जो उन पर भरोसा करती है। उन्होंने 4 जुलाई से ही ‘जनता के द्वार सरकार’ कार्यक्रम की घोषणा की है। यह इस कार्यक्रम का दूसरा चरण है इसका उद्देश्य यही है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाया जाए। जनता, जिसे अपनी परेशानियों के निदान के लिए सरकार तक चल करके जाना पड़ता था, अब सरकार ही लोगों के दरवाजे पर जाकर उनकी शिकायतों का निवारण करे।
2021 में तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद 4 जुलाई 2021 को धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हैं और मुख्यमंत्री पद का 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के नारायण दत्त तिवारी के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अब सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। जिस राज्य ने 2000 में अपने गठन के बाद से ही अब तक 10 चेहरों को मुख्यमंत्री के रूप में देखा हो, वहां सबसे युवा मुख्यमंत्री का सबसे लंबे समय तक राज्य की सेवा करना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है।
उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और कांग्रेस विपक्ष में है। विपक्ष की ऐसी हालत है कि उसको मुख्यमंत्री धामी का विरोध करने के लिए मुद्दों को ढूंढना पड़ता है। और जिन मुद्दों को विपक्ष बड़ी खोजबीन के बाद उठाता है वे जन सरोकारों से जुड़ाव नहीं रखते इसलिए जनता का समर्थन हासिल नहीं कर पाते। धामी सरकार के खिलाफ कोई भी बड़ा आंदोलन विपक्ष खड़ा नहीं कर पाया।
मुख्यमंत्री धामी बिना शोर शराबा किए किसी की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लंबी लकीर खींचने मैं विश्वास रखते हैं। सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नंबर वन तो बन ही चुके हैं लेकिन उन्होंने कई क्षेत्रों में नई पहल कर उत्तराखंड को देश का नंबर वन राज्य बनने का सम्मान दिलाया है। इसे कुछ ही उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है। यह कानून 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ है। युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए मदरसा बोर्ड को समाप्त करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखंड ही है। एक लंबे समय से परीक्षाओं के दौरान नकल का चलन आम हो चुका था। धामी सरकार एक सख्त नकल विरोधी कानून लाई और उसे अमल में लाकर दिखाया। इसके अलावा मुस्लिम समाज में व्याप्त हलाला की कुप्रथा को खत्म करने के लिए उत्तराखंड ने पहली बार हलाला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की पहल की है। नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखंड पहले स्थान पर है। इस सूचकांक का उपयोग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा देश का मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट बनने के राह पर भी उत्तराखंड सिरमौर है। हाल के वर्षों में फिल्मों की शूटिंग, सिंगल-विंडो अनुमति और भारी सरकारी सब्सिडी जैसी बेहतरीन सुविधाओं के कारण राज्य को यह सम्मान दिया गया है।
उत्तराखंड में एक जुलाई को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 को औपचारिक तौर से लागू कर दिया गया है। इसी के साथ अब राज्य में अल्पसंख्यक युवाओं को गुणवत्तापूर्ण आधुनिक रोजगार परक और मुख्य धारा की शिक्षा मिल सकेगी। मदरसा बोर्ड केवल मुस्लिम समुदाय के लिए था। जबकि अब सभी अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा की पूरी व्यवस्था अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण करेगा। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समुदायों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन को शामिल किया गया है। इसमें मानक तय किए गए हैं कि स्कूलों में क्लासरूम का आकार क्या होना चाहिए, एक स्वास्थ्यप्रद वातावरण में विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाए। अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को मुख्य धारा की शिक्षा से जोड़ने की यह ऐसी अनूठी पहल है जिससे दूसरे राज्य भी प्रेरणा ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री धामी की सरकार ने उत्तराखंड में विकास कार्यों को- खास कर सड़कों और पुलों के नेट वर्क को- जिस स्केल पर और जिस स्पीड से चलाया है उसमें इस बात का तो ध्यान रखा ही गया है कि राज्य के लोगों को सुविधा एवं समृद्धि मिले, साथ ही एक सीमांत प्रदेश होने के नाते आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा को भी शीर्ष प्राथमिकता में रखा गया है।

बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री की चार धाम यात्रा के लिए जिस तरह की व्यवस्था उत्तराखंड सरकार ने की है, उसका ही परिणाम है कि पहले के मुकाबले भारी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। वह अपने आप में आस्था और उत्तराखंड की समृद्धि का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। नियोजित औरअंधाधुंध विकास कार्यों से पहाड़ को बचाने के लिए आपदा प्रबंधन की नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि देव भूमि उत्तराखंड धामी के कर्मभूमि है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के जो मुख्यमंत्री देश में विकास और सनातन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं उनमें बहुत ख़ामोशी के साथ और बहुत मजबूती के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम भी जुड़ चुका है।
उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपलब्धियों की गाथाएं इतनी लंबी है की एक लेख में नहीं समा सकती। किसी को यह भी लग सकता है कि क्या धामी में कुछ भी कमियां नहीं है। जरूर होगी। पर उनकी उपलब्धियां की सूची इतनी लंबी है जिसे उत्तराखंड का कोई भी मुख्यमंत्री अभी तक छू नहीं सका और विरोधी भी उन पर ऐसा कोई आप नहीं लगा पाए जो जनता के बीच टिक पाए।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता हरीश रावत कई मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली और फैसलों की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। जोशीमठ आपदा के समय सुझाव देने गए कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों और तीखे सवालों को धामी ने बहुत संयम से सुना था और हरीश रावत ने उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि ” धामी बहुत धैर्य के साथ विपक्ष की बात सुनते हैं।” इसके अलावा पिथौरागढ़ में धारचूला की एक छोटी पहाड़ी के ट्रीटमेंट को लेकर धामी सरकार द्वारा उठाए गए आपदा प्रबंधन के कदमों का भी रावत ने सार्वजनिक रूप से स्वागत किया था।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड को अभी कई ऊंचाइयां छूनी हैं। बकौल धामी, “हम उत्तराखंड को एक नए युग की ओर ले जा रहे हैं, जहां विकास और विरासत का अद्भुत संगम होगा।” उनका कहना है कि उत्तराखंड के हर कोने में हम आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और युवा सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारा विजन है कि उत्तराखंड को न सिर्फ आर्थिक मजबूती मिले बल्कि राज्य की संस्कृति और विरासत भी सशक्त हो।











